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सरायकेला : बालू के विकल्प के तौर पर निर्माण कार्य में होने लगा पत्थरों के डस्ट का उपयोग

Seraikela (Bhagya sagar singh) : नदी से प्राप्त होने वाली प्राकृतिक संपदा बालू की कमी को लेकर जिले में हाहाकार की स्थिति बनी हुई है. अनेक तरह के छोटे एवं बड़े निर्माण कार्य बंद पड़े हैं तो कुछ कालाबाजार से बालू खरीद कर अपना निजी कार्य करा रहे हैं. वहीं, इसी मध्य क्षेत्र के जुगाड़ू राजमिस्त्रियों ने पत्थर क्रशर मशीनों से निकलने वाले डस्ट का उपयोग बालू के विकल्प के तौर पर करना शुरू कर दिया है. पत्थर एवं ईंट की जोड़ाई में सीमेंट के साथ इसी के घोल का उपयोग किया जा रहा है. इसी तरह ईमारत, चारदीवारी एवं नालियां बनाते समय भी नींव में बालू के स्थान पर डस्ट डाल कर ईंट का सोलिंग किया जाने लगा है. [caption id="attachment_380875" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/stone-dust-1-600x570.jpg"

alt="" width="600" height="570" /> सोलिंग कार्य में डस्ट का उपयोग करते राजमिस्त्री.[/caption] इसे भी पढ़ें : गालूडीह">https://lagatar.in/galudih-deep-boring-done-from-mla-fund-in-darisai/">गालूडीह

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निर्माण कार्यों में पत्थर डस्ट डालने से नहीं आती है किसी तरह की कमजोरी 

निर्माण कार्य करने वाले राजमिस्त्रियों के अनुसार निर्माण कार्यों में पत्थर डस्ट को बालू के स्थान पर उपयोग करने से किसी तरह की कमजोरी नहीं आती है. लेकिन डस्ट की गुणवत्ता सही रहनी चाहिए. पत्थरों के महीन चूर्ण के साथ बहुत अधिक मात्रा में धूल नहीं होनी चाहिए. इसकी कीमत भी लगभग लोकल में सौ सीएफटी के दो हजार रुपये पड़ते हैं, जो कि सामान्य दिनों में बालू की भी लोकल कीमत के बराबर ही है. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-food-competition-organized-among-women-in-sawan-milan-ceremony/">आदित्यपुर

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क्या कहते है पत्थर क्रशर मशीनों के संचालक

इस संबंध में पत्थर क्रशर मशीन के कुछ संचालकों का कहना है कि बालू की जगह पत्थर डस्ट का उपयोग होने से पत्थर डस्ट की बिक्री इन दिनों कुछ बढ़ गई है. पहले केवल ईमारत बनाते समय खाली जगहों को भरने के लिए इसके खरीदार आते थे. बताया गया कि पत्थरों को चूर कर प्राकृतिक बालू बनाने के लिये विशेष मशीनों का उपयोग किया जाता है. दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में इस प्रकार के मशीन से निकले पत्थरों के चूरे का ही निर्माण कार्यों में उपयोग किया जाता है. वहां एनजीटी द्वारा स्थायी रूप से बालू उत्खनन पर रोक लगाया गया है. लेकिन इस क्षेत्र में ऐसा मशीन स्थापित करना व्यवसायिक दृष्टिकोण से जोखिम भरा लगता है. पुनः बालू उठाव नदियों से प्रारंभ हो जाने पर इसके ग्राहक नहीं मिलेंगे. हमारे यहां खनन नीति भी स्पष्ट नहीं बल्कि भ्रामक है. इसे भी पढ़ें : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-in-the-sawan-festival-women-tied-the-knot-with-the-presentation-of-dance/">किरीबुरु

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सूखे से प्रभावित खरकई नदी में इस वर्ष रहेगी बालू की किल्लत

[caption id="attachment_380877" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/kharkai-nadi.jpg"

alt="" width="600" height="255" /> सुखी खरकई नदी.[/caption] वहीं, स्थानीय जानकारों की मानें तो प्रतिवर्ष जुलाई से सितंबर तक खरकई नदी पानी से लबालब भरी रहती है. इस बीच कई बार नदी में बाढ़ भी आते रहते हैं. लेकिन इस वर्ष अगस्त माह तक भी खरकई नदी एक बार भी पानी से नहीं भरी. उफनती नदी एवं तेज बहाव के कारण ही बालू एकत्रित होते हैं. ऐसे में एनजीटी द्वारा प्रतिबंधित तिथि के बाद भी अब नदी में बालू की उपलब्धता नहीं रहेगी. सरायकेला जिला मुख्यालय के आसपास खरकई नदी के मांगुडीह, हुडंगदा, जोरडीहा, तीतिरबिला, आखडासाल, कुदरसाही के बालू घाटों पर बालू समाप्त हो चुके हैं. कुछ वर्षों से वैध एवं अवैध तरीके से उक्त स्थानों से बालू निकाल लिये गए हैं. प्रतिवर्ष नदी के बहाव में बह कर आए बालुओं को ही अब निकाला जाता है. लेकिन इस वर्ष वो बालू भी सूखाड़ की स्थिति होने के कारण नहीं मिलेगा. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-municipal-corporation-started-survey-for-solid-waste-user-fee-and-trade-license/">आदित्यपुर

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