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‘शुभम संदेश’ पड़ताल : कड़ाके की ठंड में कस्‍तूरबा की छात्राओं को बेड तक नसीब नहीं, दर्री पर गुजार रहीं रात

  • नामांकित 274 में महज 100 छात्राओं के लिए ही बेड उपलब्ध, तीन करोड़ से बना है नया भवन, नदारद है संसाधन
  • चहारदीवारी पर नहीं लगाया गया है कंटीले तार का घेरा, सुरक्षा के सवाल पर कभी भी हो सकता है बखेड़ा 
  • 35 रुपए में चार वक्त नाश्ता-खाना देने का है प्रावधान, गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल 
Pramod Upadhyay Hazaribagh : मिस्टर एजुकेशन मिनिस्टर, देखिए कैसे बदहाली में पढ़ रही हैं झारखंड की बेटियां. इस हाड़ कंपाने वाली ठंड में लोग मोटी-मोटी रजाई और कंबल में दुबके हुए रहते हैं. वहीं हजारीबाग के कटकमदाग कस्तूरबा की 174 छात्राएंं जमीन पर दर्री बिछाकर किसी तरह रात गुजार रहीं हैं. उन्हें बेड तक नसीब नहीं है. हजारीबाग स्थित कटकमदाग कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की सैकड़ों छात्राओं का हाल बेहाल है. ऐसे में ठंड की वजह से छात्राओं के बीमार पड़ने की आशंका है. जानकारी के मुताबिक कटकमसांडी से अलग होकर कटकमदाग में कस्तूरबा का तीन करोड़ का नया भवन बनाया गया है. इस भवन में संसाधन को दुरुस्‍त क‍िये ब‍िना ही आनन-फानन में स्कूल और छात्राओं को शिफ्ट करा दिया गया. यह भवन झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से भवन निर्माण विभाग ने बनाया है. यहां कुल 274 छात्राएं रहकर पढ़ती है. इनमें महज 100 छात्राओं के लिए बेड उपलब्ध कराया गया है. छात्राओं को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की बात करें, तो उसका भी बड़ा बुरा हाल है. हर छात्रा को प्रतिदिन मेन्यू के हिसाब से अंडा और फल के अलावा दो दिन पनीर, मछली, सलाद दूध और हॉर्लिक्स समेत पौष्टिक आहार देना है. लेकिन उन्हें सादा भोजन दाल-भात-सब्जी और कभी-कभार अंडा मिलता है. भोजन की मात्रा भी बहुत कम रहती है. स्कूल की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं. तीन करोड़ के नए भवन में चहारदीवारी तो करा दी गई, लेकिन कंटीले तार का बाड़ा नहीं दिया गया. ऐसे में छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं.

क्या कहती हैं वार्डेन  

कटकमदाग कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डेन नूतन सिन्हा ने बताया कि यहां 274 छात्राओं में 100 के लिए ही बेड है. विद्यालय में कोई फर्नीचर भी उपलब्ध नहीं है. इसके लिए विभाग को सूचना दी गई है. उन्होंने बताया कि स्कूल की चहारदीवारी के ऊपर तार का घेरा नहीं लगाया गया है. महिला गार्ड की भी आवश्यकता है. पुराने खर्च के अनुसार ही प्रत्येक छात्राओं को 35 रुपए में दो वक्त नाश्ता और इतने ही समय खाना देना है. ऐसे में काफी परेशानी होती है.

स्कूल आने-जाने के लिए सड़क मार्ग भी दुरुस्त नहीं

वार्डेन नूतन सिन्हा ने बताया कि खेत में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय कटकमदाग बनाया गया है. स्कूल आने-जाने के लिए सड़क मार्ग भी दुरुस्त नहीं है. यहां पक्की सड़क बनाने की जरूरत है.

राज्य से की जा रही आपूर्ति : रवि कुमार सिन्हा

झारखंड शिक्षा परियोजना के एकाउंटेंट रवि कुमार सिन्हा ने बताया कि इस बारे में राज्य शिक्षा परियोजना को पत्राचार किया गया है. कई जिलों की भांति हजारीबाग के कस्तूरबा विद्यालयों में संसाधनों की आपूर्ति शुरू कर दी गई है. कटकमदाग कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं के लिए अभी बेड नहीं है, लेकिन गद्दा उपलब्ध कराया गया है.

सदर विधायक ने विधानसभा में उठाई थी आवाज, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था

हजारीबाग के सदर विधायक मनीष जायसवाल ने कहा क‍ि उन्‍होंने कटकमदाग कस्तूरबा विद्यालय की समस्याओं को लेकर विधानसभा में सवाल उठाया था. दुर्भाग्‍य की बात है क‍ि व‍िधानसभा में सवाल उठाने के बाद भी वहां की स्थिति आज तक नहीं सुधरी.

पदाधिकारियों ने नहीं रिसीव क‍िया फोन 

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय कटकमदाग का हाल-बेहाल है. छात्राएं कई समस्‍याएं झेल रहींं हैं. इस संबंध में प्रशासन‍िक अध‍िकार‍ियों का पक्ष लेने के लिए शुभम संदेश संवाददाता ने डीसी और डीईओ को फोन लगाया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. अगर इनलोगों का पक्ष आता है तो हम उसे भी प्रमुखता से प्रकाश‍ित करेंगे. [wpse_comments_template]

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