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सरायकेला : रथ यात्रा परंपरा : हेरा पंचमी पर होगा रथभांगिनी

Seraikela (Bhagy Sagar Singh) : जगन्नाथ धाम पुरी की तर्ज पर सरायकेला में आयोजित होने वाली परंपरागत रथ यात्रा के तहत मंगलवार को हेरा पंचमी पर रथभांगिनी परंपरा का आयोजन किया जाएगा. इसमें मंगलवार की देर शाम माता लक्ष्मी श्री मंदिर से आकर मौसी बाड़ी के मुख्य द्वार के समीप खड़ी महाप्रभु श्री जगन्नाथ के रथ को क्रोधित होकर तोड़ेंगी. इसके बाद मान मनौव्वल कर पुजारियों द्वारा माता लक्ष्मी को वापस श्री मंदिर ले जाया जाएगा. इसे रथभांगिनी परंपरा कहा जाता है. मंगलवार की शाम आयोजित होने वाली रथभांगिनी परंपरा को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है. इसे भी पढ़ें : रांची">https://lagatar.in/vanishing-kalpataru-trees-planted-in-ranchi-university-emphasis-on-conservation/">रांची

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जाने क्यों क्रोधित होती हैं माता लक्ष्मी

बढ़ते हुए कलयुग के प्रभाव के साथ एक ओर जहां परंपरागत रक्त बंधन के रिश्तों को निभाने में कमी आती जा रही है, वहीं कलयुग के जीवंत देव के रूप में पूजे जाने वाले महाप्रभु श्री जगन्नाथ रक्त बंधन के रिश्तों को रथयात्रा कर निभाने का संदेश देते हैं. पुजारी पंडित ब्रह्मानंद महापात्र बताते हैं कि नेत्र उत्सव के पश्चात भगवान जगन्नाथ पत्नी माता लक्ष्मी को बिना बताए अपनी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाने के लिए रथ यात्रा पर निकल पड़ते हैं. श्री मंदिर में उनकी तलाश करते हुए पंचमी तिथि को इसकी सूचना माता लक्ष्मी को होती है, तो माता लक्ष्मी महाप्रभु की तलाश के लिए श्री मंदिर से निकल जाती हैं. वे महाप्रभु को खोजते हुए मौसी बाड़ी के द्वार पर पहुंचती हैं. वहां महाप्रभु के रथ को खड़ा देखती हैं, परंतु बहू होने के धर्म के कारण मौसी बाड़ी ससुराल में बिना आमंत्रण प्रवेश नहीं कर पाती हैं. इसलिए क्रोधित अवस्था में मौसी बाड़ी के बाहर खड़े रथ को तोड़ डालती हैं. श्री मंदिर के माता लक्ष्मी विहीन हो जाने और माता लक्ष्मी के क्रोध को देखते हुए पुजारियों का दल विधिवत मंत्रोच्चार के बीच माता लक्ष्मी के मान मनौव्वल में जुट जाते हैं और काफी समय तक माता लक्ष्मी को मनाने के पश्चात उन्हें वापस श्री मंदिर लेकर आते हैं. [wpse_comments_template]

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