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मकर त्योहार के दो-चार दिनों पूर्व होती है मजदूरों की घर वापसी
मजदूरों की घर वापसी मकर त्योहार के दो-चार दिनों पूर्व होती है. ऐसे में कुछ कमाई करके आते हैं तो कोई दुर्घटना या किसी बीमारी का शिकार होकर या प्रताड़ित होकर लौटते हैं. मजदूरों को एकत्रित कर ले जाने तक जो आत्मीयता इन्हें ले जाने वाले एजेंट रखते हैं, उन्हें ले जाने के बाद वो आत्मीयता समाप्त हो जाती है. अपना कमीशन लेकर वे अपने मोबाइल का सिम कार्ड ही बदल डालते हैं. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-now-the-needle-of-polices-suspicion-in-ranjit-singhs-murder-is-towards-chhabbe-and-raja/">जमशेदपुर: रंजीत सिंह हत्याकांड में अब पुलिस की शक की सूई छब्बे और राजा की ओर
स्थानीय प्रशासन पलायन करने वाले मजदूरों के बारे में रहते हैं अनजान
वहीं, बाहर रोजगार के लिए गए श्रमिकों पर अगर कोई दुर्घटना, बीमारी या संकट आती है तो वे संकट उन्हें स्वयं झेलने पड़ते हैं. विदित हो कि मजदूरों से संबंधित जानकारी कि वे कहां जा रहे हैं, क्या मजदूरी मिलेगी, रहने-खाने, बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में उन्हें नियोक्ता से क्या सहयोग मिलेगा, इसकी खबर किसी को नही रहती है. यहां तक की ग्राम प्रधान, मुखिया एवं स्थानीय प्रशासन भी पलायन करने वाले मजदूरों के बारे में अनजान रहती है. इसे भी पढ़ें : बहरागोड़ा">https://lagatar.in/baharagora-a-dilapidated-culvert-on-chanderpur-nh-49-can-cause-a-major-accident/">बहरागोड़ा: बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है चंदरपुर-एनएच-49 पर जर्जर पुलिया [wpse_comments_template]

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