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...तो क्या अब मंत्रिमंडल से बाहर होकर हेमंत सरकार को समर्थन देने का केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव डाल रहे कांग्रेस विधायक !

 
Nitesh Ojha Ranchi : राज्यसभा के लिए जेएमएम प्रत्याशी महुआ माजी के नामाकंन पर कांग्रेस के किसी नेताओं के नहीं जाने के बाद झारखंड की राजनीति पूरी तरह से बदल गयी है. जेएमएम-कांग्रेस सरकार को लेकर तरह-तरह की अटकलें सामने आ रही हैं. इसमें एक चर्चा यह भी है कि झारखंड कांग्रेस के अधिकांश विधायक अब चाह रहे हैं कि वे मंत्रिमंडल से बाहर होकर अपना समर्थन हेमंत सरकार को दें. इससे तीन प्रभाव पड़ेगा. देखें वीडियो पहला- सरकार पर नहीं होगा खतरा दूसरा-  भविष्य में ED अगर मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार को लेकर कोई कार्रवाई करती है, तो कांग्रेस की छवि को कोई नुकसान नहीं होगा. तीसरा- सबसे महत्वपूर्ण कारण है कि जेएमएम को कांग्रेस का कड़ा मैसेज जाएगा. बता दें कि मंगलवार को प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे पार्टी मुख्यालय में सभी विधायकों के साथ वन टू वन बैठक कर रहे थे. बैठक में अधिकांश विधायकों द्वारा प्रभारी को इसी तरह के सुझाव दिये जाने की बातें सामने आ रही हैं. इसे पढ़ें- मनी">https://lagatar.in/money-laundering-case-farooq-abdullah-questioned-by-ed-for-three-and-a-half-hours/">मनी

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विधायकों ने कहा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मन में गठबंधन सहयोगी के लिए कोई सम्मान नहीं

पार्टी के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, विधायकों ने प्रभारी को यह सुझाव दिया है कि यही बेहतर समय है कि हम कड़ा कदम उठाएं. वैसे भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मन में गठबंधन के सहयोगियों के लिए कोई सम्मान नहीं है. वे कांग्रेस के विधायकों को हल्के में ले रहे हैं. बता दें कि बैठक शुरू होने से पहले विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी मीडिया को दिये बयान में कहा था कि जेएमएम और मुख्यमंत्री ने लक्ष्मण रेखा को छू लेने का काम किया है.

निर्वाचन आयोग के निर्णय को देख इससे संदेह नहीं किया जा सकता कि मुख्यमंत्री भाजपा के संपर्क में हों

एक विधायक ने तो यहां तक कह दिया कि हेमंत सोरेन का भाजपा के साथ संपर्क होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है. सभी देख रहे हैं कि कैसे चुनाव आयोग">http://lagatar.in">

लगातार मुख्यमंत्री और उनके भाई बसंत सोरेन के लाभ के पद से जुड़े मामलों को टाल रहा है. ऊपर से अब जिस तरह मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी से किये वादे को तोड़ा है, उससे तो लगता है कि वे भी इसी सोच पर काम कर रहे हैं कि कांग्रेस गठबंधन से बाहर हो जाए. हमारी राष्ट्रीय अध्यक्षा से किये वादे को तोड़ना पूरे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए अपमान से कम नहीं है. इसे भी पढ़ें- RMC:">https://lagatar.in/rmc-development-work-stopped-due-to-lack-of-sand-deputy-mayor-wrote-a-letter-to-the-principal-secretary/">RMC:

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दिल्ली बैठक में हेमंत सोरेन की मांग को केंद्रीय नेतृत्व को नहीं मानना चाहिए

एक विधायक ने कहा कि दिल्ली में हेमंत सोरेन ने राज्यसभा प्रत्याशी के मुद्दे पर सोनिया गांधी से मुलाकात की, उसमें प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष को नहीं शामिल होने की मांग भी कहीं से जायज नहीं थी. केंद्रीय नेतृत्व को ऐसी मांग नहीं माननी चाहिए थी. ऐसी घटनाओं से झारखंड कांग्रेस के अंदर एक अलग मैसेज जा रहा है. [wpse_comments_template]  
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