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स्मार्ट मीटर खोलेगा बिजली-रेवन्यू चोरी का बड़ा राज

Kaushal Anand  Ranchi : राजधानी रांची में बिजली उपभोक्ताओं के घरों-प्रतिष्ठान में स्मार्ट मीटर लगाया जा रहा है. स्मार्ट मीटर लगाने के बाद उसे स्विच ऑन कर रीडिंग भी शुरू की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं को बिजली बिल मिल सके और वो बिल जमा करा सकें. करीब 27 हजार मीटर लगाये जा चुके हैं, जिनमें करीब 20 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर की रीडिंग शुरू हो चुकी है. रीडिंग शुरू होने के बाद जो नया मामला सामने आ रहा है, उसे लेकर जेबीवीएनएल प्रबंधन में हलचल मची है. अब कहा जा रहा है कि स्मार्ट मीटर बिजली और राजस्व चोरी का बड़ा भेद खोलेगा. इसकी जद में कई इंजीनियर और मीटर रीडर (ऊर्जा मित्र) आ सकते हैं. बाद में इसकी आंच बिजली उपभोक्ताओं पर भी आ सकती है, क्योंकि जेबीवीएनएल प्रबंधन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक-एक बिंदु पर पैनी नजर रखे हुए है.

स्मार्ट मीटर लगाने का काम जीनस कंपनी को मिला है

दरअसल रांची में स्मार्ट मीटर लगाने का काम जीनस कंपनी को दिया गया है. इस कंपनी ने स्मार्ट मीटर लगाने के पहले उपभोक्ताओं का सर्वे किया था. जिसमें उपभोक्ताओं के घर में लगे वर्तमान मीटर की रीडिंग यूनिट का फोटो लिया गया था. जिसे जेबीवीएनएनल में जमा करा दिया गया था. अब स्मार्ट मीटर लगाया जा रहा है. राजस्व का ग्राफ न गिरे, इसलिए जेबीवीएनएल प्रबंधन का सख्त निर्देश है कि जल्द से जल्द लगाये जा रहे स्मार्ट मीटर को स्विच ऑन कर रीडिंग शुरू की जाये. लेकिन जैसे ही स्विचिंग कर रीडिंग शुरू की जा रही है और उसे सर्वे में ली गयी रीडिंग यूनिट के फोटो से मिलान किया जा रहा है, तो रीडिंग यूनिट में भारी अंतर दिख रहा है. यह अंतर 200 यूनिट से एक हजार तक का है. इस मामले से जेबीवीएनएल प्रबंधन भौंचक है.

कुल साढ़े तीन लाख शहरी उपभोक्ताओं के घरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर

अभी यह शुरुआत है. रांची में कुल साढ़े तीन लाख शहरी उपभोक्ताओं के घरों में मीटर लगाया जाना है. अभी तो कुछ हजार ही मीटर लगाए जा सके हैं. जिसमें तेजी लाने का निर्देश एजेंसी को दिया गया है. मगर इन कुछ ही हजार की मीटर रीडिंग यूनिट में आ रहा भारी अंतर कहीं न कहीं इंजीनियर-मीटर रीडर के गंठजोड़ से बिजली और राजस्व चोरी की ओर इशारा कर रहा है. अगर ऐसा हुआ, तो कई इंजीनियर और मीटर रीडर नप सकते हैं. इसमें आम उपभोक्ता भी नहीं बचेंगे. क्योंकि झारखंड में मीटर बाईपास कर बिजली चोरी कोई नई बात नहीं है. जमशेदपुर में पूर्ववर्ती सरकार में मीटर बाईपास कर बिजली चोरी का बड़ा मामला सामने आया था,. जिसके बाद कई इंजीनियरों पर गाज गिरी थी.

ऐसे समझें कैसे हो रही है बिजली-राजस्व चोरी

-विगत 10 साल से रांची सहित सभी एरिया बोर्ड के जिले में ऑन स्पॉट बिलिंग और रीडिंग का काम निजी एजेंसी को दिया गया है. -घर-घर जाकर मीटर रीडिंग और ऑन स्पॉट बिलिंग का काम निजी एजेंसी के मीटर रीडर (ऊर्जा मित्र) करते हैं. यानि सीधी जिम्मेवारी मीटर रीडर पर है, सही बिलिंग और सही रीडिंग की. आए दिन त्रुटिपूर्ण बिजली बिल की शिकायतें आती रहती हैं. -हर महीने जेबीवीएनएल द्वारा बिजली चोरी को लेकर छापेमारी अभियान चलाया जाता है, जिसमें हजारों मामले आते हैं, बिजली चोरी को लेकर एफआईआर तक की जाती है. -उपभोक्ताओं के मीटर की सही रीडिंग हो, सही बिलिंग हो, इसे देखने की जवाबदेही स्थानीय स्तर पर जूनियर इंजीनियर और लाइनमैन की होती है. इसलिए ये बिजली चोरी के मामले से बच नहीं सकते हैं. -रांची में स्मार्ट मीटर लगाने का काम 5 नवंबर को शुरू हुआ. अभी तक करीब 27 हजार से ऊपर मीटर लगाए जा चुके हैं. इसमें 20 हजार से अधिक की रीडिंग हो चुकी है. जबकि पायलेट प्रोजेक्ट के तहत लगे 12 मीटर प्री-मोड में आ चुका है. बाकी टेस्टिंग के बाद प्री-पेड होते जाएंगे. -स्मार्ट मीटर लगाने के पूर्व मीटर लगाने वाली एजेंसी जीनस ने उपभोक्ताओं का सर्वे किया, जिसमें मीटर रीडिंग का फोटो लेना महत्वपूर्ण था. -अब जो स्मार्ट लगने के बाद स्विचिंग करके रीडिंग शुरू हो रही है तो उसमें भारी अंतर आ रहा है. उदाहरण के लिए सर्वे में जो रीडिंग का फोटो लिया गया था, उसमें रीडिंग 500 यूनिट था, लेकिन नए स्मार्ट मीटर से रीडिंग शुरू होने के बाद वह गिरकर 300 यूनिट दिख रहा है. विभिन्न तरह के उपभोक्ताओं में यह अंतर 200 से 1 हजार यूनिट तक है. -मतलब साफ है कि निजी बिलिंग एजेंसी के मीटर रीडर फील्ड में बड़ी अनियमितता की है. या तो इसमें उपभोक्ताओं की मिली भगत रही होगी या फिर उपभोक्ताओं से मीटर रीडर ने भयादोहन किया होगा. क्योंकि बिजली अफसर इस बात को लेकर माथा पीट रहे हैं कि अंतर 5 से 50 यूनिट तक हो सकता है. अभी तो कुछ मीटर का ही लगा है और रीडिंग शुरू हुई है. इतना बड़ा अंतर निश्चित ही बिजली-राजस्व चोरी का मामला बनता है जो करोड़ों में जा सकता है. क्योंकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि मीटर रीडर अधिक यूनिट दिखाकर उपभोक्ताओं से अवैध वसूली करते रहे हैं. क्योंकि स्मार्ट मीटर गलत रीडिंग नहीं दर्शाता है.

जो मामले आये हैं, वे गंभीर हैं : मनीष कुमार

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alt="" width="600" height="400" /> जेबीवीएनएल के निदेशक कॉमर्शियल मनीष कुमार का कहना है कि शुरुआती जांच में करीब 400 स्मार्ट मीटर में ये इश्यू आए हैं, जिसकी जांच करायी जा रही है. मगर जो मामले आए हैं, वे गंभीर हैं. जरा सा प्वाइंट इधर-उधर करने किए जाने के कारण पुराने और नए मीटर रीडिंग की यूनिट में अंतर आ रहा सामने आ रहा है. अभी इंतजार करना होगा. क्योंकि अभी काफी मीटर लगाए जाने बाकी हैं. अगर यह मामले बढ़े तो निश्चित ही बड़े स्तर पर इसकी जांच की जाएगी. आखिरकार इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी कैसे हुई है. इसे लेकर प्रबंधन काफी गंभीर है.

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