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तो क्या अनसुने द डेली गार्डियन नरेंद्र मोदी की विफलताओं का संदर्भ बदल सकेगा !

Lagatar Desk : खबरों की दुनिया में द डेली गार्डियन एक अनजाना-सा नाम है. नरेंद्र मोदी को द डेली गार्डियन ने आलोचनाओं से लहूलुहान होने पर राहत दी है. इसका असर यह है कि केंद्र सरकार के दर्जनों मंत्रियों ने द डेली गार्डियन की उस खबर का लिंक शेयर किया है, जिसमें मोदी के हार्डवर्क की सराहना की गयी है.

द टेलिग्राफ के अनुसार द डेली गार्डियन नाम से एक साप्ताहिक ई-पेपर है, जो भारत से ही प्रकाशित होता है. इसने पब्लिश किया है जिसका लब्बोलुवाब यह है कि देश के लागों को विपक्ष और अंतर्राष्ट्रीय साजिश के ट्रेैप से बचना चाहिए. इसने लिखा है कि नरेंद्र मोदी के हार्डवर्क के बारे में भविष्य के इ​तिहास लेखक बताएंगे कि उनके प्रयासों से कोविड से सफलतापूर्वक किस तरह लड़ा गया.

ब्रिटेन के मशहूर अखबार द गार्डियन का द गार्डियन मेल से कोई लेना-देना नहीं है. पिछले ही सप्ताह द गार्डियन ने नरेंद्र मोदी को भारत के वर्तमान हालात के लिए आड़े हाथों लिया था. यही नहीं वाशिंगटन पोस्ट, न्यूयार्क टाइम्स, द आट्रेलियन, डेली मेल, द इंडिपेंडेंट, लेसेंट, द इकोनॉमिस्ट, अलजजीरा सहित दुनिया भर की मीडिया ने तल्ख आलोचना की थी. यहों तक कि गुजरात से प्रकाशित गुजरात समाचार ने भी जो टिप्प्णी की, उससे रातों की नींद हराम होना स्वाभाविक है. द डेली गार्डियन के माध्यम से अब नरेंद्र मोदी और उनकी छवि को सुधारने का अभियान शुरू किया गया है.

भाजपा के आईटी सेल ने इसके लिंक को किया है शेयर

दिलचस्प हे कि इस लिंक को शेयर करते हुए मंत्रियों और भाजपा आईटी सेल के प्रमुख ने जो टिप्पणियां की हैं, वे बताती हैं कि एक एक सांस के लिए तड़पते मरते लोगों के लिए कितनी असंवेदना है. अमित मालवीय जो आईटी सेल के प्रमुख हैं ने ट्वीट किया मौत बड़ी खबर है, रिकवरी नहीं. क्या हम जानते हैं कि 85 प्रतिशत लोग बिना हॉस्पिटल के ही ठीक हो रहे हैं. हॉस्पिटल की जरूरत मात्र 5 प्रतिशत लोगों को हो रही है. लेकिन देश में बहस इस पर हो रही है कि इस महामारी के लिए दोषी किसे करार दिया जाए. अनुराग ठाकुर और जितेंद्र सिंह भी मंत्री हैं दोनों ने भी ट्वीट कर विपक्ष के प्रचार के ट्रैप से बचने को कहा है क्योंकि नरेंद्र मोदी हार्डवर्क कर रहे हैं. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी सहित सैकड़ो भाजपा नेता ने ट्वीट बमबारी कर नरेंद्र मोदी के हार्डवर्क को याद दिलाया है.

याद कीजिए नरेंद्र मोदी ने पिछले कार्यकाल में उस समय जब हार्वर्ड विश्वविद्यालय के कई विद्वानों ने मोदी की आर्थिक नीतियों को लेकर सवाल उठाया था तब हार्डवर्क की चर्चा कर हार्वर्ड का मजाक बनाया था. द डेली गार्डियन के तर्क भी प्रधानमंत्री की छवि निर्माण के लिए जमीन बनाने का प्रयास है. कोशिश यह है कि कम से कम देश के लोगों को बताया जाए कि गार्डियन प्रधानमंत्री की प्रशंसा कर रहा हे. अब भले ही यह प्रसिद्ध गार्डियन ने नहीं किया हो.

आइटीवी नेटवर्क करता है द डेली गार्डियन का संचालन

द टेलिग्राफ ने बताया है कि द डेली गार्डियन का संचालन आइटीवी नेटवर्क करता है. यह वही नेटवर्क है जिसे हरियाणा के नेता विनोद शर्मा के पुत्र कार्तिकेय शर्मा संचालित करते हैं. यह जानना इसलिए जरूरी है कि भाजपा नेता यह प्रचारित कर रहे हैं, मानों उन्हें इस संकट में कोई बड़ी मुराद मिल गयी हो और जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है. वह मुराद है कि नरेंद्र मोदी की हो रही आलोचनाओं का काउंटर किया जा सके. वैसे भी मीडिया मैनेजमेंट के गुजरात मॉडल अब तो दिल्ली सहित पूरे देश के शासकों को प्रिय लगता है. बिहार भी इसमें आगे है. नीतीश कुमार ने तो इस हुनर को गुजरात में मोदी के शासनकाल में ही सीख लिया था.

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