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विशेष लोक अदालत :  जस्टिस सुजीत नाराणय प्रसाद ने कहा, मुआवजे का मतलब सिर्फ पैसों का भुगतान नहीं...

  Ranchi/Dhanbad :  झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष और हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की पहल पर शनिवार को झारखंड के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकारों में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया,  जिसमें भूमि अधिग्रहण,  बी सी सी एल, सी सी एल, बैंक, म्यूटेशन, सेटलमेंट तथा अन्य रेवेन्यू मामलों का निपटारा किया गया. झालसा के द्वारा इसके लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम धनबाद के बी सी सी एल सभागार कोयला नगर में आयोजित किया गया. इस विशेष लोक अदालत का उद्घाटन हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद, जस्टिस आनंद सेन और न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया.

नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया

विशेष लोक अदालत में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि  मुआवजा का अर्थ केवल यह नहीं कि उन्हें रुपए का भुगतान कर दिया जाये,बल्कि मुआवजा का अर्थ यह भी है कि सामाजिक सुरक्षा के तहत उनके परिवार के जीवन यापन और उन्हें रहने के लिए छत की व्यवस्था करना.  उन्होंने धनबाद की डीसी और बीसीसीएल के सीएमडी से अनुरोध किया कि वह मुआवजा संबंधित विवादों का निस्तारण तीस दिनों के अंदर करें ताकि लोगों को समुचित  लाभ मिल सके और वह दर -दर की ठोकर खाने से बच जाये. इसके बाद नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया जिसमें अग्नि प्रभावित क्षेत्रों से विस्थापित किये गये लोगों के दर्द को दिखाया गया, डालसा के प्रयास से उन्हें नया घर मिला.

धनबाद में कोयला उत्खनन व भू अधिग्रहण के ज्यादातर मामले पाये गये

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि धनबाद में कोयला उत्खनन व भू अधिग्रहण के ज्यादातर मामले पाये गये जिसमें लोगों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाया था, इस कारण धनबाद को ही विशेष आयोजन के लिए चुना गया. उन्होंने जिला प्रशासन एवं समस्त पीएसयू कंपनी के अधिकारियों को सुझाव दिया कि पीड़ितों की जगह वह खुद को रखकर देखें तब जाकर समस्या का जल्द से जल्द समाधान होगा. इस राज्य स्तरीय विशेष लोक अदालत में कुल 6084417834 रुपए का सेटलमेंट एवं कुल 577375 मामलों का निष्पादन हुआ. [wpse_comments_template]

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