Ranchi News: हिंदी दिवस के अवसर पर कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से एटीआई सभागार में व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विभागीय सचिव प्रवीण टोप्पो ने कहा कि सुशासन की पहचान सरल हिंदी, आसान प्रक्रियाओं और पारदर्शी व्यवस्था से होती है. सरकारी भाषा जितनी सरल होगी, आम लोगों के लिए योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेना उतना ही आसान होगा.
उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक कठिन शब्दों और जटिल प्रक्रियाओं को कम करने की जरूरत है. अधिकारियों और कर्मचारियों को जनहित को प्राथमिकता देते हुए सरल भाषा और स्पष्ट कार्यशैली अपनानी चाहिए. तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है. ऑनलाइन सेवाओं, समयबद्ध निस्तारण और शिकायतों की निगरानी से व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाया जा सकता है.
कार्यक्रम में हिंदी के प्रख्यात कवियों और विद्वानों ने अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से हिंदी की समृद्धि, संवेदनशीलता और व्यापकता पर प्रकाश डाला. वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि जनसरोकार और सांस्कृतिक एकता का सशक्त माध्यम है. लोकभाषाओं और बोलियों ने हिंदी को लगातार समृद्ध किया है.
काव्य पाठ में सामाजिक सरोकार, राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन विषयों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत की गईं. श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं की सराहना की. वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और आज भी यह देश को जोड़ने का काम कर रही है.
कार्यक्रम में डॉ. जिंदर सिंह मुंडा, डॉ. केदार सिंह, डॉ. वंदना टेटे, डॉ. सावित्री बड़ाईक, डॉ. कुमारी उर्वशी सहित कई विद्वान मौजूद रहे. स्वागत संबोधन उप सचिव संजय रजक ने किया. संयुक्त निदेशक आसिफ हसन, इश्तियाक अहमद, एटीआई की शालिनी खलखो और अपर निदेशक सीमा सिंह भी उपस्थित रहीं. समारोह का समापन हिंदी के प्रचार-प्रसार और संवर्धन के संकल्प के साथ हुआ.
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