Search

 
 
 

एनटीपीसी के खनन का दुष्प्रभाव : बिरहोर किरणी के बाद बिरहोर बहादुर की मौत

 
  • विरोध में उतरे बिरहोर, कोयला खनन और ट्रांसपोर्टिंग घंटों ठप रखा
  • मौत का जिम्मेवार आउटसोर्सिंग एजेंसी ऋत्विक और एनटीपीसी प्रबंधन को बताया
Praveen Kumar/ Pramod Upadhyay Hazaribagh/Ranchi : एनटीपीसी के एमडीओ ऋत्विक-एएमआर द्वारा चट्टी बरियातू में कोयला खनन का काम किया जा रहा है. खदान से महज कुछ मीटर की दूरी पर आदिम जनजाति बिरहोर कॉलोनी है. यहां खनन के दुष्प्रभाव का असर दिख रहा है. बुधवार की अहले सुबह बीमार 36 वर्षीय बहादुर बिरहोर की मौत हो गई. इससे पहले बीते 28 फरवरी को नाबालिग किरणी बिरहोर की मौत हो गई थी. किरणी की मौत के बाद एनटीपीसी और जिला प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठे थे.

गुस्साये ग्रामीणों ने कोल माइंस का काम कराया बंद

बहादुर बिरहोर की मौत से गुस्साये बिरहोरों ने चट्टी बरियातू कोल माइंस का काम सुबह छह बजे से दोपहर एक बजे दिन तक पूरी तरह से ठप करा दिया. कोयला खनन और ढुलाई ठप था. बिरहोर अपने समुदाय के युवा बेटे की मौत के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी ऋत्विक और एनटीपीसी प्रबंधन को जिम्मेवार बताते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे थे. साथ ही जिम्मेवारों से उचित मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे थे. मृतक के परिजनों का आरोप है उनकी बिरहोर कॉलोनी के पास ही खदान में कोयला खनन के लिए ब्लास्टिंग होती है, जिससे प्रदूषण फैल रहा है. प्रदूषण के कारण 36 साल के बहादुर बिरहोर की मौत हुई है. इस बीच एक्टिविस्ट मंटू सोनी ने बहादुर बिरहोर की मौत पर हजारीबाग डीसी को ट्वीट कर मानवाधिकार आयोग, वन मंत्रालय, जनजातीय मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय और झारखंड के राज्यपाल को टैग करते हुए उसके शव का पोस्टमार्टम करने और दोषियों पर कार्रवाई करने का मांग की है.

बहादुर बिरहोर से पहले किरणी बिरहोर की हो चुकी है मौत

आदिम जनजाति बिरहोर कॉलोनी निवासी बहादुर बिरहोर की मौत से पहले बीते 28 फरवरी को चट्टी बरियातू कोल माइंस क्षेत्र के पास पगार स्थित बिरहोर कॉलोनी निवासी किरणी बिरहोर की मौत संदेहास्पद परिस्थिति में हो चुकी है. किरणी बिरहोर की मौत के डेढ़ माह के बाद ही बहादुर बिरहोर की मौत हो गई. किरणी बिरहोर की मौत के बाद जांच के लिए जिला प्रशासन हरकत में आया था. मामले की जांच भी हुई, लेकिन रिपोर्ट का कुछ पता नहीं चला.

बिरहोर की मौत, जिला प्रशासन पर उठ रहे सवाल

चट्टी बरियातू कोल माइंस क्षेत्र के पास रह रहे बिरहोर समुदाय के लोगों की मौत पर समाज का एक बड़ा वर्ग और कई सामाजिक संगठन सवाल उठा रहे हैं. एनटीपीसी के चट्टी बरियातू कोल माइंस को खुले दो वर्ष बीतने को है, पर आज तक बिरहोरों को माइंस क्षेत्र से अलग जगह पर बसाने की सार्थक पहल क्यों नहीं की जा रही है. परियोजना से प्रभावित आदिम जनजाति की बस्ती को खनन पूर्व दूसरी जगह बसाना था, लेकिन कोयला मंत्रालय को समय से खनन कार्य शुरू कराने की हड़बड़ी में जिला प्रशासन के सहयोग से खनन तो चालू कर दिया गया, लेकिन बिरहोर बस्ती के लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया. एक्टिविस्ट मंटू सोनी ने पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार से लेकर भारत सरकार तक को पत्र लिखकर मामले की जांच करा कर कार्रवाई की मांग की है. कहा है कि बिरहोर बस्ती को बिना बसाये खनन चालू करने का जिम्मेवार कौन है. लुप्त हो रही बिरहोर जनजाति के लोगों की मौत के जिम्मेदार लोगों को चिह्नित कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. इसे भी पढ़ें : हजारीबाग">https://lagatar.in/hazaribagh-birhor-youth-dies-protest-with-dead-body/">हजारीबाग

: बिरहोर युवक की मौत, शव के साथ प्रदर्शन
[wpse_comments_template]
Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही