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सिमडेगा : राशन की कालाबाजारी पर रोक लगाने की गुहार लगाने वाले ग्रामीणों के उपर ही कर दिया केस

Simdega : सिमडेगा के कोचेडेगा गांव के ग्रामीणों को डीलर की कालाबाजारी का पर्दाफाश करना महंगा पड़ गया. सीओ ने 10 ग्रामीणों पर ही एफआईआर करा दिया. मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 3 ग्रामीणों को गिरफ्तार भी कर लिया गया. इसके खिलाफ ग्रामीण गोलबंद हो गए है. अब ग्रामीणों ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में एक पिटीशन दाखिल किया है. इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फैक्ट फाइंडिंग किया. टीम में ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट तारामणि साहू, डॉक्टर एंटोनी, एडवोकेट शिव प्रसाद सिंह, भुनेश्वर केवट, नंदिता भट्टाचार्य, सुनीत लकड़ा शामिल थी. टीम ने माले राज्य कार्यालय में प्रेसवार्ता कर रिपोर्ट साझा किया है.

कालाबाजारी के चावल के साथ युवकों को पकड़ा, प्रशासन ने उल्टा फंसाया 

ग्रामीणों का आरोप है 9 मार्च को सिमडेगा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कोचेढ़ेगा गांव में मुखिया शिशीर टोप्पो के प्रतिनिधि और भाई पंकज टोप्पो ने जीतराम प्रधान और रोबिन बगवार को डीलर के पास से 40 किलो चावल की बोरी ले जाते हुए पकड़ा था. पूछने पर दोनों लड़कों ने बताया कि यह चावल उन्होंने हजार रुपए में डीलर से खरीदा है, जबकि राशन वितरण प्रणाली के डीलर ने 3 महीने से कुछ कार्डधारियों को राशन नहीं दिया है और बिना राशन दिए ही रसीद में गांव वालों का अंगूठा भी ले लिया है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे 10-15 दिन पहले भी मुखिया प्रतिनिधि ने विधु मियां के राशन दुकान के सामने एक ट्रैक्टर देखा था, जिसमें राशन का चावल था, मगर उस दिन उसे पकड़ा नहीं जा सका. 9 मार्च को जब दो युवक चावल के साथ पकड़े गए तब डीलर ने पकंज टोप्पो के पास आकर माफी मांगी. मगर गांववाले नहीं माने और उसे प्रशासन को सौंपने की बात कही. मुखिया ने मुफ्फसिल के बड़े बाबू को फोन किया. थाना से छोटा बाबू अपने साथ कुछ पुलिसकर्मियों को लेकर वहां पहुंचे और उन्हें लिखित आवेदन देने के लिए कहा. इसके बाद मुखिया ने खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी पूनम कश्यप, सीओ प्रताप मिंज को फोन किया. सीओ ने एमो से बात करने को कहा. एमो ने सुबह आकर मामले को देखने की बात कही.

रात में ही बदल गया पूरा खेल 

ग्रामीणों का आरोप है कि रात के करीब 9:15 बजे के आसपास सीओ प्रताप मिंज, एडीएम पंकज कुमार भगत, मुफ्फसिल थाना प्रभारी देवदास और सिमडेगा थाना प्रभारी राधा रवि प्रकाश रजक तीन गाड़ी फोर्स लेकर गांव में पहुंचे. ग्रामीणों का आरोप है कि एडीएम नशे में धुत थे. सीओ प्रताप मिंज ने मुखिया पर ही डीलर को फंसाने की साजिश रचने का आरोप लगा दिया. एडीएम ने मुखिया को अपराधी करार दे दिया. इसके बाद ग्रामीण नाराज हो गए. ग्रामीणों ने प्रशासन पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया. एडीएम पर ग्रामीणों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया. ग्रामीणों का कहना है कि सीओ-एडीएम ने धमकाया. उनलोगों के पास पदाधिकारियों की करतूत का वीडियो भी है. साजिश के तहत एडीएम को गायब बताया. फिर ग्रामीणों पर उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाकर मामला दर्ज करा दिया गया. ग्रामीणों ने पदाधिकारियों पर डीलर लेतारेस टोप्पो से सांठगांठ कर ग्रामीणों को फंसाने का आरोप लगाया है.

रातभर के हंगामे के बाद 10 मार्च को सीओ ने ग्रामीणों पर कराया था एफआईआर

ग्रामीणों का कहना है कि 9 मार्च की पूरी रात हंगामा हुआ. प्रशासन ने ग्रामीणों को परेशान किया और एडीएम के गायब होने का आरोप लगाया. 10 मार्च को सीओ ने 10 ग्रामीणों के ऊपर एफआईआर करा दिया. जिसमें मुखिया के बड़े भाई, मुखिया के पिता और कुछ ग्रामीणों का नाम शामिल है.

ग्रामीणों के आवेदन पर नहीं दर्ज किया गया मामला 

ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी एक न सुनी गई. कालाबाजारी का पर्दाफाश करने पर उनके उपर ही एफआईआर करा दिया. ग्रामीणों की शिकायत पर एफआईआर नहीं किया गया. उनके आवेदन की रिसीविंग भी नहीं दी गई. महिलाओं ने सीओ के खिलाफ महिला थाना में अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आवेदन दिया, केवल उसकी ही एक रिसीविंग दी गई. वहीं 20 और 22 मार्च के के बीच 3 ग्रामीणों बिलोकन खेस, अरुण अभय एक्का और अरनेस लकड़ा को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया.

सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम से नहीं मिलीं डीसी 

गांव वालों से बातचीत करने के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी पूनम कच्छप, सीओ पंकज मिंज, एसडीओ महेंद्र कुमार, डीसी और एसपी से मिलने के लिए पहुंचे. सीओ और खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी से मुलाकात हुई, मगर डीसी ने मिलने से इंकार कर दिया. इसे भी पढ़ें :  101">https://lagatar.in/rs-101-crore-scam-accused-sanjay-tiwari-reached-rims-on-march-25-pictures-captured-in-cctv/">101

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