Ranchi: झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी के तत्कालीन निदेशक संजीव बेसरा ने फर्जी बैंक गारंटी देने वाली चार कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया. इसके तहत चारों कंपनियों 8-8-2026 तक काली सूची में रहना था. लेकिन संजीव बेसरा के बाद मिशन निदेशक बने शैलेंद्र लाल ने दो महीने बाद 14-10-2025 को आदेश जारी कर फर्जी बैंक गारंटी देने वाली कंपनियों को काली सूची से बाहर निकाल दिया.
शराब घोटाला में फर्जी बैंक गारंटी के मामले में सचिव के जेल भेजे जाने के बाद शैलेंद्र लाल ने एक अनोखा आदेश पारित किया. उन्होंने 25-8-2025 को आदेश जारी किया. इसमें यह कहा गया फर्जी बैंक गारंटी देने वाली चारों कंपनियों के 8-8-2026 तक काली सूची में माना जायेगा.
झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी (JSDMS) द्वारा ट्रेनिंग के लिए निकाले गये टेंडर में चार कंपनियां सफल घोषित हुई. इसमें M/S Gimit E services.(नई दिल्ली) 2-M/S Jan Jyoti educational and charitable trust( गोला रोड, रामगढ़). 3-M/S Mahalwala international educare services LLP (एमपी नगर, भोपाल). 4-Shambhavi consultant (कचनार टोली हटिया).
टेंडर को निपटाने के बाद Shambhavi consultant को गुमला,गिरिडीह और साहिबगंज के 12 केंद्रों पर ट्रेनिंग का काम सौंपा गया. Gimit को बोकारो और चतरा में ट्रेनिंग का काम सौंपा गया. Jan Jyoti को रामगढ़ और पाकुड़ में ट्रेनिंग का काम सौंपा गया. Mahalwala को पलामू और खूंटी में ट्रेनिंग का काम सौंपा गया.
इन चारों कंपनियों को ट्रेनिंग का काम शुरू करने से पहले बैंक गारंटी जमा करना था. कंपनियों द्वारा बैंक गारंटी जमा करने के बाद ही उन्हें ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने की अनुमति देने का नियम है. बैंक गारंटी लेने के बाद ट्रेनिंग की अनुमति देने की जिम्मेवारी स्किल डेवलपमेंट में प्रोग्राम और ऑपरेशन के पद पर कार्यरत विश्वरूप ठाकुर की थी. लेकिन उन्होंने चारों कंपनियों को बैंक गारंटी जमा किये बिना ही ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दे दी.
कंपनियों ने ट्रेनिंग शुरू करने के बाद बैंक गारंटी जमा किया. सिर्फ इतना ही नहीं सोसाइटी में वित्त प्रबंधक के पद पर कार्यरत विश्वरूप ठाकुर ने बैंक गारंटी की जांच किये बिना ही चारों कंपनियों को भुगतान देन की प्रक्रिया शुरू कर दी. राजन और विश्वरूप दोनों ही स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी में संविदा पर कार्यरत हैं.
बैंक गारंटी की बिना जांच भुगतान का मामला प्रकाश में आने के बाद चारों कंपनियों द्वारा जमा करायी गयी बैंक गारंटी की जांच की गयी. इसमें चारों कंपनियों द्वारा जमा करायी गयी कुल 3.04 करोड़ रुपये के बैंक गारंटी फर्जी पाये गये. शांभवी ने 91.82 लाख रुपये, जन ज्योति ने 1.05 करोड़ रुपये, महालवाला ने 55.59 लाख रुपये और जीआइएमआइटी ने 1.06 करोड़ रुपये के फर्जी बैंक गारंटी जमा किये थे.
बैंक गारंटी फर्जी पाये जाने के बाद जुलाई 2024 में अलग-अलग आदेश जारी कर चारों कंपनियों के ट्रेनिंग और भुगतान पर रोक लगा दिया गया. साथ ही चारों कंपनियों से स्पष्टीकरण पूछा गया. इसमें सभी कंपनियों ने फर्जी बैंक गारंटी जमा करने की बात स्वीकार कर ली. जांच में बैंक गारंटी फर्जी पाये जाने और कंपनियों द्वारा स्वीकार किये जाने के बाद तत्कालीन मिशन निदेशक संजीव बेसरा ने सात और आठ अगस्त 2024 को आदेश जारी कर इन कंपनियों को दो साल के लिए काली सूची में डाल दिया.
इसके बाद तत्कालीन मिशन निदेशक संजीव बेसरा ने 8-8-2024 को श्रम विभाग के सचिव को दो पत्र लिखा. एक पत्र में स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी में वित्त प्रबंधक के पद पर कार्यरत राजन श्रीवास्तव की सेवा समाप्त करने की अनुशंसा की. क्योंकि इन्होंने कंपनियों द्वारा जमा बैंक गारंटी की जांच किये बिना ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी थी.
जनवरी 2024 में तत्कालीन श्रम सचिव द्वारा इसे राजस्व का नुकसान मानते हुए राजन को बर्खास्त करने और कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की जा चुकी थी. संजीव बेसरा से अपने दूसरे पत्र में सोसाइटी में प्रोग्राम और ऑपरेशन के पद पर कार्यरत विश्वरूप ठाकुर की सेवा समाप्त करने की अनुशंसा की. ठाकुर पर यह आरोप था कि उन्होंने कंपनियों से बिना बैंक गारंटी लिये ही काम करने की अनुमति दे दी.
तत्कालीन मिशन निदेशक संजीव बेसरा की अनुशंसा के आलोक में राजन श्रीवास्तव और विश्वरूप ठाकुर को बर्खास्त नहीं किया गया. स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी की कार्यकारिणी ने मिशन निदेशक व विभागीय सचिव की अनुशंसा को ठुकरा दिया. मानो कार्यकारिणी, सरकार से बड़ी हो. सरकार के अधीन बनी कोई स्वतंत्र सोसाइटी को सरकारी नियमों के दायरे में रहकर काम करने की आजादी है.
इस आजादी का इस्तेमाल कोई सोसाइटी या कॉरपोरेशन भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के लिए नहीं कर सकती है. इसके बावजूद स्किल डेवलपमेंट सोसाइटी की कार्यकारिणी ने इन दोनों कर्मचारियों को बर्खास्त करने के बदले सिर्फ वेतन में से एक साल तक 10 प्रतिशत की कटौती करने और नौकरी बरकरार रखने का फैसला किया. सिर्फ इतना ही नहीं इन दोनों कर्मचारियों का कार्यकाल भी बढ़ा दिया.
इस बीच काली सूची में डाली गयी कंपनियों की ओर से आवेदन देकर दिये गये दंड पर पुनर्विचार का अनुरोध किया गया. कंपनियों के आवेदन पर विचार करने के लिए मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने 29-9-2024 को चार सदस्यीय समिति बनायी. इस समिति का अध्यक्ष राजन श्रीवास्तव को बनाया.
समिति में सदस्य के रूप में विश्वरूप ठाकुर, विनय कुमार और राजीव खरे को शामिल किया. पुनर्विचार समिति के अध्यक्ष राजन श्रीवास्तव और सदस्य विश्वरूप ठाकुर को बर्खास्त करने की अनुशंसा की गयी थी. इस समिति ने फर्जी बैंक गारंटी देने वाली कंपनियों को राहत देने की अनुशंसा की.
इस अनुशंसा के आलोक में तत्कालीन श्रम सचिव ने तार्किक तरीके से फैसला का अधिकार मिशन निदेशक को दिया. इसके बाद मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने 14-10-2024 को आदेश(788) जारी कर चारों कंपनियों को काली सूची से हटा दिया. साथ ही कंपनियों के साथ ट्रेनिंग के लिए रद्द किये गये इकरारनामे को बहाल कर दिया. इस तरह फर्जी बैंक गारंटी के सहारे ट्रेनिंग का काम करने वाली कंपनियों को सिर्फ दो महीने तक काली सूची में रखा गया. इसके बाद व्यापक जनहित के नाम पर चारों कंपनियों को फिर से ट्रेनिंग शुरू करने की अनुमति दी गयी और भुगतान किया गया.
स्किल डेवलपमेंट में फर्जी बैंक गारंटी देने वाली कंपनियों को अफसरों की मदद से दी गयी राहत का सिलसिला चल ही रहा था कि शराब घोटाला में फर्जी बैंक गारंटी देने के मामले में ACB ने उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव विनय चौबे को गिरफ़्तार कर लिया.
विनय चौबे की गिरफ्तारी के बाद श्रम विभाग में चार कंपनियों द्वारा फर्जी बैंक गारंटी देने वाली कंपनियों को राहत देने के मामले में हड़कंप मचा. इसके बाद चारों कंपनियों पर फिर से कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू हुई. मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने 25-8-2025 को एक आदेश जारी किया. इसमें यह कहा गया कि फर्जी बैंक गारंटी देने वाली कंपनियों को 8-8-2026 तक काली सूची में माना जायेगा.
घटना क्रम एक नजर में
- जुलाई 2024 में चारों कंपनियों द्वारा फर्जी बैंक गारंटी देने के मामले में स्पष्टीकरण पूछा गया.
- 8-8-2024 को तत्कालीन मिशन निदेशक संजीव बेसरा ने चारों कंपनियों को काली सूची में डाला और ट्रेनिंग का इकरारनामा रद्द कर दिया.
- 8-8-2024 को ही संजीव बेसरा ने राजन श्रीवास्तव और विश्वरूप ठाकुर को बर्खास्त करने की अनुशंसा की. लेकिन कार्यकारिणी समिति ने इसे मानने से इनकार कर दिया.
- 29-9-2024 को फर्जी बैंक गारंटी देने वाली कंपनियों के आवेदन पर विचार करने के लिए राजन श्रीवास्तव की अध्यक्षता में समिति बनी.
- 14-10-2024 को मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने चारों कंपनियों को काली सूची से बाहर निकालने का आदेश जारी किया.
- 28-8-2025 को शैलेंद्र लाल ने दूसरा आदेश जारी कर चारों कंपनियों को 8-8-2026 तक काली सूची में रखने का आदेश दिया.
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