NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट ने छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में आज सोमवार तो एक अहम टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकारें कानून के तहत छात्रों के खिलाफ FIR वापस ले सकती हैं.
इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR के संदर्भ में अपने पूर्व के आदेश को स्पष्ट किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें कानून के अनुसार छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को बंद (Close) या वापस (Withdraw) लेने के लिए स्वतंत्र हैं.
अदालत ने यह बात भी साफ की कि उसके पिछले आदेश में इस्तेमाल क्रिमिनल एंटीसिडेंट्स (Criminal Antecedents)शब्द का अर्थ गंभीर और जघन्य अपराध (Grave and Heinous Offences) है.
अदालत ने कहा कि हत्या, बलात्कार, आतंकवाद सहित अन्य गंभीर अपराधों के आरोपियों को इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्य या छोटे-मोटे मामलों में आरोपी छात्र इस श्रेणी में नहीं आयेंगे.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर न करने के वादे पर गंभीर है.
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