महिलाओं ने बयां की अपनी पीड़ा, ‘शुभम संदेश’ से की शिकायत हजारीबाग जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में महिला मुलाकातियों की होती है भारी फजीहत और भयावह हैं हालात टोकन के अलावा तीन जगह चढ़ाना पड़ता है चढ़ावा Pramod Upadhyay Hazaribagh: हजारीबाग जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में महिला मुलाकातियों की भारी फजीहत होती है और वहां के हालात बड़े ही भयावह हैं. यह ‘शुभम संदेश’ नहीं, महिला सविता देवी ने यह शिकायत की है. उनका कहना है कि उनके पति तीन माह से जेल में बंद हैं. जब वह उनसे मिलने जाती हैं, तो पहले ही गेट से जेलकर्मी उन पर कुदृष्टि डालते हैं और अश्लील बातें करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि पति से मुलाकात करने के लिए टोकन के अलावा उन्हें तीन जगह चढ़ावा भी चढ़ाना पड़ता है. इसे भी पढ़ें:
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हजारीबाग सेंट्रल में बंदी से मिलने के लिए परिजनों को 10 रुपए का टोकन कटाना पड़ता है. इसके अलावा तीन जगहों पर चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है. सेंट्रल जेल के पहले ही द्वार पर मुलाकातियों से नजराना लिया जाता है. फिर सामान रखने की जगह तैनात जेलकर्मियों को चढ़ावा देना पड़ता है. आखिरी में जहां बंदी से मुलाकात होती है, वहां भी पॉकेट ढीले करने पड़ते हैं. बंदियों को कुछ खाने-पीने का सामान या नगद पैसे देने के एवज में मुलाकातियों से रकम ऐंठी जाती है. दिए गए रकम का 10% काटकर जेलकर्मी अपने पॉकेट भरते हैं. बाकी रकम बंदियों तक पहुंचती है. पहले गेट पर 10 से 50 रुपए और सामान की सुरक्षा के लिए मुलाकातियों का कद देखकर रकम की वसूली की जाती है.
ऐसे हुआ पूरे मामले का खुलासा
शिकायत मिलने पर ‘शुभम संदेश’ का पत्रकार जब सेंट्रल जेल पहुंचा, तो कई महिलाओं ने आपबीती बयां की. कई महिलाओं ने बताया कि जेल गेट पर तैनात कई जेलकर्मियों की हरकत कुछ ठीक नहीं रहती. उनके देखने और बातचीत करने का व्यवहार कुछ अच्छा नहीं रहता है. महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं. मजबूरी में उन्हें जेल कैंपस में आना पड़ता है. इसे भी पढ़ें:
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केस-1
मारपीट के आरोप में चार दिनों से जेल में बंद तेजनारायण से उसकी पत्नी मुलाकात के लिए शुक्रवार को जेपी केंद्रीय कारा पहुंची थीं. महिला ने बताया कि उनके पति के साथ उसी गांव के चार अन्य व्यक्ति सेंट्रल जेल में बंद हैं. सभी के परिजन अपने-अपने बंदी से मिलने आए. टोकन के बाद हर गेट पर तीन जगह चढ़ावा चढ़ाने के बाद मुलाकात करने पहुंचे. बंदी को खाने में अंगूर दिया, तो उसके लिए उनसे जेलकर्मी ने 20 रुपए लिए. इसके अलावा पांचों महिलाओं ने अपने-अपने बंदियों के लिए सामूहिक रूप से 5000 रुपए दिए. उसमें से 500 रुपए काटकर बंदियों तक रकम पहुंचानेवाले जेलकर्मी ने अपने पॉकेट में डाल लिए. इसके अलावा महिलाओं से अलग से 100-100 रुपए भी लिए.
केस-2
कटकमसांडी के कंडसार से आयी महिला सविता देवी ने बताया कि उनके पति लालमणि कुशवाहा तीन माह से जेल में बंद हैं. उन्हें भी 10 रुपए के टोकन के अलावा तीन जगह चढ़ावा चढ़ाना पड़ा. फिर खाने-पीने के सामान के अलावा नगद देने पर 1000 में से 100 रुपए काट लिए. महिला ने बताया कि पति के जेल जाने के बाद से तंगहाल जिंदगी जी रही हैं. कर्ज लेकर जेल में बंद पति से मिलने आए. लेकिन यहां भी चढ़ावा चढ़ाना पड़ा.
केस-3
चतरा के हंटरगंज से अपने परिजन पिंटू पासवान से मुलाकात के लिए आयीं संजू देवी ने बताया कि सेंट्रल जेल में तैनात कर्मियों का व्यवहार महिलाओं के प्रति ठीक नहीं है. न उन्हें बात करने का ढंग है और न ही उनके देखने का अंदाज. संजू देवी ने बताया कि जब हर चढ़ावा ही लिया गया, तो फिर सरकारी टोकन का क्या लाभ. टोकन की प्रक्रिया सिर्फ दिखावे के लिए है. मुलाकातियों से रकम वसूलना ही असली मकसद है. मुलाकात के दौरान दो महिलाओं का साथ होना जरूरी है और शाम होने से पहले जेल के पास से भागना पड़ता है. जेलकर्मियों के आव-भाव से सहज प्रतीत होता है कि वहां रहना महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है.
अभी सोया हूं, बाद में बात कीजिएगा : जेल अधीक्षक
जब सेंट्रल जेल में महिलाओं की पीड़ा से संबंधित मामले में पक्ष लेने का प्रयास किया गया, तो जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने कहा कि अभी वह सोए हुए हैं. बाद में बात कर लीजिएगा या वह खुद कॉल कर लेंगे. [wpse_comments_template]
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