Search

सरायकेला : उत्कल सम्मेलनी की पहल पर जीवंत हुई जिले में लुप्त होती उड़िया मातृभाषा की शिक्षा व्यवस्था

Seraikela(Bhagya sagar singh) : सरायकेला खरसावां जिले में उड़िया भाषा व उड़िया संस्कृति मानने वालों की भी एक बड़ी संख्या है. जो अपने परिवार के बच्चों को उड़िया मातृभाषा की शिक्षा दिलाने के हमेशा से इच्छुक रहे हैं. इस क्षेत्र की एक बड़ी आबादी अपने को उड़ीसा से बिछड़ा हुआ विछिलांचल वासी मानती है. स्थानीय बुद्धिजीवियों के अनुसार दशकों पूर्व अविभाजित बिहार राज्य के एकीकृत सिंहभूम जिले में लगभग 500 ऐसे सरकारी विद्यालय संचालित थे जिनमें उड़िया भाषा के पठन पाठन की पूर्ण व्यवस्था था. सरकारी शिक्षक तो रहते ही थे. सभी विषयों की उड़िया पुस्तकें दुकानों में भी मिलती थी एवं विद्यालय के पुस्तकालयों में भी. उस समय के अधिसंख्य विद्यार्थी उड़िया मीडियम में ही शिक्षा ग्रहण करते थे. धीरे-धीरे विद्यालयों में उड़िया शिक्षक कम होते गए, नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने लगी इस प्रकार उड़िया भाषा की शिक्षा पूरी तरह बन्द सी होने लगी थी. इसे भी पढ़ें :गुड़ाबांदा">https://lagatar.in/gudabanda-wild-elephant-created-ruckus-damaged-three-houses/">गुड़ाबांदा

: जंगली हाथी ने मचाया उत्पात, तीन घरों को किया क्षतिग्रस्त 

बिहार में उड़िया भाषा के शिक्षा व्यवस्था की मांग हुई पर सरकार उदासीन

जिनको अपने मातृभाषा को जीवंत रखना था वे उड़ीसा से पुस्तकें मंगा कर अपने घर में ही भाषाई शिक्षा को सीखा करते रहे. तत्कालीन बिहार राज्य में उड़िया भाषा के शिक्षा व्यवस्था के लिये निरन्तर सरकार से मांग भी होती रही पर सरकार इस मामले में उदासीन रही. ओड़िसा राज्य सरकार से भी स्थानीय उड़िया भाषी बुद्धिजीवी अपने लुप्त होते मातृभाषा के संरक्षण में सहयोग की अपील करते रहे. इसी मध्य ओड़िसा राज्य की संस्था "उत्कल सम्मेलनी" के पहल पर जिले के कई स्थानों पर मातृभाषा ओड़िया के पठन पाठन की व्यवस्था होने लगी. सम्मेलनी के शिक्षक एवं शिक्षिकायें कुछ घरों में जाकर इच्छुक छात्रों को शिक्षा देने लगे. किसी बस्ती एवं टोले के किसी एक घर में अगल बगल के बच्चे एकत्रित होकर पढ़ने लगे. इसे भी पढ़ें :मनोहरपुर">https://lagatar.in/manoharpur-railway-worker-died-due-to-electrocution/">मनोहरपुर

: करंट लगने से रेलकर्मी की मौत

मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का भी रहा सहयोग

वर्ष 2005 से स्थानीय विद्यालयों में जहां उड़िया पढ़ने के इच्छुक छात्र अध्ययनरत थे. वहां उत्कल सम्मेलनी के शिक्षक मातृभाषा उड़िया पढ़ाने लगे. इस भाषा संरक्षण एवं विकास के लिये तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का भी सहयोग रहा. मौजूदा समय जिले के तीन प्रखंड सरायकेला, खरसावां एवं राजनगर में क्रमशः 1081, 1241 एवं 136 विद्यार्थी उड़िया मातृभाषा का अध्ययन कर रहे हैं. जिसके लिए उत्कल सम्मेलनी के 44 शिक्षक एवं शिक्षिकायें अपनी सेवा दे रहे हैं. उत्कल सम्मेलनी के माध्यम उड़ीसा सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को प्रति वर्ष निशुल्क उड़िया पुस्तकें भी उपलब्ध कराया जा रहा है. इसे भी पढ़ें :मनोहरपुर">https://lagatar.in/manoharpur-chiriya-residents-upset-due-to-the-fear-of-a-mad-youth/">मनोहरपुर

: पागल युवक के खौफ से चिरिया वासी परेशान

विद्यार्थियों को परीक्षा के समय ओड़िया प्रश्न पत्र वितरण किया गया

[caption id="attachment_411684" align="alignnone" width="738"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/Seraikela-Utkal-sammelani-e1662445097583.jpeg"

alt="" width="738" height="936" /> उत्कल सम्मेलनी के परिदर्शक सुशील सारंगी.[/caption] उत्कल सम्मेलनी के सरायकेला- खरसावां जिला परिदर्शक सुशील सारंगी ने बताया कि झारखंड सरकार द्वारा इस वर्ष 2022 में ओड़िया भाषा के विद्यार्थियों को परीक्षा के समय ओड़िया प्रश्न पत्र वितरण किया गया. साथ ही प्रथम श्रेणी एवं द्वितीय श्रेणी में अध्ययनरत विद्यार्थियों को उड़िया किताब भी उपलब्ध करवाया गया है. उन्होंने सम्मेलनी की ओर से सरकार के इस सकारात्मक पहल के प्रति आभार जताया है. उन्होंने उम्मीद व्यक्त की है कि आने वाले दिनों में उड़िया भाषा के संरक्षण एवं विकास हेतु सरकार अवश्य प्रयास करेगी. [wpse_comments_template]  

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp