- सरना स्थल में सौंदर्यीकरण के विरोध में दिन भर डटे रहे ग्रामीण और आदिवासी
विरोध करने वालों ने की आपात बैठक
इस बीच सौंदर्यीकरण का विरोध करने वाले लोगों की आपात बैठक सरना स्थल में हुई. डॉ अरविंद हंस ने कहा कि किसी भी हाल में सौंदर्यीकरण के नाम पर सरना स्थल में भवन नहीं बनने देंगे. सीएनटी अधिनियम की धारा 76 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है. यह स्थल आदिवासियों का आस्था से जुड़ा है. भवन बनने से हमारी संस्कृति, हमारी भाषा, हमारी पहचान खत्म हो जाएगी. आधी जमीन फ्लाईओवर में जा रही है. दूसरी ओर पांच मंजिला भवन बनने से सरना स्थल काफी छोटा हो जाएगा. लोगों ने कहा कि यह भवन पार्षद ऑफिस वाली खाली जमीन में बने. ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना पास कराने से पहले गांववासी, गांव के पाहन के वंशजों की स्वीकृति नहीं ली गई. ग्राम प्रणाली को अनदेखा कर बिना अधिकार सरना स्थल में यह प्रस्ताव पारित किया गया. बाहरी लोगों द्वारा प्रशासन को गुमराह करते हुए परियोजना को प्रस्तावित किया गया है.सिरम टोली सरना स्थल केंद्रीय सरना समिति के अधीन नहीं
बैठक में आए लोगों ने कहा कि सिरम टोली सरना स्थल केंद्रीय सरना समिति के अधीन नहीं है और न ही इसकी कोई शाखा है. इसका एक स्वतंत्र स्वरूप है. यहां ग्रामवासी और ग्राम पाहन पुरानी रूढ़िवादी रीति-रिवाज के अनुसार पूजा -अर्चना करते हैं. यह सरना स्थल उन्हीं के अधिकार में शुरू से रहा है. ग्रामवासियों को बिना सूचित किए, बिना किसी परामर्श लिए, ग्रामसभा प्रणाली को अनदेखा कर मनमाने ढंग से निर्माण हेतु सौंदर्यीकरण परियोजना पारित की गयी है, जो अवैध है. गैरकानूनी है. यहां के ग्राम वासियों को यह मान्य नहीं है. मौके पर डॉ अरविंद हंस, एंजॉय हंस, पाहन जगलााल एतवा मुंडा ,सुशीला कच्छप, मनीष पाहन, जमैय हंस, मंजु हंस, सिखा बाड़ा, आकाश उरांव, मैनी कच्छप, पवन तिर्की, रौशन तिर्की, जगलाल पाहन समेत विभिन्न आदिवासी संगठनों के सैकड़ों लोग उपस्थित थे.अड़ंगा लगाना आदिवासी और समाज हित में नहीं- अजय तिर्की
केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि यह सरना स्थल केवल रांची नहीं बल्कि पूरे झारखंड के आदिवासियों की आस्था से जुड़ा है. जब मुख्यमंत्री ने इसका शिलान्यास किया, तो कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए इसमें विवाद पैदा करने की कोशिश की. विवाद शुरू होने के बाद जिला प्रशासन ने सरना स्थल में ही ग्राम सभा सह आम सहमति बनाने को लेकर बैठक की. जिसमें 95 प्रतिशत से अधिक लोगों ने इसके सौंदर्यीकरण के पक्ष में खड़े हुए. बैठक की कार्यवाही प्रशासन के पास है. यही कारण है कि रांची जिला प्रशासन ने इसके निर्माण को लेकर अपना कदम आगे बढ़ाया. केवल रांची की बात करें तो कुछ आदिवासी संगठन और आदिवासी अगुवा को छोड़कर सभी लोग इसके पक्ष में हैं. कहीं से भी आदिवासी परंपरा और रीति-रिवाज के खिलाफ इसका सौंदर्यीकरण नहीं होगा. इसके बावजूद इस तरह का अड़ंगा लगाना आदिवासी और समाज हित में नहीं है. इसे भी पढ़ें – जमीन">https://lagatar.in/land-scam-ed-freezes-50-bank-accounts-10-lakh-recovered-from-shekhars-house/">जमीनघोटालाः ED ने 50 बैंक खातों को किया फ्रीज, शेखर के घर से मिले 10 लाख [wpse_comments_template]

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