हजारीबाग जिले के कई पंचायत भवनों की बात ही निराली कंटीजेंसी खर्च के रूप में सरकार से मिलते हैं 15 हजार रुपए प्रति माह Pramod Upadhyay Hazaribagh: हजारीबाग के कई पंचायत भवनों की बात ही निराली है. वहां न तो सुरक्षा की व्यवस्था है और न ही इंटरनेट की. साफ-सफाई का भी बुरा हाल है. हालांकि कंटीजेंसी खर्च के रूप में सरकार से 15 हजार रुपये प्रति माह मिलते हैं लेकिन पंचायत सचिव न तो इस राशि की जानकारी वार्ड सदस्यों को देते हैं और न ही ढंग से पंचायत भवन को रखते हैं. जर्जर पंचायत भवनों की मरम्मत तक नहीं कराई जाती है. न ही सुरक्षा के नाम पर गार्ड तैनात किए जाते हैं. वहां नाइट गार्ड के रहने की व्यवस्था की गई है. सफाईकर्मियों और नाइट गार्ड के लिए सरकार की ओर से पांच हजार रुपये प्रतिमाह दिए भी जा रहे हैं. नाइट गार्ड इसलिए भी जरूरी हैं कि पंचायत भवन में कंप्यूटर समेत कई कीमती सामान हैं. पंचायतों के लिए कंटीजेंसी खर्च देने का प्रावधान मार्च से ही लागू है. यह योजना जिले के सभी 250 पंचायतों के लिए है. इसके लिए सरकार पिछले माह पंचायत सचिवों के खाते में छह माह के 90-90 हजार रुपये भेज चुकी है. ऐसे में पंचायत सचिव सुविधाएं बहाल नहीं कर खर्च करने के लिए अलग-अगल बहाने तलाश रहे हैं. इसे भी पढ़ें-बिहारः">https://lagatar.in/bihar-report-reveals-buxar-train-accident-occurred-due-to-track-fault/">बिहारः
रिपोर्ट में खुलासा, ट्रैक में गड़बड़ी की वजह से हुआ बक्सर रेल हादसा
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इन मदों में खर्च के लिए आती है राशि
बिजली बिल के लिए : 1000 रुपये साफ-सफाई एवं सुरक्षा गार्ड के लिए : 5000 रुपये इंटरनेट सेवा के लिए : 1000 रुपये पेयजल के लिए : 1000 रुपये जेनरेटर मरम्मत के लिए : 1500 रुपये स्टेशनरी के लिए : 2800 रुपये रंग रोगन एवं प्लास्टर मरम्मत के लिए : 2500 रुपये अखबार के लिए : 150 रुपयेalt="" width="600" height="400" />
राशि की नहीं दी जाती है जानकारी : नेहा कुमारी
कटकमसांडी स्थित रोमी पंचायत वार्ड नंबर-2 की सदस्य नेहा कुमारी ने बताया कि पंचायत सचिव कोई भी योजना की जानकारी नहीं देते हैं. पंचायत के लिए प्रत्येक माह मिलनेवाली राशि के बारे में उन्हें पता नहीं था. सरकारी राशि का सदुपयोग होना चाहिए.alt="" width="600" height="400" />
पंचायत भवन में इंटरनेट व पेयजल की व्यवस्था नहीं : मो. अनवर
गदोखर पंचायत के ग्रामीण मोहम्मद अनवर ने बताया कि पंचायत भवन में सुविधा तो है, कुर्सी-टेबल तो है, पर देखरेख के लिए न कोई नाइट गार्ड है और न ही कोई सफाईकर्मी है. ऐसे में उन लोगों को यह भी जानकारी नहीं है कि सरकार से 15,000 रुपये कंटीजेंसी खर्च मिल रहे हैं. अगर सफाईकर्मी और नाइटगार्ड गांव के लोगों को ही रखा जाए, तो यहां के लोगों को रोजगार भी मिल जाएगा. इसे भी पढ़ें-बिहारः">https://lagatar.in/bihar-report-reveals-buxar-train-accident-occurred-due-to-track-fault/">बिहारःरिपोर्ट में खुलासा, ट्रैक में गड़बड़ी की वजह से हुआ बक्सर रेल हादसा
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