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स्मृति शेष: मैं आज भी अंदर से एक वकील ही हूं...

 
जस्टिस के पी देव के निधन पर हाईकोर्ट के वकील धीरज कुमार की कलम से Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस कैलाश प्रसाद देव अब नहीं रहे. उनकी असामयिक मृत्यु झारखंड के न्याय जगत के लिए बड़ी क्षति है. उनके निधन पर पूरे न्याय जगत में शोक की लहर है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त होने से पहले दिवंगत जस्टिस के पी देव एक प्रखर वकील थे. उन्होंने लम्बे समय तक वकालत के पेशे में भी अपनी पहचान बनाई थी. उनके निधन पर हाईकोर्ट के अधिवक्ता और जस्टिस के पी देव के साथ लम्बे समय तक वकालत करने वाले अधिवक्ता धीरज कुमार ने स्मृति शेष में जो लिखा है, उसे हम हूबहू प्रकाशित कर रहे हैं. अधिवक्ता धीरज कुमार - कैलाश बाबू अक्सर यह बात दोहराया करते थे कि मैं झारखंड उच्च न्यायालय के परिसर में सुबह 10:00 बजे से शाम के 4:30 बजे तक ही न्यायाधीश हूं, उसके बाद के समय में, मैं आंतरिक रूप से आज भी एक वकील ही हूं. जस्टिस के पी देव बहुत ही सहज भाव से किसी भी अधिवक्ता को समय दिया करते थे. सभी के सुख-दुख में शामिल होना वकीलों का हाल चाल लेना उनकी आदतों में शुमार था. जस्टिस बहुत ही मिलनसार, सामाजिक और मददगार व्यक्ति थे. किसी के बारे में भी अगर उन्हें यह सूचना मिल जाए कि वह कष्ट में हैं, उसे यह परेशानी है तो वह किसी भी हद तक जाकर उसकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे. एक वाक्या याद आता है कि उनके स्कूल के एक साथी की निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई और अस्पताल प्रबंधन ने बिल की डिमांड के चलते उनके डेड बॉडी को रोक रखा था, ऐसे में जब कैलाश बाबू को यह सूचना मिली वह तुरंत अस्पताल पहुंचे, इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने मित्र के पार्थिव शरीर को अस्पताल से रिलीज कराया और जो भी मदद हो सकती थी, वो सारी जिम्मेवारियां निभाई. इसी प्रकार उनके कई कार्य लोगों को उनकी याद दिलाता रहेगा. इसे भी पढ़ें -भाजपा">https://lagatar.in/grand-welcome-to-pm-at-bjp-headquarters-modi-saidcountry-has-seen-a-new-history-being-made/">भाजपा

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