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खान विभाग में अधिकारियों का टोटा, प्रभार के भरोसे खनन व्यवस्था

Ranchi News: खान विभाग में अधिकारियों की कमी का आलम यह है कि कई जिलों में जिला खनन पदाधिकारी का पद लंबे समय से रिक्त है. इन पदों का अतिरिक्त प्रभार दूसरे जिलों के अधिकारियों को दिया गया है. एक अधिकारी को दो-दो और कहीं-कहीं तीन-तीन जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं. इससे विभागीय कामकाज प्रभावित होने के साथ फैसला लेने और कार्रवाई में भी देरी हो रही है.
 
खनन की फाइल फोटो

Ranchi News: झारखंड में सबसे अधिक राजस्व संग्रह करने वाले विभागों में वित्त एवं वाणिज्यिक कर विभाग पहले स्थान पर है. कमर्शियल टैक्स के रूप में राज्य को सबसे अधिक राजस्व मिलता है. इसके बाद खान एवं भूतत्व विभाग राजस्व संग्रह में दूसरे स्थान पर है. इसके बावजूद खान विभाग लंबे समय से अधिकारियों और पदाधिकारियों की कमी से जूझ रहा है. जिला से लेकर प्रमंडल और मुख्यालय स्तर तक कई महत्वपूर्ण पद प्रभार में चल रहे हैं. इसका असर विभागीय कार्यों के साथ राजस्व संग्रह पर भी पड़ रहा है.


खान विभाग में अधिकारियों की कमी का आलम यह है कि कई जिलों में जिला खनन पदाधिकारी का पद लंबे समय से रिक्त है. इन पदों का अतिरिक्त प्रभार दूसरे जिलों के अधिकारियों को दिया गया है. एक अधिकारी को दो-दो और कहीं-कहीं तीन-तीन जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं. इससे विभागीय कामकाज प्रभावित होने के साथ फैसला लेने और कार्रवाई में भी देरी हो रही है.


विभाग में माइनिंग इंस्पेक्टर से असिस्टेंट माइनिंग ऑफिसर के पद पर सात अधिकारियों को पदोन्नति मिली है. वहीं असिस्टेंट माइनिंग ऑफिसर से जिला खनन पदाधिकारी के पद पर 11 अधिकारियों को प्रमोशन मिला है. इसके बावजूद कई जिलों में नियमित पदस्थापन नहीं किया गया है और प्रभार के भरोसे व्यवस्था चल रही है.


लोहरदगा के जिला खनन पदाधिकारी मार्च 2026 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं. इसके बाद से यह पद रिक्त है. गुमला के जिला खनन पदाधिकारी भी करीब दो माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं. कोडरमा में जनवरी 2025 से ही जिला खनन पदाधिकारी का पद रिक्त है. वहां भी प्रभार से काम चल रहा है. वहीं खूंटी और हजारीबाग के जिला खनन पदाधिकारी भी इसी वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले हैं.


रांची, खूंटी और गिरिडीह में दोहरा प्रभार

रांची, खूंटी और गिरिडीह के डीएमओ दोहरे प्रभार में काम कर रहे हैं. एक अधिकारी को एक साथ दो जिलों के खनन विभाग की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है. इससे चालान जेनरेट करने, निरीक्षण, खनन पट्टा संबंधी कार्यों और विभागीय कार्रवाई में देरी की स्थिति बन रही है. अधिकारियों की कमी का असर राजस्व संग्रह और अवैध खनन पर निगरानी की व्यवस्था पर भी पड़ रहा है.


कई अधिकारियों के पास दो-दो और तीन-तीन जिम्मेदारियां


सरायकेला के डीएमओ को अपने जिले की जिम्मेदारी के साथ डिप्टी डायरेक्टर माइंस एवं जियोलॉजी, कोल्हान का भी प्रभार दिया गया है. हजारीबाग के डीएमओ डिप्टी डायरेक्टर माइंस की जिम्मेदारी के साथ पलामू प्रमंडल के जियोलॉजी का भी प्रभार संभाल रहे हैं. साहिबगंज के डीएमओ के पास डिप्टी डायरेक्टर माइंस, संथाल परगना का भी अतिरिक्त प्रभार है.


मुख्यालय स्तर पर भी अतिरिक्त प्रभार का बोझ है. मुख्यालय में पदस्थापित संजीव कुमार के पास एडिशनल डायरेक्टर माइंस, मुख्यालय के साथ डिप्टी डायरेक्टर माइंस, मुख्यालय की भी जिम्मेदारी है. उनके खिलाफ पूर्व में कई गंभीर आरोप लगने की बात भी सामने आती रही है. एसीबी से शिकायत भी की गयी है.


वहीं बोकारो के डीएमओ रवि सिंह करीब चार से पांच वर्षों से बोकारो जिले में ही पदस्थापित हैं. एक ओर कई जिलों में डीएमओ के पद रिक्त हैं और अधिकारी अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारियों के लंबे समय तक एक ही जिले में पदस्थापित रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.


राज्य के दूसरे सबसे बड़े राजस्व देने वाले विभाग में अधिकारियों की कमी और लगातार अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था से खनन प्रशासन प्रभावित हो रहा है. नियमित पदस्थापन नहीं होने से कार्यों के निष्पादन, निगरानी, चालान और विभागीय कार्रवाई में देरी की स्थिति बन रही है. ऐसे में रिक्त पदों को भरने और अधिकारियों की नियमित पदस्थापना की जरूरत पर सवाल उठ रहे हैं.

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