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पेयजल विभाग : 480 करोड़ खर्च, लाभ जीरो

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  • पेयजल विभाग : 20 वृहद ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं अधर में लटकीं
  • 213 गांवों में नहीं पहुंचा नल का जल
Amit Singh  Ranchi :  पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के इंजीनियर नई वृहद ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के डीपीआर और टेंडर को लेकर परेशान हैं. दूसरी तरफ 385.53 करोड़ रुपए की वृहद जलापूर्ति योजनाएं वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं. देवघर के सारठ प्रखंड में 11 वृहद जलापूर्ति योजनाएं उद्घाटन के बाद बंद हो गयीं. इन योजनाओं से 145 गांवों में जलापूर्ति नहीं हो पा रही है. जबकि इन पर 95 करोड़ खर्च हुए हैं. यानी प्रदेशभर में 480 करोड़ (385 95) खर्च हेने के बाद 20 वृहद जलापूर्ति योजनाओं से ग्रामीणों को नल से पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है. इसमें से ज्यादातर योजनाएं देवघर के तत्कालीन अधिक्षण अभियंता रघुनंदन शर्मा के कार्यकाल में शुरू हुई थीं.

अबतक 538 वृहद जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण, 289 का निर्माण कार्य जारी

पेयजल विभाग ने अबतक 538 वृहद जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण कराया है. वहीं 289 वृहद जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण कार्य जारी है. वहीं 96 नये वृहद ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को लेकर वर्ष 2023 में काम शुरू हुआ है. वृहद ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं से 500 से ज्यादा गांवों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य है. 2024 तक राज्य के कुल 59,23,320 ग्रामीण परिवारों को चरणबद्ध तरीके से एफएचटीसी प्रदान करना है. 9,96,485 ग्रामीण परिवारों में कार्यरत नल के जल का संयोजन किया जा चुका है. 34,20,204 परिवारों में एफएचटीसी के लिए योजनाओं का अनुमोदन कर दिये गये हैं.

160 के बजाये मात्र 17 गांव तक पहुंचा पानी

11 करोड़ की लागत से 19 गांवों के लिए माथाटांड जलपूर्ति योजना, 10 करोड़ की लगत से 19 गांवों के लिए बारा जलापूर्ति योजना, 9 करोड़ की लागत से 16 गांवों के लिए पडुवा जलापूर्ति योजन, 10 करोड़ की लागत से 10 गांवों के लिए आसनबनी जलपूर्ति योजना, 10 करोड़ की लागत से 26 गांवों के लिए बस्की जलापूर्ति योजना और 8 करोड़ की लागत से 15 गांवों के लिए सालतर जलापूर्ति योजना को लेकर काम शुरू हुआ. इन जलापूर्ति योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन हुआ, मगर 160 गांवों में से सिर्फ 17 गांव में ही जलापूर्ति शुरू हो पाई है.

वर्षों से लंबित जलापूर्ति योजनाएं

केस 1
29 फरवरी 2016 में बलियापुर प्रखंड के 68 गांवों में जलापूर्ति के लिए 74.53 करोड़ की वृहद जलापूर्ति योजना शुरू हुई थी. 3 फरवरी 2018 तक योजना को पूरा करने का लक्ष्य था. अभी तक कार्य पूरा नहीं हुआ है. फेज वन में 41 गांवों के लोगों को पानी देना था, अभी 13 गांवों में सप्लाई का पानी दिया जा रहा है.
केस 2
2015 में 235 करोड़ की बागबेड़ा वृहद जलापूर्ति योजना का काम शुरू हुआ. योजना से बागबेड़ा, घाघीडीह, कीताडीह आसपास के डेढ़ लाख लोगों को पानी देने का लक्ष्य है. योजना 2018 में ही पूरा होना था. फिर 2022 में इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, लेकिन दो साल से काम अधर में लटका हुआ है. अब 2024 में इसे पूरा करने की बात कही जा रही है.
केस 3
वर्ष 2012 में जामताड़ा वृहद जलापूर्ति योजना का डीपीआर 23.44 करोड़ का बना. 2014 में निर्माण कार्य शुरू हुआ. अबतक निर्माण कार्य में 18 करोड़ खर्च हो चुके है. मगर पाईप बिछाने का काम अभी चल ही रहा है. इस योजनाओं को 2016 में ही पूर्ण हो जाना था.
केस 4
विश्रामपुर प्रखंड के लालगढ़ गांव में वृहद ग्रामीण पेयजापूर्ति योजना 1.25 करोड़ खर्च हो गया है. नवंबर 2007 में शिलान्यास हुआ था. इसी प्रकार 50 करोड़ की लागत से बरवाडीह वृहद जलापूर्ति योजना का काम शुरू हुआ था. मगर इन योजनाओं से शतप्रतिशत जलपूर्ति शुरू नहीं हो सकी.
केस 5
सरायकेला जिला के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में 395 करोड़ की वृहद शहरी जलापूर्ति योजना का काम दिसंबर 2018 में शुरू हुआ. योजना से 49,335 घरों को तक पीने का पानी देने का लक्ष्य है. 2021 में योजना पूरी होनी थी, लेकिन चार साल पूरे हो जाने के बाद भी कार्य पूरा नहीं हो सका है.

सारठ प्रखंड में 10 योजनाएं, उद्घाटन के बाद ठप

योजना लागत उद्घाटन वर्तमान स्थिति लाभान्वित गांव
पडुबा जलापूर्ति 09 करोड़ 30.7.2020 दो वर्ष से बंद 16 गांव
आसनबनी जलापूर्ति 10 करोड़ 25.5.2020 दो माह से बंद 10 गांव
माथाटांड जलापूर्ति 11 करोड़ 29.12.2021 कई माह से बंद 19 गांव  
बारा जलापूर्ति 10 करोड़ 30.09.2020 सात माह से बंद 19 गांव
पत्थरड्हा जलापूर्ति 08 करोड़ 27.10.2019 योजना पूरी तरह बंद 14 गांव  
सालतर जलापूर्ति 07 करोड़ 2020 दो साल से बंद 15 गांव
बभनगामा जलापूर्ति 06 करोड़ 2014 तीन साल से बंद 13 गांव
सारठ जलापूर्ति 01 करोड़ 2008 तीन वर्ष से बंद एक गांव

सिर्फ सारठ प्रखंड में 90 करोड़ की 11 योजनाएं ठप

सारठ प्रखंड में 160 गांवों में जल से जल पहुंचने को लेकर शुरू कई जलापूर्ति योजनाएं दम तोड़ रही हैं. शिलान्यास के बाद कई योजनाओं का काम तक नहीं हुआ है. चितरा जलापूर्ति योजना में 12 वर्षों से काम पूरा नहीं हो पाया है. 16 गांवों में अजय बराज पर आधारित 11 करोड़ की लागत से चितरा जलापूर्ति योजना का शिलान्यास किया गया. छह करोड़ की लागत से बभनगामा जलापूर्ति योजना शुरू हुई, इससे 13 गांवों में जलापूर्ति होनी थी, यह बंद है. 2015 में 8 करोड़ की लागत से 14 गांवों के लिए पत्थरगड्डा जलापूर्ति योजना शुरू हुई, यह भी ठप पड़ी हुई है.  
मिथलेश ठाकुर, मंत्री, पेयजल विभाग - पेयजलापूर्ति योजनाओं में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है. योजनाओं में विलंब करने वाले अफसर व एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है. योजनाओं के विलंब होने कारणों का पता लगाया जा रहा है. कोई परेशानी आ रही है, तो उसे दूर किया जा रहा है. गर्मी से पहले कई योजनाओं से जलापूर्ति शुरू हो जाएगी. आम लोगों को पीने का शुद्ध पानी मिले, यह सरकार की प्राथमिकता है.
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