Lagatar Desk : बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त मुख्य चुनाव आयोग ने यह दावा किया था कि लाखों की संख्या में विदेशी नागरिक की पहचान हो रही है. बांग्लादेशी नागरिक मिल रहे हैं. लेकिन गुरुवार को हिंदुस्तान टाईम्स में हिमांशु दहिया की एक रिपोर्ट बताती है कि छह राज्यों में सिर्फ 1600 संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान हो सकी है. इनमें अधिकांश नेपाल के रहने वाले हैं.
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वी अनबुकुमार ने बताया है कि बेंगलुरू नॉर्थ में 545 नेपाली नागरिकों की पहचान हुई है. दक्षिण कन्नड़, उत्तर कन्नड़ और उड्डपी में भी नेपाल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के नागरिक मिले हैं.

हिंदुस्तान टाईम्स में हिमांशु दहिया की रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में 418 संदिग्ध विदेशी मिले हैं, जिनके पास विदेशी पासपोर्ट है. केरल में 500 ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनके नाम मतदाता सूची में थे और वह विदेशी निगरिक हैं. इसी तरह झारखंड में तीन अफगानिस्तान के नागरिक मिले हैं. जबकि मेघालय में नेपाली मूल के दो नागरिक मिले हैं. दोनों ने भारतीय महिलाओं से शादी कर ली है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 11 राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से बात करने पर यह पता चला है कि पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और तेलंगाना में संदिग्ध विदेशियों का कोई अलग से डाटा नहीं रखा गया है. ओड़िशा और मिजोरम में कोई संदिग्ध विदेशी नहीं मिले हैं.
रिपोर्ट में चुनाव आयोग का भी पक्ष लिया गया है. जिसमें चुनाव आयोग ने कहा है कि उसने राज्यों से संदिग्ध विदेशी नागरिकों का अलग से डेटा इकट्ठा करने के लिए नहीं कहा था. ऐसे में भाजपा नेताओं का वो सार्वजनिक बयान भी सवालों के घेरे में आ जाता है, जिसमें यह कहा जाता रहा है कि एसआईआर की वजह से विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें बाहर किया जा रहा है.