Ranchi : झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सहायक अभियंता सुशील कुमार को सरकारी सेवा में पुनर्बहाल करने की अधिसूचना जारी कर दी है. इसके साथ ही वर्ष 2019 में उन्हें सेवा से बर्खास्त करने के सरकारी आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है.
सुशील कुमार लोहरदगा में ग्रामीण कार्य विभाग के कार्य प्रमंडल में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत थे. उन पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत वित्तीय अनियमितता और संवेदक के साथ मिलीभगत कर मापी पुस्तिका में गलत प्रविष्टियां करने का आरोप लगाया गया था.
आरोप था कि इससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ. इन आरोपों के बाद उन्हें दिसंबर 2015 में निलंबित कर दिया गया था और 8 मार्च 2019 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ सुशील कुमार ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने 10 जुलाई 2024 को अपने आदेश में कहा कि बर्खास्तगी का निर्णय पर्याप्त साक्ष्यों पर आधारित नहीं था. न्यायालय ने यह भी माना कि विभागीय जांच के दौरान पर्याप्त मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए और संबंधित दस्तावेजों के लेखक की भी जांच नहीं की गई.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने सुशील कुमार को 8 मार्च 2019 से सहायक अभियंता के पद पर पुनर्बहाल मानने का निर्णय लिया है. उनकी बर्खास्तगी से संबंधित विभागीय आदेश भी रद्द कर दिया गया है.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सेवा समाप्ति की तिथि से लेकर 31 मई 2019 को सेवानिवृत्ति की तिथि तक की अवधि को पेंशन लाभों के लिए सेवा अवधि माना जाएगा. हालांकि, यह बहाली राज्य सरकार की ओर से दायर अपील एलपीए संख्या 452/2025 के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी. विभाग ने सुशील कुमार की न्यायिक हिरासत और निलंबन अवधि के समायोजन को लेकर भी आवश्यक निर्देश जारी किए हैं.
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