Ranchi: सिंहभूम झारखंड का इकलौता लोकसभा सीट है, जहां भाजपा ने 2024 का चुनावी बिगुल फूंक दिया है. 2019 में खोई इस सीट को वापस पाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व अपनी रणनीति पर काम कर रही है. इसी के तहत 7 जनवरी को चाईबासा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सिंहभूम लोकसभा और विधानसभा कोर कमेटी की बैठक में नेताओं की नब्ज टटोली. बैठक में 100 से ज्यादा नेता मौजूद थे, लेकिन संगठन को मजबूत करने और सिंहभूम सीट को जीतने के प्लान से जुड़े शाह के अधिकांश सवालों के जवाब वहां मौजूद स्थानीय नेता नहीं दे पाये. सरायकेला विधानसभा के संयोजक मनोज चौधरी ने अपने जवाब से अमित शाह के सामने दूसरे नेताओं की लाज बचाई. शाह ने इस बैठक में सिंहभूम के नेताओं की हैसियत भी माप ली. उम्मीद है जल्द ही सिंहभूम में संगठन में बड़ा बदलाव हो सकता है. बैठक में प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश समेत प्रदेश कोर कमेटी के कई सदस्य मौजूद थे. उनके सामने ही जिले की टीम की पोल खुल गई. इससे प्रदेश अध्यक्ष समेत अन्य नेताओं को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा. इसे पढ़ें- हजारीबाग:">https://lagatar.in/hazaribagh-more-than-1-crore-recovered-on-traffic-violation-22000-challans-cut/">हजारीबाग:
ट्रैफिक उल्लंघन पर 1 करोड़ से ज्यादा की वसूली, 22000 चालान कटे
ओड़िशा जाकर राजनीति करें, पारसनाथ में आदिवासी व जैनी सदियों से मिलजुलकर पूजा करते आए हैं : मंत्री जगरनाथ महतो
ट्रैफिक उल्लंघन पर 1 करोड़ से ज्यादा की वसूली, 22000 चालान कटे
हर बूथ का होगा व्हाट्सएप ग्रुप, आदिवासी संगठन और एनजीओ पर भी नजर
लोकसभा कोर कमेटी की बैठक में शाह ने साफ कहा कि नेताओं और कार्यकर्ता का सिर्फ एक ही एजेंडा इस सीट पर चुनाव जीतने का होना चाहिए. संगठन को मजबूत करने के लिए सबको फिल्ड में उतरना ही होगा. पार्टी की ओर से दिये गये सभी टास्क को पूरा करना होगा. इसके तहत पार्टी की ओर से हर बूथ का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए और उसमें कम से कम 200 लोग जोड़े जाएं, ताकी कोई भी संदेश एक बार में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे. इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी नेताओं की एक्टिवटी बढ़ाने का निर्देश दिया गया. सिंहभूम इलाके में कई आदिवासी संगठन और एनजीओ एक्टिव हैं. शाह ने निर्देश दिया कि इन सभी संगठनों से जुड़े लोगों के बीच पहुंचे और उनके बीच भाजपा की उपलब्धियों, योजनाओं और एजेंडे को मजबूती के साथ रखें.हेमंत सरकार के विवादित फैसलों पर फोकस
अमित शाह ने निर्देश दिया कि कार्यकर्ता हेमंत सरकार की उन नीतियों और फैसलों पर ज्यादा फोकस करें जो विवादों के घेरे में हैं. इनमें 1932 का खतियान आधारित स्थानीय नीति, हाईकोर्ट से रद्द हुई नियोजन नीति जैसे कई मुद्दे हैं. जनता के बीच जाकर बताएं कि सिंहभूम में 1964 में बंदोबस्ती हुई, ऐसे में 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति यहां के साथ बड़ा मजाक है. सिंहभूम खनन क्षेत्र में आता है. इसलिए शाह ने वहां डीएमएफटी फंड के मुद्दे को भुनाने का निर्देश नेताओं को दिया. जनता को यह बताने को कहा कि कैसे खनन के फंड का दुरुपयोग हो रहा है, और डीएमएफटी के पैसे से विस्थापितों के विकास के बजाए मनमाने तरीके से दूसरी योजनाओं काम हो रहा है. इसे भी पढ़ें- सालखन">https://lagatar.in/salkhan-should-go-to-odisha-and-do-politics-tribals-and-jains-have-been-worshiping-together-in-parasnath-for-centuries-minister-jagarnath-mahato/">सालखनओड़िशा जाकर राजनीति करें, पारसनाथ में आदिवासी व जैनी सदियों से मिलजुलकर पूजा करते आए हैं : मंत्री जगरनाथ महतो
Leave a Comment