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सोनम वांगचुक फिर सुर्खियों में, कहा, देश में शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत, भ्रष्टाचार ने नया रूप ले लिया है

थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश पचास साल पहले हमसे काफी पीछे थे, या हमारे बराबर थे, वे अब हमसे मीलों आगे निकल गये हैं. उन्होंने प्रति व्यक्ति जीडीपी का जिक्र करते हुए कहा, अगर यह सिलसिला चलता रहा, तो 2047 में भारत विकसित देश नहीं बन पायेगा.
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सोनम वांगचुक फाइल फोटो

NewDelhi : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर देश को 2047 तक सम्मानजनक राष्ट्र बने रहना है तो उसे एक बड़े बदलाव की आवश्यकता है. स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पूर्व 13 अगस्त को  जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने भारत के  दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन का आह्वान किया. 

 

 
उन्होंने देशवासियों से निस्वार्थ, निडर, चरित्रवान और सशक्त लोगों का नाम सुझाने का आग्रह किया जो देश के भविष्य को आकार देने में मदद करें, सोनम वांगचुक ने कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थे. यह समय उन्होंने देश के भविष्य के बारे में सोचने में  व्यतीत किया था. उन्होंने भारत में सक्षम राजनीतिक नेतृत्व चुनाव के लिए में शांतिपूर्ण क्रांति का आह्वान किया.

 

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वांगचुक ने कहा कि थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश पचास साल पहले हमसे काफी पीछे थे, या हमारे बराबर थे, वे अब हमसे मीलों आगे निकल गये हैं. उन्होंने प्रति व्यक्ति जीडीपी का जिक्र करते हुए कहा, अगर यह सिलसिला चलता रहा, तो 2047 में भारत विकसित देश नहीं बन पायेगा.  

 


श्री वांगचुक ने जंतर मंतर के छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा, आंदोलन के कारण केंद्रीय  शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे दिया. लेकिन न. शिक्षा मंत्री से कोई चमत्कार होने की उम्मीद नहीं है. कहा कि देश की प्रगति उसकी शिक्षा प्रणाली से जुड़ी हुई है. जब तक शिक्षा पिछड़ी रहेगी, देश का भविष्य भी पिछड़ा रहेगा.

 


सोनम वांगचुक ने सभी राजनीतिक दलों को कटघरे में खड़ा करते हुए दावा किया कि विभिन्न दलों की सरकारों द्वारा असहमति को दबा दिया जाता है. उन्होंने कहा, दिल्ली में एक पार्टी की सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की गयी. लेकिन अन्य राज्यों में दूसरी पार्टी की सरकारों ने भी छात्रों पर उसी तरह का अन्याय किया इसलिए यह पार्टियों का मामला ही नहीं है.

 


श्री वांगचुक ने 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को याद करते हुए कहा,इससे राजनीतिक परिवर्तन तो हुआ, लेकिन भ्रष्टाचार और अन्याय का खात्मा नहीं हुआ.  आज 12 साल बाद (मोदी सरकार में) भ्रष्टाचार और अन्याय ने नया रूप ले लिया है,  लेकिन यह   पहले से 2-3 गुना बड़ा है.   

 


 सोनम वांगचुक ने कहा, हमें एक बहुत बड़े बदलाव की जरूरत है, इस देश में एक शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत है, ताकि हम सही नेताओं के साथ आगे बढ़ सकें. उन्होंने कहा, जब तक ह्मारे नेता सही नहीं होंगे,   देश गलत रास्ते पर चलता रहेगा।"

 


सोनम वांगचुक ने कहा, आज हम संसद पर नजर डाले, तो लगभग आधे संसद सदस्यों पर अपराध करने के आरोप हैं.  एक तिहाई पर हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं.  तो ऐसे में देश का विकास कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना किसी विशेष राजनीतिक दल या विपक्ष पर लक्षित नहीं थी. मैं किसी विशेष पार्टी या विपक्ष की बात नहीं कर रहा हूं, मैं देश की बात कर रहा हूं. 

 

 

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