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चौंकाने वाली खबर ! पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ खाली नहीं कर रहे सरकारी बंगला, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को पत्र लिखा

Lagatar Desk

New Delhi: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डॉ डीवाई चंद्रचूड़ को लुटियंस दिल्ली के कृष्ण मेनन मार्ग पर स्थित बंगला नंबर- 5 को तुरंत खाली करने का निर्देश देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है.

 

चंद्रचूड़ जिस बंगला में रह रहे हैं, वह बंगला आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के लिए आवंटित है, लेकिन 10 नवंबर 2024 को सेवानिवृत्त होने वाले डीवाई चंद्रचूड़ ने अभी तक बंगला खाली नहीं किया है. 

 

अंग्रेजी दैनिक हिन्दुस्तान टाईम्स की रिपोर्टस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने 1 जुलाई 2025 को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि चंद्रचूड़ को नियमों के तहत बंगले में रहने की अनुमति सेवानिवृत्ति की तिथि से 6 महीने के लिए थी, जो 10 मई 2025 को समाप्त हो चुकी है. 

 

10 मई 2025 के बाद उन्हें 31 मई 2025 तक अतिरिक्त समय दिया गया था, लेकिन वह अब भी बंगले में बने हुए हैं. पत्र में कहा गया है कि बंगला खाली करवाकर इसे सुप्रीम कोर्ट के हाउसिंग पूल में वापस लौटाया जाए, ताकि नए जजों को आवास आवंटित करने में हो रही परेशानी को दूर किया जा सके.

 

चंद्रचूड़ की सफाई

 

पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकार ने उन्हें वैकल्पिक आवास के रूप में किराए पर एक टाइप-7 बंगला आवंटित किया था. हालांकि यह बंगला लंबे समय से खाली होने के कारण रहने योग्य नहीं था और इसकी मरम्मत का काम चल रहा है. उन्होंने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया है- "मैंने सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को इसकी जानकारी पहले ही दे दी थी. जैसे ही वैकल्पिक आवास रहने लायक हो जाएगा, मैं तुरंत वहां शिफ्ट हो जाऊंगा.

 

चंद्रचूड़ ने यह भी उल्लेख किया है कि उनकी दो विशेष आवश्यकता वाली बेटियों के लिए उपयुक्त आवास ढूंढने में कठिनाई हो रही है, जिसके कारण वह अभी तक बंगले में रह रहे हैं. उन्होंने अप्रैल 2025 में इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया था, जब उन्होंने कहा था कि वह और उनकी पत्नी दिल्ली में ऐसा घर तलाश रहे हैं जो उनकी बेटियों की जरूरतों को पूरा कर सके. 

 

क्या है नियम

 

सुप्रीम कोर्ट के नियम 3B (2022) के अनुसार, सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश को अधिकतम 6 महीने तक सरकारी आवास में रहने की अनुमति है, वह भी प्रतीकात्मक लाइसेंस फीस के साथ. चंद्रचूड़ को इस नियम के तहत 30 अप्रैल 2025 तक बंगले में रहने की अनुमति दी गई थी, जिसे बाद में 31 मई 2025 तक बढ़ाया गया. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है.

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