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कई फिल्में बनने के बाद भी समाज में आज भी बहिष्कृत हैं सेक्स वर्कर्स

Shruti Prakash Singh Ranchi : किसी भी शहर में रेड लाइट एरिया का होना अब बड़ी बात नहीं है. लोग बेबाकी से उन इलाकों में जाते हैं. एक दौर में लोग कोठों पर छुप-छुपा कर जाया करते थे. उस दौर में देह व्यापार को हेय की दृष्टी से देखा जाता था. लेकिन ये भी सच है कि ये सबसे पुराना व्यापार है. देह व्यापार में भी पर्दे के पीछे का खेल बड़ा ही दुखदायी होता है. देह व्यापार में लगे सेक्स वर्कर्स की जिंदगी किसी पहेली से कम नहीं होती है. उनकी कहानियां इतनी दुखभरी होती हैं कि सुनकर किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाए. ऊपर से सेक्स वर्कर्स अक्सर यौन हिंसा के भी शिकार होते हैं. जिसे वो किसी से बयां भी नहीं कर पाते, समाज में छुपकर गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर ऐसे ही कुछ सेक्स वर्कर्स रांची में भी हैं. उनसे लगातार">https://lagatar.in/">लगातार

संवाददाता ने बात की. नाम न बताने और फोटो नहीं छापने लगाने की शर्त पे निजी जिंदगी के बारे में बताया, जो दुखभरी है. रांची का अति व्यस्ततम इलाका माने जाने वाले जगह पर हर दिन सेक्स वर्करों का जमावड़ा होता है. इसे भी पढ़ें - BIG">https://lagatar.in/big-breaking-ias-pooja-singhals-father-in-law-arrested-ed-arrested-from-madhubani-residence/">BIG

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समाज नहीं जान पायेगा न ही समझ पायेगा

सेक्स वर्कर्स से बात पर पता चला कि ये काम वे मजबूरी में कर रही हैं. उनका कहना है कि ऐसा करने के पीछे ऐसी मजबूरी है, जिसे समाज नहीं समझ पाएगा. उनका कहा है कि एक सिक्के के दो पहलु होते हैं, उसी तरह से उनका देह व्यापार भी है. समाज इसे गलत समझता है, लेकिन सेक्स वर्कर्स के लिए वो उनका काम है. उससे ही उनका घर चलता है. बात करने से ये भी पता चला कि कुछ सेक्स वर्कर्स तो बच्चों को इसी कमाई से शिक्षित कर रही हैं. ताकि वे ऐसी मजबूरी में ना पड़ें. सेक्स वर्कर ने बताया कि हर दिन 500 से 1000 रूपये तक की कमाई हो जाती है. इसी से घर परिवार का भरण पोषण होता है.

छिपकर क्यों करना पड़ता है काम

जगह का नाम नहीं छापने की शर्त पर सेक्स वर्कर ने बताया कि पहचान छिपाकर सड़क पर ग्राहक का इंतजार करना पड़ता है. आज अगर रांची में वो छिपकर कर काम कर रही हैं, तो कोलकाता और मुंबई की सेक्स वर्कर्स पर मूवी क्यों बन रहे हैं. कहा कि अगर सरकार हमारी मदद नहीं कर करना चाहती, तो फिर ऐसे मूवीज को लोगों के सामने क्यों लाया जाता है. हम तो बस समाज में थोड़ी इज्जत और रहने का एक आशियाना सरकार से चाहते हैं. पर मिलता कहां है. सेक्स वर्कर्स का कहना है कि कोरोना काल में पूरे दो साल उनकी हालत क्या था, सरकार ने नहीं पूछा. उस दौर में जिंदगी कैसे गुजरी कोई देखेने नहीं आया. कहा कि अपने मन से कोई इस काम से नहीं जुड़ता और अगर जुड़ गए तो उसकी इज्जत होनी चाहिए.

सेक्स वर्कर पर बनी फिल्म को मिल चुका है ऑस्कर अवॉर्ड

यहां बता दें कि सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में कई ऐसे रेड लाइट एरिया हैं, जहां आज भी सेक्स वर्कर्स अपना सर उठा के रह रहे हैं. कोलकाता के सोनागाछी की ही बात करें तो इसे एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया कहा जाता है. यहां करीब 11000 सेक्स वर्कर्स काम करती हैं. यहां सैकड़ों बहुमंजिले इमारते हैं. कई बॉलीवुड मूवी भी यहां बनायी गई हैं. सोनागाछी रेड लाइट एरिया पर बनायी गयी डॉक्युमेंट्री Born into Brothels को ऑस्कर अवॉर्ड भी मिल चुका है. कमाठीपुरा मुंबई की अगर बात करें तो वो एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया है. करीब 25 साल पहले यहां 50000 सेक्स वर्कर्स काम किया करती थी. लेकिन बाद में इनकी संख्या काम हो गई. जगह की कमी और रहने की दिक्कत की वजह से बहुत से वर्कर्स वहां से चले गए. रिपोर्ट के अनुसार, 2005 में डांस बार पर बैन लगने से बहुत सी लड़कियों को रोजगार छिन गया और वे सेक्स वर्कर का काम करने लगी. हाल में ही संजय लीला भंसाली की एक मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था. जिसका नाम गंगूबाई था, जिसमें आलिया भट्ट ने एक सेक्स वर्कर का किरदार निभाया था. लोगों ने इस मूवी को बहुत सराहा था, बॉलीवुड ने ऐसे अनेक मूवी इंडस्ट्री को दिए, तब भी हमारे समाज में सेक्स वर्कर्स वो इज्जत नहीं मिल पायी जो मिलनी चाहिए थी. इसे भी पढ़ें - बाबूलाल">https://lagatar.in/babulal-defection-case-hearing-on-two-petitions-in-speakers-court-babulals-lawyer-said-cancel-the-petition/">बाबूलाल

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