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‘शुभम संदेश’ पड़ताल : शिक्षा माफियाओं के हैं कई रूप, पैसे लेकर हो जाते हैं चुप

Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग शहर में इन दिनों शिक्षा माफियाओं के अलग-अलग रूप देखे जा रहे हैं. कोई कोचिंग खोलकर इंटर के सर्टिफिकेट बेचने का कंसल्टेंसी चला रहा है, तो कोई बीआईटी मेसरा में बच्चों का नामांकन और युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की ठगी कर रहा है. छह माह के बाद भी जब बच्चों का नामांकन नहीं हो पाया और युवाओं को नौकरी नहीं मिली, तो ठगी के शिकार हुए चेहरे सामने आने लगे. इनमें एक कोचिंग संस्थान के वैसे संचालक रविशंकर भी हैं, जो पहले हजारीबाग के झिंझरिया पुल के निकट बच्चों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कराते थे. बाद में रीयल स्टेट का कारोबार करने लगे और फिर बच्चों का एडमिशन बड़े-बड़े संस्थानों में कराने और युवाओं को नौकरी का सब्जबाग दिखाने लगे. ऐसे शिक्षा माफियाओं का तार झारखंड की राजधानी रांची से लेकर दिल्ली, मुंबई समेत देश के विभिन्न महानगरों से जुड़े होने की बात बताई जा रही है. इस कोचिंग के संचालक ने इचाक स्थित तिलरा के एक अभिभावक समेत चार लोगों से लाखों की ठगी की है. विरोध करने पर संचालक ने फर्जी चेक की भरमार लगा दी. जब ठगी के शिकार हुए लोग चेक भंजाने बैंक गए, तो बाउंस हो गया. पहले से ही चेक को क्लोज कर दिया गया था, अर्थात उसके खाते में एक भी पैसे नहीं थे. इतना ही नहीं कोचिंग के संचालक अपनी धमक और पहुंच दिखाने के लिए राज्य के मंत्रियों को अपना भैया-चाचा कहते हैं.

इन संस्थानों में नौकरी का दिखाते हैं सब्जबाग

कोचिंग के संचालक सिविल कोर्ट, पशुपालन विभाग, बैंक में डाटा इंट्री, अस्पताल में एकाउंटेंट, कस्तूरबा बालिका विद्यालय में लेखापाल, थाने में गार्ड, नाई, धोबी, रसोइया और पानी भरनेवाले के पद पर नौकरी दिलाने का सब्जबाग दिखाते हैं. बदले में 25 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक की ठगी करते हैं. पैसे लेन-देन का काम दूसरे के खाते से करते हैं, ताकि खुद न फंसे. केस-1 : बरही के हजारी धमना निवासी लखन सिंह से कोचिंग संचालक ने गौरियाकर्मा कृषि अनुसंधान केंद्र में नौकरी दिलाने के नाम पर 25000 रुपए की ठगी की. छह माह के बाद भी उसने पैसे वापस नहीं किए. अब फोन भी उठाना मुनासिब नहीं समझ रहे. केस-2 : बरही के ही हजारी धमना निवासी राम मीत से भी गौरियाकर्मा कृषि अनुसंधान केंद्र में नौकरी दिलाने के नाम पर कोचिंग संचालक ने 25000 रुपए की ठगी की. केस-3 : हजारी धमना के ही वीरेंद्र और प्रह्लाद सिंह से भी गौरियाकर्मा कृषि अनुसंधान केंद्र में ही नौकरी के नाम पर 25-25 हजार रुपए की ठगी की गई. केस-4 : इचाक निवासी पी. उपाध्याय से भी ढाई लाख रुपए की ठगी की गई. उनके बेटे को बीआईटी मेसरा में नामांकन और उन्हें पशुपालन विभाग व बेटी को अस्पताल में एकाउंटेंट के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया. छह माह गुजर गए, लेकिन मामला जस का तस रहा. जब दोनों में झड़प हुई, तो उपाध्याय को अलग-अलग बैंकों के ढाई लाख के तीन फर्जी चेक थमा दिए गए. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/rashid-1_20.jpg"

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जल्द नौकरी दिलाने की संचालक देते हैं सफाई

इस संबंध में कोचिंग संचालक रविशंकर से पूछे जाने पर उन्होंने स्वीकार किया कि पैसे लिए हैं. सभी लोगों की नौकरी हो चुकी है, सिर्फ आठ लोगों का मामला फंसा हुआ है. किसी कारणवश उनकी नौकरी नहीं लग पायी है. उन्हें नौकरी दिलाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह भी बात सच है कि कई मंत्रियों के साथ उनका भाई-चाचा जैसा संबंध है. चेक के पैसे भी जल्द वापस कर दिया जाएगा. [wpse_comments_template]

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