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शंखनाद… अब आंदोलन

  • झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन ‘संवर्धन और सुविधा’ विधेयक 2022 का विरोध जारी
  • झारखंड चैंबर के साथ रांची में राज्यभर के व्यवसायियों ने कृषि विधेयक पर मंथन किया, कहा-14 तक निर्णय ले सरकार
Ranchi: झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा ) विधेयक 2022 का विरोध जारी है. बुधवार को झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स की बैठक में आंदोलन का शंखनाद हो गया. कृषि शुल्क विधेयक के खिलाफ राज्यभर के व्यवसायियों ने रांची में झारखंड चैंबर के साथ विचार-विमर्श किया. इसमें राज्य सरकार को 14 फरवरी तक विधेयक को वापस लेने की मोहलत दी गई. अगर सरकार ने इस पर निर्णय नहीं लिया, तो 15 फरवरी से खाद्यान्न की आवाजाही पर रोक लगा दी जाएगी और व्यवसायी बड़े आंदोलन की ओर रुख अख्तियार करेंगे. इस बिल से राज्यभर के खाद्यान्न व्यापारियों, कृषकों एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों में रोष है. व्यापारी काला बिल्ला लगाकर बिल का विरोध कर रहे हैं. कृषि शुल्क विधेयक को व्यवसायियों ने काला कानून बताते हुए राज्य सरकार से वापस लेने की मांग की है. उनका कहना है कि जब यह बिल आम लोगों की जेब पर बोझा डालेगा यानी चीजें मंहगी होगी तो इसे पास कर लागू करने के लिए सरकार तत्परता क्यों दिखा रही है. सरकार को जन हित में कार्य करना चाहिए. पहले भी सरकार ने इसे लागू नहीं करने का आश्वासन दिया था.फिर सरकार इस बिल को लेकर इतनी उतावली क्यों है. व्यापारियों का कहना है कि सरकार को हर हाल में इस बिल को वापस लेना होगा. अगर सरकार नहीं मानी तो विरोध जारी रहेगा. शुभम संदेश की टीम ने विभिन्न जिलों से इससे जुड़ी प्रतिक्रिया ली है. पेश है रिपोर्ट.

कृषि शुल्क के विरोध में व्यवसायी सड़क पर उतरने को हैं तैयार

धनबाद के व्यवसायी नया कृषि बिल के खिलाफ मोर्चाबंदी में जुटे हुए हैं. कोई इसे काला कानून बता रहा है तो कुछ व्यवसायी राज्य छोड़ कर पलायन के मूड में हैं. हालांकि व्यवसायियों ने आंदोलन भी शुरू कर दिया है. इस आंदोलन को जारी रखने की रणनीति भी बन रही है. व्यवसायियों का कहना है कि सरकार बातचीत कर अगर बिल को वापस नहीं लेती है तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी. [caption id="attachment_549587" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/भरत-कुमार-रूंगटा-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> भरत कुमार रूंगटा[/caption]

यह कानून किसानों के हित के खिलाफ 

पूर्वी सिंहभूम के भरत कुमार रूंगटा का कहना है कि यह काला कानून है. यह कानून किसानों के हित के खिलाफ है. यह बिल क्रेता और विक्रेता दोनों की हितों के खिलाफ है. हमारे पडोसी राज्य बंगाल छत्तीसगढ़ ओडिशा में कृषि पर ऐसा टैक्स नहीं है, अगर सरकार झारखंड में टैक्स लगाएगी तो यहां का सारा व्यापार पड़ोस के राज्यों में चला जाएगा. जिससे यहां के कृषि व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. इस बिल के माध्यम से अफसरशाही भी बहुत बढ़ेगी. सरकार को इस दिशा में पुनर्विचार करने की जरुरत है. पहले भी सरकार इसे लागू नहीं करने का आश्वासन दिया था. [caption id="attachment_549593" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/विजय-कुमार-गुप्ता-बोकारो-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> विजय कुमार[/caption]

सरकार व्यापारियों का शोषण करना चाह रही है  

बोकारो के विजय कुमार गुप्ता ने कहा कि यह विधायक सरासर गलत है. सरकार इस विधेयक के माध्यम से व्यापारियों का शोषण करना चाह रही है. बगल के राज्य बंगाल उड़ीसा छत्तीसगढ़ वहां किसी भी तरह के कृषि टैक्स नहीं है, अगर झारखंड सरकार यहां 2% टैक्स लगाती है तो यहां के व्यापारियों को बहुत नुकसान झेलना पड़ेगा. खनिज संपदा से भरे झारखंड में अगर सरकार चाहे तो उन संपदा से पैसे कमा कर कृषि में लगा सकती है.इसके उलट सरकार कृषि पर ही 2% टैक्स लगाने का काम करने जा रही है जो गलत है. सरकार को व्यापारी वर्ग के इस विरोध पर ध्यान देना चाहिए. [caption id="attachment_549578" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/आलोक-कुमार-रामगढ़-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> आलोक कुमार[/caption]

व्यापारियों को नुकसान का सामना करना पड़ेगा  

रामगढ़ के आलोक कुमार गुप्ता ने कहा कि यह कानून वापस लिया जाए. 2 % कृषि टैक्स एक्स्ट्रा लगाया जा रहा है. जोस कि किसी भी पड़ोसी राज्य में नहीं है. इस तरह के टैक्स से झारखंड में कृषि व्यापार में काफी दिक्कतें आएंगी. व्यापारियों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ेगा. इस टैक्स के कारण झारखंड का कृषि व्यापार में भारी गिरावट आ सकती है. यह टेक्स के कारण उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को ही नुकसान होगा. हम लोग इन दोनों के बीच की कड़ी है, अगर हम पर ही इस तरह के टैक्स लगाए जाएंगे तो हमें जनता को सेवा देने में बहुत दिक्कत आएगी. [caption id="attachment_549576" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/4-योगेश-परवाल-जमशेदपुर-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> योगेश परवाल[/caption]

सरकार जनता को ठगने का काम कर रही है 

जमेशदपूर के योगेश परवाल ने कहा कि इस विधायक को जल्द से जल्द वापस लिया जाए. इस विधेयक के माध्यम से अफसरशाही बढ़ेगी. सरकार जनता को ठगने का काम कर रही है. झारखंड में जितनी भी बाजार समितियां है. उसकी दयनीय स्थिति है, सरकार को उस पर ध्यान देने चाहिए लेकिन सरकार इसके उलट कृषि विधेयक लाकर हम पर और बोझ बढ़ा रही हैं. पुराने पैसे जो एफडीआर के रूप में रखे हुए हैं सरकार उसका कोई इस्तेमाल नहीं करती और सरकार ऊपर से हम पर एक टैक्स लगा रही है. इसका कोई तुक नहीं बनता सरकार पहले जो एफडीआर में जमा पैसे हैं उसका इस्तमाल करे. [caption id="attachment_549592" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/राजेश-जैन-देवघर-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> राजेश जैन[/caption]

यह विधेयक काला कानून है मंशा समझ से परे 

देवघर के राजेश जैन ने कहा है कि यह विधायक काला कानून है. हम लोग सरकार को जीएसटी देते हैं .पर अगर सरकार दो पर्सेंट टैक्स लगाती है तो वह गलत है. हमारे पड़ोसी राज्य बिहार बंगाल वहां किसी भी तरह का कृषि टैक्स नहीं है और अब झारखंड में 2 पर्सेंट टैक्स लगेंगे. इस तरह से यहां का जो बचा हुआ व्यापार है वह बगल के राज्यों में शिफ्ट हो जाएगा. अगर इस तरह चलता रहा तो हम लोग माल बेच नहीं पाएंगे और सब लोग बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे. सरकार हमें फैक्ट्री लगाने को बोलती हैं और ऊपर से टैक्स में वृद्धि करती है तो सरकार की मंशा हमें समझ नहीं आती. [caption id="attachment_549585" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/नितेश-गुप्ता-लोहरदगा-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> नितेश गुप्ता[/caption]

बिल की वजह से खाद्य उत्पादों में सीधा असर पड़ेगा  

लोहरदगा के नितेश गुप्ता ने कहा है कि यह विधायक व्यापारियों के लिए बर्बादी लेकर आया है. दो परसेंट टैक्स बढ़ाया गया है इसका असर व्यापारियों पर पड़ेगा. जिसका सीधा असर किसानों के ऊपर भी जाएगा. सरकार तानाशाही जैसा रवैया दिखा कर यह बिल लेकर आयी है. बिल के वजह से खाद्य उत्पादों में सीधा असर पड़ेगा. जिससे राज्य किसानों की आमदनी पर भी असर पड़ने वाला है. सरकार इस विधेयक को जल्द वापस ले. इस विधायक के माध्यम से अफसरशाही भी बढ़ेगी. हम लोग पहले ही जीएसटी के चक्कर में बहुत सारे कागज के चक्कर में फंसे हुए हैं. [caption id="attachment_549583" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/दीपक-कुमार-पोद्दार-रांची-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> दीपक कुमार[/caption]

ऐसे बिल से बस आम जनता का नुकसान 

पंडरा रांची निवासी दीपक कुमार पोद्दार से बात करने पर उन्होंने बताया कि ऐसे बिल से बस आम जनता का नुकसान होता हैं. सरकार वैपारियो को बहुत छोटा समझती है. हम भी आवाज उठाएंगे. उन्होंने बताया की 2% बिल के लिए, किसान जिससे देश का एक एक इंसान चावल दाल, अनाज खा रहा है. उसके विरोध में ऐसे कृषि बिल को बढ़ावा देना बहुत गलत है. उन्होंने कहा की सभी वैयपारी, किसान अब एक जुट हो कर आवाज उठाएगा. [caption id="attachment_549590" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/रमेश-खेमका-पंडरा-रांची-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> रमेश खेमका[/caption]

सरकार सोचे बिल से लोगों को कितना लाभ 

रांची स्थित पंडरा निवासी रमेश खेमका का कहना है कि यह सरकार ऊपरी कमाई का संशाधन बनाने की कोशिश में है. इसका एकमात्र उद्देश्य यही है. जिसका व्यापारियों के द्वारा पूरा विरोध किया जाएगा. अब कोई भी शांत नहीं बैठेगा. उन्होंने कहा कि सरकार को इस बिल को वापस लेना ही होगा. सरकार को सोचना चाहिए कि इस बिल से जनता को कितना लाभ होगा. इस बिल के आने से सामान के दाम बढ़ जाएंगे. आम जनता को इससे काफी नुकसान है. [caption id="attachment_549588" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/महेंद्र-प्रसाद-शर्मा-चतरा-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> महेंद्र प्रसाद शर्मा[/caption]

सरकार आम लोगों के बारे में सोचे 

चतरा निवासी महेंद्र प्रसाद शर्मा का कहना है कि राज्य में ज्यादातर बिकने वाले सामान अन्य राज्यों से आते हैं. उन्होंने बताया कि ऐसी वस्तुओं के कृषि शुल्क में आने से यह किसी विपणन व्यवस्था की फीस न होकर सीधे एक टैक्स के रूप में प्रभावी होगा जो जीएसटी के अतिरिक्त डबल टैक्सेशन ही होगा. यह व्यापारियों को मंजूर नहीं है.सरकार से अनुरोध है कि वह आम धरातल पर आकर सोचे. हमारी जगह खुद को रखे और लोगों की दिक्कत समझे. [caption id="attachment_549580" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/केके-अग्रवाल-हजारीबाग-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> केके अग्रवाल[/caption]

इस तरह के टैक्स का कोई तुक नहीं बनता 

हजारीबाग के केके अग्रवाल ने कहा कि आवक बंद है तो निष्कर्ष कैसे निकलेगा. यह कानून काला कानून है जिसे जबरदस्ती लाया जा रहा है. इस तरह का टैक्स का कोई तुक नहीं बनता है. झारखंड में मंडी व्यवस्था नहीं है फिर भी सरकार की कृषि उत्पादों पर टैक्स लगा रही है. हम लोग व्यापारी मिल से माल खरीदते हैं अब सरकार इस तरह के टैक्स लाएगी तो हमें अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा. जिसका सीधा असर किसानों पड़ेगा. इस तरह के टैक्स का कोई महत्व नहीं है. हमें समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार ये विधेयक क्यों लेकर आई है. कृषि मंत्री को इस विधेयक पर फिर से विचार करना चाहिए. [caption id="attachment_549594" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/विजय-जैन-हजारीबाग-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> विजय जैन[/caption]

बिल से जनता की परेशानी बढ़ने वाली है  

हजारिबाग के विधायक पर विजय जैन ने कहा कि इस कानून को जल्द से जल्द खत्म कर देना चाहिए. ये काला कानून है. इस कानून से जनता को बहुत परेशानी होने वाली है. पहले ही जीएसटी लगा हुआ है उसके ऊपर दो पर्सेंट टैक्स इससे व्यापार पर बहुत असर पड़ेगा और कृषि व्यापारियों का आमदनी घटेगा. इसके साथ इस विधेयक के माध्यम से अफसरशाही भी बढ़ेगी. पडोसी राज्य जैसे बंगाल उड़ीसा छत्तीसगढ़ कृषि पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं है. इस बिल के साथ मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि कालाबाजारी जरूर बढ़ेगी. जिससे राजस्व का भी नुकसान होगा. [caption id="attachment_549582" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/जमशेदपुर-पवन-कुमार-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> पवन कुमार[/caption]

व्यापारी एकजुट हो पूरे राज्य में आंदोलन करेंगे 

जमशेदपुर के पवन कुमार का कहना है कि इस विधेयक को वापस लिया जाना चाहिए. अगर यह वापस नहीं लिया गया तो व्यपारियों का विरोध सरकार को झेलना पड़ेगा. हम व्यापारी एकजुट होकर पूरे राज्य में आंदोलन करेंगे. सरकार को गुमान है कि वह एक भी उपचुनाव नहीं हारे हैं लेकिन उनका यह गुमान टूटेगा. अगर सरकार इस विधेयक पर फिर से विचार नहीं करती है तो इस कानून के माध्यम से मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि भ्रष्टाचार बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति पर इसका सीधा असर पड़ेगा. व्यापार खत्म होगा और दूसरे राज्यों में लोगों को ज्यादा सुविधाएं मिलेंगे. [caption id="attachment_549575" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/0-सुरेंद्र-कुमार-धनबाद-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> सुरेंद्र कुमार[/caption]

इस बिल से व्यापारियों को कई फायदा नहीं होगा  

इस बिल पर धनबाद के सुरेंद्र कुमार ने कहा है कि यह काला कानून है इससे व्यापारियों को कोई फायदा नहीं होगा. इससे सिर्फ अफसरशाही ही बढ़ेगी. सरकार बेमतलब का यह विधयेक लेकर आ रही है. हम पहले ही जीएसटी भरते हैं उस पर यह दो पर्सेंट टैक्स हम व्यापारियों पर बोझ बढ़ाएगा. जिसका असर किसानों पर पड़ेगा. हमें समझ में नहीं आती कि सरकार सब जानते हुए भी इस तरह के विधेयक कैसे लेकर आई है. पडोसी राज्य जैसे बंगाल,ओडिशा वहां कृषि पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं है. अगर झारखंड सरकार कृषि पर टैक्स लाएगी तो यहां का व्यापार वहां चला जाएगा. [caption id="attachment_549584" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/ध्यानश्वेर-भगत-चतरा-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> ध्यानश्वेर भगत[/caption]

किसी भी हाल में कृषि बिल को रद्द करना होगा  

चतरा निवासी ध्यानश्वेर भगत का कहना है कि व्यापारी एकता दिखाने का समय आ गया है. किसी भी हाल में कृषि बिल को रद्द करना होगा. उन्होंने बताया कि चतरा से बिलकुल सटी हुई है बिहार की सीमा. बिहार बॉर्डर जहां कृषि बिल नहीं है और हमें इस बिल के साथ काम करना होगा. ऐसे में सभी किसान भाई और व्यापारियों का नुकसान होना तय हैं. इसलिए सरकार को इस बारे में सोचना .चाहिए. अपने फायदे के लिए सरकार आम जनता का नुकसान करने जा रहे हैं. अच्छा हो कि सरकार इसदिशा में ध्यान दे और जितनी जल्द हो इस बिल के वापास ले. [caption id="attachment_549591" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/राजेश-कुमार-बोकारो-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> राजेश कुमार[/caption]

बिल से आम लोगों का बुरा होगा पास कराना अन्याय 

बोकारो के राजेश कुमार का कहना है कि इस बिल से किसी का भला बुरा नहीं होने वाला हैं. ऐसे बिल जिससे आम जनता का बुरा हाल होगा. वैसे बिल को पास करना अन्याय है. उन्होंने कहा कि अन्य राज्य से आयातित वस्तु पर अधिकतम स्लैब में कृषि शुल्क लगाकर जिसपर बाजार समिति ने कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई है, यह सीधे तरीके से आम उपभोक्ता पर महंगाई को बढ़ानेवाला है. पूर्व में जब यह शुल्क प्रभावी था, तब बडे रूप में भ्रष्टाचार व्याप्त था. बोर्ड में व्याप्त अनियमितताओं को देखते हुए ही तत्कालीन सरकार ने इस शुल्क को शून्य कर दिया था.

देवघर :

कृषि विधेयक के विरोध में बंद रहीं खाद्यान्न दुकानें, दी चेतावनी

झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन विधेयक के विरोध में देवघर के खाद्य व्यापारियों ने 8 फरवरी को दुकानें बंद रखी. शहर के लक्ष्मी बाजार, बाजार समिति समेत अन्य बाजारों में खाद्य दुकान बंद रही. खाद्य कारोबारियों ने विधेयक वापस नहीं लेने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है. व्यापारियों का कहना है कि विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है. इसे लागू होने पर खाद्यान्न व्यापारियों पर दो प्रतिशत अतिरिक्त बाजार समिति शुल्क थोप दिया जाएगा. यह शोषण का विधेयक है. इसकी मार खाद्यान्न व्यापारियों समेत छोटे दुकानदारों को भी झेलना पड़ेगा. खाद्य सामानों के दाम बढ़ेंगे. इससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा. झारखंड में अधिकांश खाद्यान्न वस्तुएं बाहर से मंगाई जाती है. पहले से ही उस पर टैक्स लागू है. फिर यहां आने पर 2% बाजार शुल्क देना होगा. विधेयक खाद्यान्न व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों के हित में नहीं है.

धनबाद :

कृषि टैक्स के विरोध में बाजार समिति की सभी दुकानें रहीं बंद

राज्य सरकार की ओर से 2 प्रतिशत कृषि टैक्स लागू करने के विरोध में बुधवार को बाज़ार समिति की सभी दुकानें बंद रही. व्यवसायियों ने व्यवसाय बंद कर सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया है. फेडरेशन चैंबर ऑफ झारखंड ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के आह्वान पर गल्ला, फल आलू-प्याज के व्यवसायी एकजुट होकर कृषि बिल का विरोध कर रहे थे. सुबह से शाम तक बाजार समिति परिसर में सन्नाटा पसरा रहा. सभी व्यवसायी झारखंड चेंबर की बैठक में हिस्सा लेने रांची रवाना हो गए हैं. निर्णय लिया गया है कि 15 फरवरी से खाद्यान्न से जुड़ी सभी दुकाने अनिश्चित काल तक बंद रहेंगी. इधर बाजार समिति बंद रहने के कारण कई राशन दुकानदारों को वापस लौटना पड़ा. विभिन्न राज्यों से माल लेकर मंडी पहुंचे ट्रक चालकों को भी परेशानी हुई. लगभग दर्जन भर चालक बाजार समिति गेट के बाहर अपना ट्रक खड़ा कर दुकान खुलने का इंतजार करते रहे. गुरुवार को साप्ताहिक बंदी है. इस लिहाज से अब 9 फरवरी को भी सभी दुकानें बंद रहेंगी. समिति के अध्यक्ष बिनोद गुप्ता ने बताया कि झारखंड चेंबर के साथ बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर सरकार मांगें पूरी नहीं करती है तो 15 फरवरी से पूरे झारखंड में खाद्यान्न से जुड़ी सभी दुकानें अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेंगी.

जमशेदपुर :

बाजार शुल्क के विरोध में बंद रही मंडी कारोबार भी ठप रहा

झारखंड सरकार द्वारा कृषि उपज एवं पशुधन विपणन (बाजार शुल्क) 2022 विधेयक पारित किए जाने से व्यापारियों में आक्रोश व्याप्त है. इसको लेकर व्यापारियों द्वारा लगातार आंदोलन किया जा रहा है. इसके विरोध में जमशेदपुर के व्यापारियों ने दो दिन (सोमवार और मंगलवार) तक काला बिल्ला लगाकर विरोध जताया. जबकि बुधवार को व्यापारियों ने परसुडीह बाजार समिति में पूरी तरह से कारोबार ठप्प रखा. इससे बाजार समिति में हर तरफ सन्नाटा पसरा रहा. इस संबंध में खाद्यान्न व्यापारी शंकर अग्रवाल ने कहा कि सरकार द्वारा मंडी टैक्स लागू करना पूरी तरह से गलत है. झारखंड कृषि उत्पादन वाला राज्य नही है. यहां दूसरों राज्यों से खाद्यान्न का आवक किया जाता है. खाद्यान्न का पूरा व्यापार ट्रेडिंग पर निर्भर है. ऐसे में सरकार द्वारा मंडी टैक्स लागू करने से खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी होगी. इससे आम लोगों की परेशानी बढ़ेगी.

आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं व्यापारी

शंकर अग्रवाल ने कहा कि सरकार यदि हमारी मांगो पर विचार नही करती है तो वे लोग सड़क से सदन तक आंदोलन करने को बाध्य होंगे. यदि सरकार तब भी इस काले कानून को वापस नही लेती है तो व्यापारी मजबूरन राज्य में खाद्यान्न के आवक पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए भी तैयार है. इससे राज्य में उत्पन्न स्थिति के लिए पूरी तरह राज्य सरकार जिम्मेवार होगी. इस बार व्यापारी सरकार के साथ आर पार की लड़ाई का मन बना चुके है. सरकार ने व्यापारियों को धोखा देने का काम किया है. दूसरे राज्यों से कारोबार करने में होगी परेशानी : विजय साव चक्रधरपुर के खाद्यान्न व्यापारी विजय साव ने कहा है कि झारखंड में कृषि शुल्क विधेयक प्रभावी होने से व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. कृषि शुल्क के कारण दूसरे राज्यों से कारोबार करने में दिक्कतें होंगी. झारखंड से सटे दूसरे राज्यों में यह शुल्क लागू नहीं है, अगर दूसरे राज्य से खाद्यान्न मंगाकर बेचा जाएगा, तो इसमें व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा. शुल्क लगने के साथ ही खाद्यान्न के दामों में भी वृद्धि हो जाएगी. इसका सीधा असर व्यापारियों पर पड़ेगा. [caption id="attachment_549579" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/कमल-गुप्ता-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> कमल गुप्ता[/caption]

मंडी टैक्स से महंगा होगा खाद्यान्न 

जमशेदपुर के खाद्यान्न व्यापारी का कमल गुप्ता का कहना है कि सरकार द्वारा मंडी टैक्स लगाने से खाद्यान्न महंगे होंगे.. लोगों को अनाज महंगा मिलेगा तो स्वाभाविक तौर पर परेशानी बढ़ेगी, क्योंकि व्यापारी टैक्स तो अपने घर से देगा नहीं, वह तो आम लोगों से ही लेगा. वहीं मंडी टैक्स लगाने से व्यापारियों की परेशानी भी बढ़ेगी. सीमावर्ती राज्यों में मंडी टैक्स नहीं होने के कारण वहां खाद्यान्न झारखंड के मुकाबले सस्ता होगा. [caption id="attachment_549603" align="aligncenter" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/Untitled-2-copy-7-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> बंटी अग्रवाल[/caption]

नए मंदी टैक्स से बाजार प्रभावित होगा : 

जमशेदपुर के खाद्यान्न व्यापारी बंटी अग्रवाल ने कहा है कि मंडी टैक्स लगने से रिटेल और होलसेल व्यापार प्रभावित होगा. इसका सीधा असर सरकार के राजस्व पर पड़ेगा. कोरोना के कारण व्यापारी अभी संकट से उबर नही पाए हैं. ऐसे में सरकार द्वारा मंडी टैक्स लगाकर छोटे व्यापारी को परेशान करने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं सीमावर्ती राज्यों में मंडी टैक्स नहीं होने के कारण झारखंड में सीमावर्ती राज्यों से खाद्यान्न की आवक बढ़ जाएगी.

स्थानीय व्यापारियों को काफी नुकसान होगा : आयुष पोद्दार

कोडरमा के व्यवसायी आयुष पोद्दार का कहना है कि झारखंड में कृषि बिल प्रभावी होने से स्थानीय व्यापारियों को काफी नुकसान होगा. झारखंड के पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा में यह शुल्क लागू नहीं है. सरकार बाजार समिति शुल्क लगा कर चावल और अन्य खाद्यान्नों से जुड़े व्यापार को समाप्त करना चाहती है. इससे आम जनता परेशान होगी, उन पर महंगाई की मार पड़ेगी. जब अन्य राज्यों ने इस शुल्क को समाप्त करने का फैसला लिया है.

व्यवसायियों को परेशान करना बंद करे सरकार : कानू अग्रवाल

हजारीबाग के खुदरा खाद्यान्न व्यवसायी संघ और उत्तरी छोटानागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य कानू अग्रवाल ने कहा कि कृषि शुल्क विधेयक काला कानून है. इसे लागू कर व्यवसायियों को सरकार परेशान करना बंद करे. एक तो जीएसटी, फिर नगर निगम की चुंगी और अब कृषि शुल्क. इन सब का टैक्स बढ़ने पर खाद्यान्न की कीमत में उछाल आएगा. इसका असर बाजार और आम जनता पर भी पड़ेगा. यह बिल सरकार को वापस लेने की जरूरत है.

व्यवसायियों और उपभोक्ताओं से ही बाजार है : आनंद जैन

हजारीबाग के खुदरा खाद्यान्न व्यवसायी संघ और उत्तरी छोटानागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य आनंद जैन ने कहा कि व्यवसायियों और उपभोक्ताओं से ही बाजार है. टैक्स पर टैक्स लादकर सिर्फ महंगाई बढ़ाई जा रही है. पहले से ही जीएसटी, फिर नगर निगम क्षेत्र में चुंगी और अब कृषि बिल विधेयक लाकर सरकार व्यवसायियों को मानसिक और आर्थिक तनाव देने का काम कर रही है. अभी एक तरह से सांकेतिक प्रदर्शन था, आगे सरकार को फैसला लेना है.

झारखंड सरकार मनमानी पर उतर आई है: दीपक कटेसरिया

धनबाद के व्यवसायी दीपक कटेसरिया बताया कि झारखंड सरकार अपनी मनमानी पर उतर आई है. 2 प्रतिशत टैक्स लगाकर वह अपनी झोली भरना चाहती है. जबकि 2 प्रतिशत शुल्क लगाने से महंगाई बढ़ेगी और उसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा. किसी भी हालत में महंगाई बढ़ना नहीं चाहिए. इस समय लोग मंहगाई से परेशान हैं. इस नए के टैक्स के लागू होने से लोगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा.

बढ़ेगी मंदी, शुल्क लागू होना सभी के लिए गलत : रिंकू भगेरिया

खाद्यान्न व्यापारी रिंकू भगेरिया ने कहा कि बाजार कृषि उत्पादन पर टिका होता है. ऐसे में कृषि शुल्क विधेयक प्रभावी होने से बाजार में मंदी बढ़ेगी. पहले से ही व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. कृषि उपज वाले सामान चावल, दाल, चना आदि के दामों में वृद्धि होगी. शुल्क से व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा. व्यापारियों को एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा. अन्यथा महंगाई बढ़ने से हर वर्ग के लोगों को परेशानी होगी. सरकार को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए.

चावल पर प्रति क्विंटल 50 से 60 रु. बोझ पड़ेगा : आकाश वर्मा

कोडरमा के व्यापारी आकाश वर्मा ने कहा है कि बाजार समिति शुल्क लगने से धान और चावल पर पर प्रति क्विंटल 50 से 60 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. पड़ोसी राज्य ओडिशा और पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार द्वारा बाजार समिति शुल्क लागू नहीं है. ऐसे में यहां के व्यापारियों के लिए पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चावल बेचना और धान खरीदना मुश्किल हो जाएगा. सरकार को इस दिशा में ध्यान देने की जरुरत है.

14 फरवरी तक फैसला ले सरकार : अजय छाबड़ा

हजारीबाग के खुदरा खाद्यान्न व्यवसायी संघ के और उत्तरी छोटानागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य अजय छाबड़ा ने कहा कि 14 फरवरी तक सरकार फैसला ले. उसके बाद खाद्यान्न का आवक रोको आंदोलन होगा. अभी काला बिल्ला लगाकर व्यापारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. अगर सरकार नहीं मानेगी, तो आगे जमकर विरोध होगा. राज्य सरकार को बिल लाने के पहले व्यवसायियों से सहमति बनानी चाहिए थी.

व्यवसाय चौपट हो जाएगा, बिल वापस ले सरकार : बिट्टू लाडिया

धनबाद के व्यवसाई बिट्टू लाडिया ने कहा कि इस विधेयक से स्थानीय व्यवसाय चौपट हो जाएगा. झारखंड से सटे राज्य जहां बाजार समिति शुल्क नहीं है, व्यापारी वहां से झारखंड में कृषि उत्पादकों की सप्लाई करेंगे. इससे झारखंड सरकार को भी राजस्व की भारी हानि होगी और जनता को महंगाई का सामना करना पड़ेगा. सरकार को विधेयक को वापस लेना चाहिए. इस बिल से पूरे प्रदेश के व्यवसायियों में असंतोष है.

बिल वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा : अनिल मित्तल

धनबाद के व्यवसायी अनिल मित्तल का कहना है कि विधेयक वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा. आज सिर्फ एक दिन के लिए दुकानें बंद रखी थी. सरकार अगर सरकार नहीं मानती है तो 15 फरवरी से अनिश्चितकाल के लिए दुकानें बंद रहेंगी. सरकार को बिल लाने के पहले व्यवसायियों से सहमति बनानी चाहिए थी. सरकार का फैसला आम लोगों के हित में नहीं है. उसे इस विधेयक को जितनी जल्दी हो वापस ले लेना चाहिए. [wpse_comments_template]

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