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हजारीबाग में सजती हैं चोरी के सामान की दुकानें

Pramod upadhyay/ranjana kumari HAZARIBAGH: हजारीबाग में चोरी गए सामान से कबाड़ी की दुकान सजती है. चूंकि यहां चोरों को आसानी से सामान के दाम मिल जाते हैं इसलिए कम हो या अधिक, ज्यादा मोलभाव नहीं होता. कबाड़ी की दुकान ने जो रेट तय कर दिया, चोर लेकर चले जाते हैं. वैसे भी उन्हें सामान खपाने की दरकार रहती है, पैसा तो लगा नहीं रहता है इसलिए जो मिल गया वही मुनाफा है. दरअसल हजारीबाग शहर में इन दिनों लगातार चोरी की घटना घट रही है. कभी कटकमदाग, तो कभी सदर, तो कभी बड़ा बाजार, तो कभी कोरा, लोहसिंगना व पेलावल थाना क्षेत्र में चोरी की वारदातें हो रही हैं. अब तो जेवर, मोबाइल फोन से लेकर मोटरसाइकिल एवं चौपहिया वाहन तक की चोरी की जा रही है. पुलिस और सीसीटीवी का भी इन चोरों को भय नहीं है. यहां से चोरी कर चोरों को सामान बेचने के लिए दूसरे शहर भी जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. अधिकांश चोरी के सामान शहर में ही खपा दिए जाते हैं. हैरानी की बात है कि कई कबाड़ी की दुकानों में चोरी के सामान बेचे जा रहे हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन को इसके बारे में पता ही नहीं चल पाता.
  • जिले में चल रहा चोरी के जेवर, मोबाइल फोन और वाहन खपाने का गोरखधंधा
  • बाहर से दिखती है कबाड़ी की दुकान, अंदर मिलते हैं चोरी के वाहनों के पार्ट्स
  • 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य की शराब बरामद हुई थी चौपारण थाना क्षेत्र में एक महीना पहले कबाड़ी से भरा ट्रक से

हर मॉडल की गाड़ी के पार्ट्स मिल जाते हैं ग्राहकों को

बता दें कि चौपारण थाना क्षेत्र में एक महीना पहले कबाड़ी से भरा ट्रक पुलिस ने पकड़ा था, जिसके पास कागजात भी उपलब्ध थे. लेकिन जब पुलिस ने ट्रक की जांच की तो उसमें 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य की शराब बरामद हुई थी. वहीं कोर्रा और बड़ा बाजार थाना क्षेत्र के कारगिल पेट्रोल पंप के निकट एक कबाड़ी की दुकान में जब पुलिस ने छापा मारा, तो वहां से ट्रक भर चोरी के सामान बरामद हुए, जिसमें पुलिस लाइन सहित कई घरों के सामान शामिल थे. वहीं कोर्रा थाना क्षेत्र में स्थित हवाई अड्डे के पास कबाड़ी की दुकान से भी भारी मात्रा में चोरी के सामान पुलिस ने बरामद किए थे. ऐसी ही कई कबाड़ी की दुकानें हैं, जो चोरी के सामानों की खरीदारी का गोरखधंधा करते हैं. इनमें बड़ी-बड़ी गाड़ियों के पार्ट्स-पुर्जे खपाए जा रहे हैं. इन दुकानों में वाहनों के इतने पार्ट्स-पुर्जे होते हैं कि उन्हें जोड़ा जाए, तो नई खाड़ी खड़ी हो जाएगी. दुकानदार चोरी किए वाहनों को पार्टवाइज काटकर उसका हर पार्ट अलग कर देते हैं और फिर पार्ट बाय पार्ट जरूरत के अनुसार लोगों को बेचे जाते हैं. इतना ही नहीं, इन दुकानदारों के गोदाम 2000 से 5000 वर्गफीट के होते हैं, जहां आपको हर मॉडल की गाड़ी के पार्ट्स मिल जाएंगे.

शहर में अब चोरी के मोबाइल फोन व जेवर की दुकानें भी खुलीं

हजारीबाग शहर में अब चोरी के गई मोबाइल फोन और ज्वेलर्स की दुकानें भी खुल गई हैं. इनमें केवल दिखाने के लिए छोटे-मोटे चांदी के आइटम रखे जाते हैं और शाम ढलते ही इनमें चोरों की भीड़ लगने लगती है. ग्राहक भी सज-धज कर आते हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल होती हैं. ये लोग चोरी के जेवर दुकानदार को दे देते हैं और अपनी रकम लेकर चले जाते हैं. बाद में दुकानदार मोबाइल फोन का पासवर्ड कंप्यूटर के सहारे तोड़कर उसे शोकेस में लगाकर पुराना मोबाइल कहकर ग्राहक को बेच दे देता है, जिसका रसीद भी दिया जाता है. वहीं जेवर दुकानदार भी कुछ कम नहीं है. वह भी चोरी का जेवर खरीदकर उसे नया बना देता है और शोकेस में लगा देता है. इसके बाद मेकिंग चार्ज कम होने की बात कह कर ग्राहक को बेच देता है. इसका भी रसीद होता है. हजारीबाग में ऐसी दुकान पकड़ी भी जा चुकी है. एक महीना पहले धनबाद पुलिस हजारीबाग आई थी और वह बता रही थी कि धनबाद से चांदी चोरी हुई थी, जिसको हजारीबाग में खपाया गया था. एक जेवर दुकानदार से पूछताछ भी की गई थी.

क्या कहते हैं पुलिस अधीक्षक

इस संबंध में पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार सिंह ने पूछे जाने पर कहा कि इस तरह के गोरखधंधे की जानकारी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी. पूर्व में भी कई कबाड़ी की दुकानों पर कार्रवाई हो चुकी है. उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहक भी सावधानी बरतें. कम कीमत के चक्कर में चोरी का सामान न खरीदें वरना पकड़े जाने पर उन पर भी कार्रवाई पुलिस करेगी और ग्राहक को भी जेल जाना पड़ेगा.

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