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कृषि कानून वापस लिये जाने पर सोनिया ने पीएम मोदी पर हल्ला बोला, कहा, सरकार का अहंकार हारा

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 NewDelhi :  पीएम मोदी द्वारा कृषि कानूनों को वापस लिये जाने के फैसले पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे अन्नादाताओं की जीत और सरकार के अहंकार की हार बताया है. सोनिया गांधी ने खुशी जताते हुए कहा,  लगभग 12 महीने के गांधीवादी आंदोलन के बाद आज देश के 62 करोड़ अन्नदाताओं-किसानों-खेतिहर मजदूरों के संघर्ष और इच्छाशक्ति की जीत हुई. उन्होंने कहा, आज उन 700 से अधिक किसान परिवारों की कुर्बानी रंग लायी, जिनके परिजनों ने न्याय के इस संघर्ष में अपनी जान न्योछावर कर दी. आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई. इसे भी पढ़ें : दिल्ली">https://lagatar.in/when-will-farmers-vacate-delhi-border-united-kisan-morcha-meeting-tomorrow-decision-will-be-taken/">दिल्ली

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तानाशाह शासकों का अहंकार हारा 

इस क्रम में सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर हल्ला बोलते हुए कहा, आज सत्ता में बैठे लोगों द्वारा किसानों के खिलाफ बुना गया षड़यंत्र भी हारा और तानाशाह शासकों का अहंकार भी. आज रोजी-रोटी और किसानी पर हमला करने की साजिश भी हारी. आज खेती-विरोधी तीनों काले कानून हारे और अन्नदाता की जीत हुई. सोनिया गांधी ने एनडीए सरकार को किसान विरोधी करार देते हुए  कहा,  पिछले सात सालों से भाजपा सरकार ने लगातार खेती पर अलग-अलग तरीके से हमला बोला है. चाहे किसान को दिये जाने वाला बोनस बंद करने की बात हो, या फिर किसानों की जमीन के उचित मुआवज़ा कानून को अध्यादेश लाकर समाप्त करने का षडयंत्र हो. सोनिया गांधी ने कहा, इस सरकार ने किसानों के खिलाफ काम किया है. चाहे प्रधानमंत्री के वादे के अनुसार किसान को लागत+50% मुनाफा देने से इनकार कर देना हो, या फिर डीज़ल और कृषि उत्पाद की लागतों में भारी भरकम वृद्धि हो, या फिर तीनों खेती विरोधी काले कानूनों के जरिए किसानों पर हमला. इसे भी पढ़ें :  कृषि">https://lagatar.in/kangana-unhappy-on-the-return-of-agricultural-laws-said-the-decision-is-unfair-sad-shameful-and-utterly-wrong/">कृषि

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किसानों की खराब हालत के लिए सरकार जिम्मेदार

कांग्रेस अध्यक्ष ने किसानों की आय को लेकर भी मोदी सरकार पर तंज कसा. उन्होंने कहा, आज जब भारत सरकार के NSO के अनुसार किसान की औसत आय ₹27 प्रतिदिन रह गयी हो, और देश के किसान पर औसत कर्ज  74,000 रुपये हो, तो सरकार और हर व्यक्ति को दोबारा सोचने की जरूरत है कि खेती किस प्रकार से सही मायनों में लाभ का सौदा बने. किसान को उसकी फसल की सही कीमत (MSP) कैसे मिले. सोनिया गांधी ने कहा, किसान और खेतिहर मजदूर को यातना नहीं, याचना भी नहीं, न्याय और अधिकार चाहिये. यह हम सबका कर्तव्य भी है और संवैधानिक जिम्मेदारी भी. उन्होंने कहा, प्रजातंत्र में कोई भी निर्णय सबसे चर्चा कर, सभी प्रभावित लोगों की सहमति और विपक्ष के साथ राय मशवरा के बाद ही लेना चाहिए. उम्मीद है कि मोदी सरकार ने कम से कम भविष्य के लिए कुछ सीख ली होगी. कहा कि मुझे उम्मीद है कि भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री अपना राजहठ और अहंकार छोड़कर किसान कल्याण की नीतियों को लागू करने की ओर ध्यान देंगे,  MSP सुनिश्चित करेंगे और भविष्य में ऐसा कोई कदम उठाने से पहले राज्य सरकारों, किसान संगठनों और विपक्षी दलों के बीच सहमति बनायेंगे. [wpse_comments_template]

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