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SIR  :  सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने कहा, हमारे पास नागरिकता सत्यापित करने का अधिकार

New Delhi : स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आज मंगलवार को उत्तर प्रदेश से संबंधित SIR का मामला सुना.

 

यूपी SIR मामले में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता शमशाद ने कोर्ट को जानकारी दी कि 100 याचिकाकर्ता हैं. सभी ग्रामीण इलाकों के निवासी हैं. कहा कि अदालत की फीस लगभग 50 हजार रुपये है. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण शुल्क को लेकर हमलोग आवेदन दाखिल किये हैं. याचिकाएं नागरिकता को लेकर दायर की गयी हैं.  शुल्क को लेकर CJI सूर्यकांत ने संक्षिप्त टिप्पणी की.  कहा कि  इस मामले में किसी विशेष निर्देश की आवश्यकता नहीं है. 

 

केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी पेश हुए. उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट) की धारा 146(C) में सुनवाई और निर्णय की प्रक्रिया पहले से तय है.

 

चुनाव और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में यह जिम्मेदारी चुनाव आयोग के पास है कि उसे सत्यापित करना है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका यह अर्थ कतई नहीं लगाया जाये कि चुनाव आयोग के किसी निर्णय से व्यक्ति की स्वतः नागरिकता चली जायेगी.

 

राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि किसी व्यक्ति की नागरिकता का सवाल उठेगा,  तो उसे केंद्र सरकार के पास जांच के लिए भेजा जायेगा.  कहा कि चुनाव आयोग का फैसला केवल मतदाता सूची से संबंधित होगा. किसी को देश से बाहर करने का नहीं.  

 

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले कल सोमवार को पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को चुनौती देने वाली  TMC सांसदों की याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया.  

 

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने एक सप्ताह मे जवाब मांगा.  याचिकाएं टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन ने दाखिल की है.

 

डेरेक ओ'ब्रायन के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि  पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित निर्देश व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए जारी किये जा रहे हैं.  बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के कार्रवाई कर रहे हैं.

 

इस पर  चुनाव आयोग के  वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने एक सप्ताह का समय आयोग को दिया. 

 

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