alt="रना पर बैठे ट्रेंड एएनएम और जीएनएम" width="600" height="400" /> रना पर बैठे ट्रेंड एएनएम और जीएनएम[/caption] केस-1 : सदर अस्पताल के ट्रामा सेंटर में आयीं हजारीबाग शिवपुरी की मरीज पूनम कुमारी ने बताया कि एक घंटे से स्लाइन के लिए एएनएम हाथ की नस (वेन) ढूंढ़ती रही, लेकिन वह स्लाइन चढ़ाने के लिए उनकी हाथों की नस नहीं तलाश पायी. वह पांच बार से ज्यादा हाथ में स्लाइन चढ़ाने के लिए इंजेक्शन लगा चुकीं, लेकिन उन्हें नस नहीं मिली. ऐसे में उन्हें प्राइवेट नर्सिंग होम में जाना उचित लगा. केस-2 : आउटसोर्सिंग के तहत काम करनेवाली एक एएनएम ने बताया कि उनके पास सर्टिफिकेट है, लेकिन काम का अनुभव नहीं है. वह काम सीख रही हैं. कम पैसे में काम कर रही हैं. कंपनी ने उन्हें सदर अस्पताल में रखवा दिया है. उनके जैसे कई स्टाफ यहां काम कर रहे हैं. उनके पास भी अनुभव की कमी है. केस-3 : सिविल सर्जन कार्यालय के सामने बेमियादी धरने पर बैठीं अनुबंध पर करने वाली एएनएम-जीएनएम रेशमी तिर्की, ज्योति तिर्की, रेणु कुमारी, अनूपा कुशवाहा, सुनीता कुमारी, मंजू कुमारी, सवा फैज आदि का कहना है कि सर्टिफिकेट के अलावा पांच साल का अनुभव भी चाहिए. उनलोगों के पास ड्रेसिंग, इंजेक्शन, स्लाइन आदि का पर्याप्त अनुभव है. लेकिन आउटसोर्सिंग पर रखे गए कर्मियों को कोई अनुभव नहीं है. कंपनी ने अनुभवहीन कर्मियों को सदर अस्पताल में रखवा दिया है. इन कंपनी और कर्मियों को मरीजों की जान की कोई परवाह नहीं. यही वजह है कि छह दिनों से धरने पर मासूम बच्चों को लेकर बैठी हैं, लेकिन उन लोगों पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है. कम पैसे में ही सरकार का काम चल जा रहा है, तो उनलोगों की सेवा स्थायी क्यों की जाएगी. इसे भी पढ़ें : बिहार">https://lagatar.in/8-people-died-again-due-to-spurious-liquor-in-bihar-14-serious-6-blinded/">बिहार
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