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शुभम संदेश पड़ताल : HMCH में प्राइवेट नर्सिंग होम के एजेंट हावी, र‍िपोर्ट में पढ़‍िए कैसे मरीजों को फंसाते हैं

आउटसोर्सिंग कर्मी एवं होमगार्ड के जवान भी खूब चला रहे गोरखधंधा, अनुबंध स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल का उठा रहे फायदा Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कार्यरत अनुबंधकर्मी पिछले 10 दिनों से हड़ताल पर हैं. इस मौके का फायदा एजेंट (बिचौलिए) उठा रहे हैं. कमीशनखोरी के फेर में एजेंट सीधा सरकारी अस्पताल में घुस जा रहे हैं. वहां जाकर मरीज और उनके परिजनों को समझा-बुझाकर प्राइवेट नर्सिंग होम ले जा रहे हैं. ऐसा ही एक एजेंट शनिवार को भी महिला वार्ड में देखा गया. वहां ग्रामीण क्षेत्र की महिला प्रसव के लिए परिजनों के साथ आयी थी. एजेंट उसे यह समझा रहा था कि यहां स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल पर हैं. ढंग से इलाज नहीं हो पाएगा. प्राइवेट नर्सिंग होम में सभी सुविधाएं मौजूद है. फीस आदि भी कुछ कम करा दिया जाएगा. हालांकि महिला ने पैसे के अभाव में प्राइवेट नर्सिंग होम जाने से इनकार कर दिया. इन दिनों प्राइवेट नर्सिंग होम के कई एजेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हावी दिख रहे हैं. उनका एक लॉबी चल रहा है, जिसमें आउटसोर्सिंग के कुछ कर्मी और वहां तैनात कुछ होमगार्ड भी शामिल हैं. उन्हें भी कुछ कमीशन मिल जाता है. एजेंट के साथ सभी मिलकर अनुबंध कर्मियों की हड़ताल का भरपूर लाभ उठा रहे हैं. मरीजों को समझा-बुझाकर एवं जबरन प्राइवेट नर्सिंग होम ले जाने की बात पर कई बार मरीजों से एजेंटों की फसाद भी हो जा रही है.

मरीजों को ले जाने के लिए वाहन तक उपलब्ध करा रहे एजेंट

मरीजों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल से प्राइवेट नर्सिंग होम तक ले जाने के लिए कोई अपनी एंबुलेंस को कोई ई-रिक्शा पर बैठा कर ले जाने की बात करते हैं. कई मरीज उन एजेंटों के झांसे में आ भी जाते हैं. केस-1 : इस संबंध में कटकमसांडी प्रखंड के असधीर निवासी सिकंदर साव ने बताया कि मारपीट में उन्हें चोट लगी थी. इसके लिए सदर अस्पताल में भर्ती हुए थे. लेकिन सदर अस्पताल में कर्मियों की कमी की वजह से उन्हें रेफर कर दिया गया. इसी बीच एजेंट उन्हें नर्सिंग होम ले जाने की बात समझाने लगा. उनके पास उतने पैसे नहीं, लेकिन इलाज कराने की मजबूरी थी, इसलिए एजेंट का दामन थामना पड़ा. केस-2 : इस संबंध में हड़ताल कर्मियों ने बताया कि जब तक सरकार मांगें पूरा नहीं करेगी, यह हड़ताल समाप्त नहीं होगा. ऐसे में सदर अस्पताल में इन दिनों गैर प्रशिक्षित और अनुभवहीन कर्मियों के सहारे मरीजों का इलाज चल रहा है. इस वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है और कई मरीज लौट रहे हैं. इसका फायदा एजेंट उठा रहे हैं और उन्हें प्राइवेट इलाज के लिए ले जा रहे हैं. केस-3 : वहां कार्यरत चंद कर्मी मरीजों की मजबूरी का फायदा भी उठा रहे हैं. स्वास्थ्यकर्मियों के हड़ताल पर जाने से कर्मियों की कमी और मरीजों की बढ़ोतरी हो गई है. ऐसे में मरीजों से काम पर तैनात कई कर्मी मोटी रकम लेकर उन्हें सरकारी अस्पताल में सेवा दे रहे हैं. मरीज और उनके परिजन भी मजबूरी में ऐसा करने को विवश हैं.

बोले सिविल सर्जन, दो बार दलालों को भगाया

सिविल सर्जन डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि उन्होंने भी दो बार अस्पताल से दलालों को भगाया. वह डिप्टी सुपरिटेंडेंट के साथ मरीजों का हाल लेने के लिए वार्ड में गए थे. उसी दौरान दो दलालों को मरीज के पास देखा, तो उसे डांट-फटकार लगाकर भगाया. इसमें मरीज और उनके परिजनों को भी समझदारी से काम लेने की जरूरत है. दलालों को रोकने का प्रयास जारी है. [wpse_comments_template]

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