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सरायकेला : टेट पास पारा शिक्षकों का जुटान रांची में 28 को, शिक्षा मंत्री से लगाएंगे न्याय की गुहार

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Seraikela (Bhagya Sagar Singh) : टेट पास पारा शिक्षकों के सीधे समायोजन के मुद्दे पर सरकार की वादाखिलाफी का मामला अब गरमाने लगा है. आगामी रविवार को राज्य भर के टेट पास पारा शिक्षक सीधे समायोजन की मांग को लेकर राजधानी रांची स्थित पुराने विधानसभा मैदान में जुटेंगे. वहां से तिरंगे झंडे के साथ न्याय मार्च करते हुए शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के डोरंडा स्थित आवास पर पहुंच कर न्याय की गुहार लगाएंगे. इस कार्यक्रम में सरायकेला खरसावां जिले के सभी टेट पास पारा शिक्षक भी सम्मिलित होंगे. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-railway-sought-permission-from-the-administration-to-carry-track-blast-for-laying-third-rail-line/">जमशेदपुर

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हेमंत सरकार आदिवासी-मूलवासी युवाओं का भला नहीं चाहती - बादल सरदार

गुरुवार को इस संदर्भ में एक प्रेसवार्ता के दौरान संघ के जिलाध्यक्ष बादल सरदार ने कहा कि हमने न्याय मार्च के लिए पूरी तैयारी कर ली है. याचना का समय बीत चुका है, अब हक और अधिकार के लिए ऊंगली टेढ़ा करने का वक्त आ चुका है. महाधिवक्ता राज्य सरकार के विधिक सलाहकार होते है, जब उन्होंने स्पष्ट लिखित राय दी थी कि टेट पास पारा शिक्षकों को वेतनमान देते हुए समायोजित किया जा सकता है. ऐसे में उनकी राय को दरकिनार कर हमें वेतनमान और समायोजन से वंचित रखना यह दर्शाता है कि हेमंत सरकार यहां के आदिवासी और मूलवासी युवाओं का भला नहीं चाहती है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-kus-bba-and-bca-semester-three-students-promoted-the-examination-board-stamped/">चाईबासा

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बाध्य होकर विद्रोह का फैसला लिया

उन्होंने कहा कि ऐसा भी नहीं है कि हम नौकरी खैरात में मांग रहे हैं. हम एनसीटीई और एनइपी के सभी मानकों को पूर्ण करते हुए सरकारी शिक्षक बनने की दावेदारी रखते हैं. साथ ही हमें महाधिवक्ता का एनओसी भी हासिल है. हमने एक हद तक राज्य सरकार से विनती कर अपना हक मांगा. सरकार बहरी होकर हमारी मांग को अनसुनी करती आई है. इसलिए हमने बाध्य होकर अब विद्रोह का फैसला लिया है. अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हम रविवार को तिरंगे झंडे के साथ राजधानी में शांतिपूर्ण ढंग से न्याय मार्च करेंगे. इसके बाद भी अगर सरकार नहीं सुनती है तो सरकार को भी पारा शिक्षकों के तीव्र आंदोलन का रूप देखना पड़ेगा. [wpse_comments_template]
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