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रिम्स टेंडर प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल, तीन एजेंसियों के चयन पर आरोप

Ranchi: रिम्स में पूर्ण स्वच्छता, हाउसकीपिंग, नगर कचरा प्रबंधन और बायोमेडिकल वेस्ट हैंडलिंग से जुड़े टेंडर को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. लखनऊ की सन फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने रिम्स प्रबंधन को पत्र भेजकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं
 

Ranchi: रिम्स में पूर्ण स्वच्छता, हाउसकीपिंग, नगर कचरा प्रबंधन और बायोमेडिकल वेस्ट हैंडलिंग से जुड़े टेंडर को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. लखनऊ की सन फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने रिम्स प्रबंधन को पत्र भेजकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और तकनीकी मूल्यांकन की दोबारा जांच की मांग की है.

 

पत्र के अनुसार, टेंडर संख्या 4586 दिनांक 09.10.2025 के तहत कुल 14 एजेंसियों ने भाग लिया था. तकनीकी बिड 6 नवंबर 2025 को खोली गई और 30 दिसंबर 2025 को परिणाम जारी किया गया, जिसमें केवल तीन एजेंसियों को तकनीकी रूप से योग्य घोषित किया गया.

 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि एनआईटी की शर्तों के अनुसार, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में संबंधित कार्य का न्यूनतम 10 करोड़ रुपये का औसत वार्षिक टर्नओवर अनिवार्य था, जबकि चयनित एजेंसियों ने कुल टर्नओवर का प्रमाण दिया, जो हाउसकीपिंग, सेनेटेशन और बायोमेडिकल वेस्ट जैसे विशिष्ट कार्यों के लिए मान्य नहीं है.

 

इसके अलावा एनआईटी में कम से कम तीन वर्षों का अस्पताल अनुभव और 500 बेड वाले अस्पताल में कार्य का अनुभव अनिवार्य था. आरोप है कि चयनित एजेंसियां इस शर्त को भी पूरा नहीं करती और आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए गए.

 

पत्र में यह भी कहा गया है कि एक एजेंसी द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्र संदिग्ध है. प्रमाणपत्र पर जिस जिलाधिकारी के हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं, उस अवधि में वह अधिकारी पदस्थ नहीं थे, जिससे प्रमाणपत्र की सत्यता पर सवाल खड़े हो गए हैं.

 

एमएसएमई छूट को लेकर भी आपत्ति जताई गई है. आरोप है कि उत्तर प्रदेश की एमएसएमई पंजीकृत एजेंसियों को ईएमडी में छूट दी गई, जबकि झारखंड प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के अनुसार यह सुविधा केवल झारखंड में पंजीकृत इकाइयों को ही मिलनी चाहिए.

 

इसके साथ ही एनआईटी में अनिवार्य लेबर लाइसेंस और केमिकल स्टोरेज लाइसेंस जमा करने की शर्त होने के बावजूद चयनित एजेंसियों द्वारा ये दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, फिर भी उन्हें तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर दिया गया.

 

शिकायतकर्ता एजेंसी ने रिम्स प्रबंधन से पूरे टेंडर प्रक्रिया की पुनः समीक्षा, सभी दस्तावेजों की जांच और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है. पत्र में यह भी कहा गया है कि मौजूदा प्रक्रिया से रिम्स जैसी प्रतिष्ठित संस्था की छवि को नुकसान पहुंच रहा है.

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