- कहा - साइकिल वितरण नहीं होने से ड्रॉप आउट की समस्या बढ़ी, कल्याण विभाग जल्द उपलब्ध कराये
- झारखंड की जनजाति आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित, केंद्र से मिली राशि पड़ी है, पर नहीं बन रही उचित योजना
- तीन जनवरी के अंक में शुभम संदेश में छपी थी खबर
Ranchi : झारखंड सरकार के कल्याण विभाग द्वारा स्कूली बच्चों को साइकिल नहीं दिए जाने संबंधी हिंदी दैनिक शुभम संदेश की खबर का असर दिखा है. राज्यपाल रमेश बैस ने कल्याण विभाग के अधिकारियों से कहा है कि राज्य में साइकिल वितरण योजना प्रभावी नहीं है. यहां के छात्र- छात्राएं साइकिल से वंचित हैं. दो माह बाद उनकी परीक्षा होनेवाली है. इन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन नहीं होने से राज्य में ड्रॉप आउट की समस्या बढ़ती है. राज्य के छात्र- छात्राओं को साइकिल शीघ्र सुलभ हो, इस दिशा में विभाग शीघ्र कार्रवाई करे. राज्यपाल गुरुवार को कल्याण विभाग के अधिकारियों संग योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे. शुभम संदेश ने तीन जनवरी के अंक में कागजों में कल्याण शीर्षक से साइकिल वितरण योजना की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी.
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alt="" width="926" height="1599" /> तीन जनवरी के अंक में शुभम संदेश में छपी थी खबर[/caption]
alt="" width="926" height="1599" /> तीन जनवरी के अंक में शुभम संदेश में छपी थी खबर[/caption]
विभाग के पास कोई विजन ही नहीं
बैठक में राज्यपाल ने जनजातियों के विकास के लिए विभाग की चल रही योजनाओं के सही क्रियान्वयन नहीं होने पर भी नाराजगी जतायी. कहा, झारखंड की जनजातियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो रहा है. इनके कल्याण के लिए विभाग के पास कोई विजन ही नहीं है. विडंबना है कि जनजाति समाज आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. केंद्र से मिली राशि पड़ी है, लेकिन उचित योजना बनाकर उसका खर्च नहीं हो रहा है. बैठक में राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी, कल्याण सचिव के श्रीनिवासन, आदिवासी कल्याण आयुक्त लोकेश मिश्रा, कल्याण विभाग के विशेष सचिव राजीव रंजन मिश्रा, डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के निदेशक डॉ रणेंद्र कुमार एवं अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे.
केंद्रीय राशि का सही खर्च नहीं होने पर जतायी नाराजगी
समीक्षा बैठक में राज्यपाल ने केंद्र से विगत तीन वित्तीय वर्षों में मिली राशि का 50 प्रतिशत खर्च नहीं होने पर भी चिंता जतायी. कहा, यह विभाग की शिथिलता को दिखाता है. केंद्र द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-2021 में 102.78 करोड़ के विरुद्ध 43.49 करोड़, वित्तीय वर्ष 2021-22 में 122.64 करोड़ के विरुद्ध 17.90 करोड़ एवं वित्तीय वर्ष 2022-23 में 67.48 करोड़ के विरुद्ध राज्य सरकार अब तक कोई राशि खर्च नहीं कर पायी है. वहीं सीसीडी योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1777.29 लाख के विरुद्ध 1019.75 लाख, वित्तीय वर्ष 2021-22 में 1696.93 लाख के विरुद्ध 262.27 लाख ही सरकार खर्च कर पायी है. वित्तीय वर्ष 2022-23 में स्वीकृत राशि 2551.77 लाख के विरुद्ध कोई भी राशि विमुक्त नहीं की गई. अनुसूचित जाति उप योजना एवं जनजाति उप योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-2021 में विमुक्त 7049.64 लाख के विरुद्ध 1311.838 लाख व वित्तीय वर्ष 2021-22 में 6531.00 लाख के विरुद्ध कोई राशि खर्च नहीं हुई.
टीएसी मामले में सरकार का अब तक नहीं आया कोई जवाब
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड 5वीं अनुसूची क्षेत्र में आता है. आश्चर्य है कि पिछले 18 महीने में एक बार भी विभाग के अधिकारियों द्वारा आकर विभाग की गतिविधियों से अवगत नहीं कराया गया. राज्य सरकार द्वारा टीएसी की नियमावली में पुनर्गठन संबंधी प्रस्ताव उनके द्वारा वापस कर दिया गया. पूर्व में राज्यपाल द्वारा टीएसी में 2 व्यक्तियों को नामित किए जाने का प्रावधान था, जिसे नियमावली के तहत समाप्त किया गया. सरकार को इस संबंध में पत्र भेजा गया है, लेकिन इसका जवाब आज तक नहीं आया.
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