- HC ने शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वे की दी थी मंजूरी
NewDelhi : श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट से हिंद पक्ष को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद में सर्वे पर रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने यह फैसला सुनाया है. दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर 2023 कृष्ण जन्मभूमि से सटी शाही ईदगाह मस्जिद का सर्वेक्षण अदालत की निगरानी में करने की अनुमति दी थी. ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह की प्रबंधन समिति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और सर्वे पर रोक लगाने की मांग की थी. मस्जिद समिति ने अपनी याचिका में कहा कि हाईकोर्ट को मुकदमे में किसी भी अन्य विविध आवेदन पर निर्णय लेने से पहले वादपत्र की अस्वीकृति के लिए उसकी याचिका पर विचार करना चाहिए था. समिति ने इस आधार पर याचिका खारिज करने का अनुरोध किया था कि यह मुकदमा प्रार्थना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 द्वारा वर्जित है, जो धार्मिक स्थल के स्वरूप में बदलाव पर रोक लगाता है.
अदालत आयुक्त की नियुक्ति के लिए नहीं दे सकते हैं अस्पष्ट आवेदन
पीठ ने हिंदू पक्षों ( भगवान श्रीकृष्ण विराजमान और अन्य) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान से कहा कि आप अदालत आयुक्त की नियुक्ति के लिए अस्पष्ट आवेदन नहीं दे सकते हैं. इसका उद्देश्य बहुत स्पष्ट होना चाहिए. आप सब कुछ अदालत पर नहीं छोड़ सकते हैं. न्यायालय ने हिंदू संस्थाओं को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है. उसने यह स्पष्ट कर दिया कि विवाद से जुड़े मामलों की हाई कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी. वहीं सुप्रीम कोर्ट में ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह की प्रबंधन समिति की याचिका पर सुनवाई हो रही है. जिसमें हाईकोर्ट ने शाही ईदगाह के अदालत की निगरानी में सर्वेक्षण की अनुमति दी थी.
कब हुआ शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण?
शाही ईदगाह मस्जिद मथुरा शहर में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर से सटी हुई है. इसे भगवान कृष्ण की जन्मस्थली माना जाता है. दावा किया जाता है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्मस्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट कर 1669-70 में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था.
13.37 एकड़ जमीन का स्वामित्व किसे मिला था?
मथुरा में 13.37 एकड़ जमीन पर विवाद है. करीब 11 एकड़ पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर है. जबकि 2.37 एकड़ जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद है. औरंगजेब ने 1669-70 में शाही ईदगाह का निर्माण कराया था. दावा है कि उसने श्रीकृष्ण जन्मस्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को तोड़कर निर्माण कराया था. 1935 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13.37 एकड़ की विवादित भूमि बनारस के राजा कृष्ण दास को अलॉट कर दी थी. 1951 में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने इस भूमि को अधिग्रहित कर लिया था. 1958 में यह ट्रस्ट श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और 1977 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से रजिस्टर्ड हुआ. 1968 में श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह कमेटी के बीच हुए समझौते में इस 13.37 एकड़ जमीन का स्वामित्व ट्रस्ट को मिला. ईदगाह मस्जिद का मैनेजमेंट ईदगाह कमेटी को मिला. [wpse_comments_template]
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