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सरायकेला : महामारी कोरोना की मार से अब तक नहीं उबर सके पान दुकानदार

Seraikela(Bhagya sagar singh) :   महामारी कोरोना का प्रभाव मात्र बीमारी तक ही नहीं रहा बल्कि इससे सुरक्षा मानकों के अनुपालन दायरे में व्यवसायिक संतुलन भी अस्त व्यस्त हो गया. दो वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अनेक व्यवसाय ठप हुए फिर शुरू भी हुए. परन्तु पान दुकानदारों पर इसकी ऐसी मार पड़ी कि अब तक वे सम्भल नहीं सके हैं. जिस पान  दुकानों में सुबह से देर रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी अब एक-दो ग्राहक ही नजर आते हैं. मानव सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार सूबे में पान, पान मसाले जैसी वस्तुओं के विक्री एवं उपयोग पर प्रतिबंध जारी है. इसे भी पढ़ें :गुवा">https://lagatar.in/gua-in-the-closing-ceremony-children-presented-a-colorful-cultural-program/">गुवा

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पान वाले बोर्ड हटा कर बिस्किट चॉकलेट बेच रहे हैं

इसका सबसे बड़ा असर पीढ़ी दर पीढ़ी इसी धंधे से जुड़े पान दुकानदारों पर पड़ा है. धार्मिक आयोजन हो या कोई सामाजिक शुभकार्य विभिन्न तरह के पान का एक अलग स्थान हुआ करता था. कुछ विशेष तरह की पान बनाने वाले दुकानों के सामने लम्बी कतारें लगी रहती थी. कुछ पान वाले अपनी पहचान के लिए बड़े-बड़े बोर्ड लगा कर रखते  थे. अब बोर्ड हटा कर कोई बिस्किट चॉकलेट बेच रहे हैं तो कोई पानी की बोतल और शीतलपेय. कोरोना की मार से काफी बदली व्यवस्था के कारण पान के चर्चे अब यादगार लम्हे बन कर रह गए हैं. इसे भी पढ़ें :अबूधाबी">https://lagatar.in/abu-dhabi-poets-of-bihar-and-jharkhand-recited-poems-of-patriotism-at-the-indian-embassy-in-uae/">अबूधाबी

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 पूंजी के अभाव में व्यवसाय बदलने में असमर्थ हैं पानवाले

सरायकेला शहरी क्षेत्र के अनेक पान वाले पीढ़ी दर पीढ़ी से चली आ रही पान दुकान का व्यवसाय  नहीं बदल पा रहे है. इसका कारण जानकारी व पूंजी की कमी हैं.  इनका कहना है कि कोरोनकाल में पूरा बाजार अस्त व्यस्त हो गया था इनकी जो जमा पूंजी थी वो खत्म हो गयी. परिवार का पेट भरने के लिये मार्केट से ब्याज पर उधारी भी लेना पड़ा. जब बाजार खुली तो ग्राहक कोरोना के भय से व पाबंदियों के कारण पान दुकानों तक आना ही बन्द कर दिए. छोटी गुमटी एवं छोटी पूंजी के कारण अन्य कोई व्यवसाय वे कर नहीं सकते थे. पान दुकान के नाम बैंक या ब्याज पर ऋण देने वाले भी इन्हें ऋण देने से कतराने लगे है. अच्छी पान बनाने के मामले जो कभी चर्चित रहा करते थे अब अपनी दुकानों की बोर्ड तक हटा चुके हैं. पांच से बीस रुपये की पान लगा कर बेचने वाले अब चॉकलेट, बिस्किट व पानी की बोतल बेच कर फिर पुराने दिन लौटने की आस लगाए चल रहे हैं. [wpse_comments_template]

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