- एनटीपीसी की चट्टी बरियातू परियोजना के पास है बिरहोर बस्ती
- दो बिरहोरों की हो चुकी है मौत
- बिरहोरों को दूसरी जगह बसाने तक कोयला खनन करना ठीक नहीं
- प्रदूषण से बिरहोरों के रहन-सहन और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है बुरा असर.
शुभम संदेश की रिपोर्ट पर प्रशासन की जांच रिपोर्ट ने मुहर लगायी
शुभम संदेश और लगातार">https://lagatar.in/">लगातारडॉट इन ने हजारीबाग में एनटीपीसी की चट्टी बरियातू कोल परियोजना में खनन के कारण होने वाले प्रदूषण से दो बिरहोरों की मौत का मुद्दा लगातार उठाया था. इस पर कई रिपोर्ट भी प्रकाशित की. आज उन रिपोर्ट्स में उठाये गये सवालों की पुष्टि जांच रिपोर्ट से हुई है. शुभम संदेश में प्रकाशित रिपोर्ट को आधार बनाते हुए एक्टिविस्ट मंटू सोनी की शिकायत पर राष्ट्रपति भवन ने संज्ञान लेते हुए कोयला मंत्रालय के सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था. केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय ने झारखंड के मुख्य सचिव और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हजारीबाग डीसी को पत्र लिखकर आठ सप्ताह में कार्रवाई करने को कहा था. सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ कुमार की शिकायत पर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने भी मामला दर्ज किया है.
जांच रिपोर्ट में खनन कार्य बंद कराने की अनुशंसा
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एनटीपीसी की माइंस डेवलपर और ऑपरेटर ऋत्विक एएमआर कंपनी है. कंपनी द्वारा ही खनन कार्य किया जा रहा है. इससे होने वाले प्रदूषण का प्रतिकूल असर आदिम जनजाति के बिरहोर जनजातियों के रहन-सहन और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. इसलिए जब तक बिरहोर बस्ती के परिवारों को पगार बिरहोर टोला से दूसरी जगह नहीं बसा दिया जाता है, तब तक माइनिंग का काम कराना ठीक नहीं है.कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस जगह पर खनन कार्य किया जा रहा है, वह बिरहोर टोला, पगार से सटा हुआ है. इस क्षेत्र में खनन व परिवहन होने के कारण हवा में धूल भरा रहता है. वहां प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है. बिरहोर टोला के निवासियों के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ रहा है. प्रदूषण के कारण स्वास एवं अन्य बीमारियों की आशंका बनी हुई है. माइनिंग के लिए होने वाले विस्फोट से कभी भी बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है.बिरहोरों को दी जा रही सुविधाएं पर्याप्त नहीं
जांच रिपोर्ट में एनटीपीसी द्वारा बिरहोरों को दी जा रही सुविधाओं को पर्याप्त नहीं माना गया है. एनटीपीसी द्वारा बिरहोर टोला में दोपहर का भोजन दिया जा रहा है. धूल से बचाव के लिए घेराबंदी के साथ पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है, लेकिन खनन क्षेत्र होने के कारण यह सुविधा पर्याप्त नहीं है. सभी बिरहोर परिवारों को ढ़ेंगा बस्ती में एनटीपीसी द्वारा बनाये गये आवासों में शिफ्ट कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन बिरहोर लोग इसके लिए तैयार नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, बिरहोर परिवार पास के जंगल में जाना चाहते हैं, लेकिन नोटिफायड वनभूमि (वनाधिकार अधिनियम 2006) होने के कारण वन विभाग के एफआरए के तहत भूमि देने की प्रक्रिया जारी है.बिरहोर टोला की स्थिति
- परिवार की संख्या : 30
- कुल जनसंख्या : 115
- पुरुष की संख्या : 53
- महिला की संख्या : 62
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