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भू-स्वामी पचड़े में फंस जाते हैं
सरकारी दस्तावेज में जो जमीन सीएनटी और बेलगान है, उस पर सीओ के फर्जी हस्ताक्षर से एलपीसी बनाए जा रहे हैं. इतना ही नहीं तीन डिसमिल जमीन को तीन एकड़ बना दिया गया है. इसमें सीओ के फर्जी हस्ताक्षर से सादे फॉर्मेट में जमीन की मनचाही प्रकृति और रकवा बदलकर एलपीसी जारी कर दिया गया है. ऐसे में लाखों में जमीन बेचकर भू-माफिया तो निकल जाते हैं और बाद में भू-स्वामी पचड़े में फंस जाते हैं. ऐसे में उनके पैसे भी चले जाते हैं और जमीन भी अपनी नहीं हो पाती है.alt="" width="600" height="400" />
3 डिसमिल को 3 एकड़ बना दिया गया
कटकमदाग प्रखंड में एलपीसी के केस नंबर-210 का मामला सामने आया है. इसमें निर्गत एलपीसी पर जमीन का रकवा महज तीन डिसमिल है, जिसे फर्जी तरीके से तीन एकड़ बना दिया गया है. इसमें सरकारी मुहर के साथ कर्मचारी, सीआई और सीओ के फर्जी हस्ताक्षर हैं. इसे भी पढ़ें :धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-life-imprisonment-to-dholan-and-bhaskar-hajra-convicted-of-raping-a-minor/">धनबाद:नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी ढोलन व भास्कर हाजरा को उम्रकैद
क्यों जरूरी है एलपीसी
जमीन की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी से बचने के लिए एक प्रावधान बनाया है कि जिसके तहत भूमि विक्रेता को जमीन पर अपने स्वामित्व से संबंधित ब्योरा अंचल कार्यालय से निकलवाना पड़ता है ताकि यह पता चल सके कि वह जमीन सीएनटी में नहीं आती है. साथ ही रजिस्टर-2 में जमीन का डिमांड खुला हुआ है. इस बाबत एक मेल भी अचंल से रजिस्ट्री ऑफिस को किया जाता है ताकि जो एलपीसी निर्गत किया गया है, वह सही है.alt="" width="600" height="400" />

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