मगध विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीयूष कमल सिन्हा थे मुख्य वक्ता अभिलेखों और अभिलेखागारों के विषय में विस्तार से की चर्चा Hazaribagh : विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के इतिहास विभाग में शुक्रवार को "इतिहास लेखन में अभिलेखों की भूमिका" विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन विभागाध्यक्ष डॉ विकास कुमार की अध्यक्षता में हुई. मुख्य वक्ता मगध विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीयूष कमल सिन्हा ने अभिलेखों और अभिलेखागारों के विषय में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि अभिलेख अप्रकाशित एवं एक प्रति में होते हैं, जबकि पुस्तक एवं पत्र-पत्रिकाए प्रकाशित एवं अनेक प्रतियों में होते हैं. अभिलेखागार सरकारी एवं निजी दो प्रकार के होते हैं. उदाहरण स्वरूप राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली, राज्य अभिलेखागार जो अधिकांशत: राज्यों के राजधानी में अवस्थित होते हैं, आयुक्त कार्यालय का अभिलेखागार, जिला समाहरणालय का अभिलेखागार आदि सार्वजनिक है, जबकि निजी अभिलेखागर के अंतर्गत मिशनरीज के अभिलेखागार आदि आते हैं. इसे भी पढ़ें:
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अभिलेखागारों के महत्व पर चर्चा करते हुए डॉ. सिन्हा ने कहा कि अब पुरानी सरकारी फाइलों, ब्रिटिश कालीन फाइलों, तथा महत्वपूर्ण बैठकों की कार्यवाहियां, अप्रकाशित पांडुलिपि, दुर्लभ पुस्तकों आदि का संग्रह एवं उपयोग अभिलेखागारों से किया जा सकता है तथा इतिहास लेखन में प्रयोग किया जाता है. डॉ सिन्हा ने इतिहास लेखन में नए स्रोतों जैसे सिनेमा आदि पर भी प्रकाश डाला. खेरवार आंदोलन पर प्रकाश डालते हुए डॉ सिन्हा ने कहा कि पहले इतिहासकार इसे केवल धार्मिक सुधार आंदोलन कहते थे, जबकि अभिलेखागारों के स्रोतों की सहायता से अब इतिहास के विद्वान इस निष्कर्ष पर पहुचे हैं कि खेरवार आंदोलन केवल धार्मिक सुधार आंदोलन न होकर अंग्रेजों के विरुद्ध खेरवारों व संथालों का आंदोलन था तथा इसमें कृषि संबंधी कारक भी मौजूद थे. डॉ सिन्हा ने प्रसिद्ध विद्वान रांके के विचार "स्रोत जैसा कहता है, इतिहास में व्याख्या उसी प्रकार का हो." से सहमति प्रकट करते हुए इतिहास लेखन में तटस्थता तथा वस्तुनिष्ठता पर जोर दिया. अंत में डॉ. सिन्हा ने शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रश्नों का सविस्तार उत्तर देते हुए सभागार को संतुष्ट किया. इसे भी पढ़ें:
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हजारीबाग सेंट्रल जेल के अभिलेखागारों के बारे में प्रकाश डाला गया
डॉ. हितेन्द्र अनुपम ने निष्कर्षात्मक टिप्पणी करते हुए डॉ. सिन्हा के व्याख्यान पर प्रकाश डाला और 1937-39 के प्रांतीय सरकारों की ओर से राजनीतिक बंदियों को जेल से बाहर करने पर प्रकाश डाला और कहा कि हजारीबाग सेंट्रल जेल और अंडमान निकोबार के सेलुलर जेल के अभिलेखागारों पर भी प्रकाश डाला. डॉ. अशोक कुमार मंडल ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि डॉ. सिन्हा ने कम समय में अभिलेख और अभिलेखागार को इतिहास लेखन में महत्व को बेहतरीन ढंग से सभागार को बताया है. डॉ मंडल ने अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर महत्व देते हुए गुप्तचरों एवं गुप्तचर विभाग के रिपोर्टों पर चर्चा की, जिससे इतिहास लेखन में पूर्वाग्रह से बचा जा सकता है. कार्यक्रम में डॉ विकास कुमार, डॉ जयगोविन्द प्रसाद, पत्रकार मुरारी सिंह, शोधार्थी भैरव आनंद, नवनीत कुमार दांगी, सुमित कुमार, प्रभात कुमार, प्रीति कुमारी, जय कुमार तथा स्नातकोत्तर के विद्यार्थी उपस्थित थे. [wpse_comments_template]
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