दरअसल, सीबीएसई की 12वीं की रिजल्ट में गड़बड़ियां सामने आने के बाद बहुत सारे प्रिंसिपल ऐसे ही वीडियो जारी कर रहे हैं. जिसमें ओएसएम को क्रांतिकारी बताया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया गया है कि यह सब वह केंद्र सरकार और सीबीएसई के कहने पर कर रहे हैं. संभव है दबाव में कर रहे हों. यानी प्रिंसिपल अब सीबीएसई का तोता बन गये हैं.
सरकार यह सब कर, कराके यह साबित करना चाह रही है कि उसके सिस्टम की कोई गड़बड़ी नहीं है. जिन चार लाख बच्चों ने अपने रिजल्ट पर आपत्ति जतायी है, उत्तर पुस्तिका की मांग की है, वह जो मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं, वह सब मामूली बात है. बच्चों व उनके अभिभावकों को यह समझाया जा रहा है कि कोई भी नया सिस्टम आता है तो शुरु शुरु में कुछ गलतियां हो जाती हैं.
सवाल यह उठता है कि क्या हम अब इस हालात में पहुंच गये हैं कि 12वीं की परीक्षा देने वाले 22 लाख में से चार लाख बच्चों का रिजल्ट खराब होने की घटना को "गलतियां हो जाती हैं" कह कर जिम्मेदारी से मुक्त हो जायें. अगली बार देखा जायेगा. शिक्षा का हमारा सिस्टम इतना खराब हो गया है कि अब किसी को फर्क ही नहीं पड़ता. अगर ऐसा है तो अब यह मान करके चलिये कि आपके बच्चों को अशिक्षित रखने, टैलेंट को खत्म करने की शुरुआत जो सरकारी स्कूलों से शुरु हुई थी, अब निजी स्कूलों तक पहुंच चुकी है.
हम उस हालात में पहुंच चुकें हैं कि सवाल उठाने वालों को पाकिस्तानी बताकर सबको चुप करा दिया जाता है और इससे बहुत सारे लोग खुश हो जाते हैं.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.
Leave a Comment