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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर खास : अपनी सुरक्षा अपने हाथ, हर छात्रा सीख रहीं मार्शल आर्ट

राज्यस्तर पर कई छात्राओं ने दिखाया है अपना दम, बटोर चुकी हैं मेडल दे चुकी हैं संदेश- हम किसी ने नहीं हैं कम कटकमसांडी प्लस टू हाई स्कूल के शारीरिक शिक्षक सरोज मालाकार छात्राओं को कर रहे ट्रेंड Amarnath Pathak Hazaribagh : हजारीबाग जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित प्लस टू हाई स्कूल कटकमसांडी की हजारों ग्रामीण छात्राएं आज आत्मरक्षा के लिए किसी पर निर्भर नहीं हैं. उनके रग-रग में कराटे, वूशु जैसे मार्शल आर्ट भरे पड़े हैं. सेल्फ डिफेंस की बारीकियों से पूरी तरह परिचित हैं. लड़कियां हर दिन एक-दूसरे से ही दो-दो हाथ करती नजर आती हैं. वर्षों पहले यह दारोमदार उठाया था कटकमसांडी प्लस टू हाई स्कूल के शारीरिक शिक्षक सरोज मालाकार ने. इसे भी पढ़ें :रांची">https://lagatar.in/ranchi-honorarium-will-be-paid-with-deduction-of-mercury-teachers-who-do-not-get-the-certificate-checked/">रांची

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छात्राओं को दी जा रही मार्शल आर्ट ट्रेनिंग

उन्होंने बताया कि वर्तमान सत्र में भी सैकड़ों छात्राओं को वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रहे हैं. वह मार्शल आर्ट्स और सेल्फ डिफेंस के कुशल प्रशिक्षक हैं. इनसे प्रशिक्षित वूशु मार्शल आर्ट के कई खिलाड़ी विद्यालय को पदक दिला चुके हैं. इनमें वर्ष 2020 में राज्यस्तरीय एसजीएफआई प्रतियोगिता में खुशबू कुमारी ने रजत और शोभा कुमारी ने कांस्य पदक जीतकर विद्यालय का मान बढ़ाया है. वहीं वर्ष 2022 में राज्यस्तरीय जूनियर वूशु प्रतियोगिता में तीन छात्राओं कशिश कुमारी, साइना परवीन और रवीना प्रवीण ने भी कांस्य पदक जीता. इसे भी पढ़ें :केरल">https://lagatar.in/kerala-police-raids-asianet-news-office-alleges-it-is-spreading-fake-news/">केरल

पुलिस का एशियानेट न्यूज कार्यालय पर छापा, फर्जी खबर प्रसारित करने का आरोप
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संकट के समय छात्रा करें बचाव- सरोज मालाकार

सरोज मालाकार बताते हैं कि आज के दौर में छात्राएं और महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं. आए दिन सोशल मीडिया, अखबार और अन्य कई माध्यम से महिला अपराध और छेड़छाड़ की घटना देखने और सुनने को मिल जाती है. इस परिस्थिति में मार्शल आर्ट और सेल डिफेंस की तकनीक अपनी बचाव के लिए एक बेहतरीन माध्यम हो सकता है. उसी उद्देश्य को लेकर विद्यालय की सभी छात्राओं को वह प्रशिक्षण देते हैं. वूशु मार्शल आर्ट आत्मरक्षा की एक विधा है जिसमें सांस पर नियंत्रण, अनुशासन तथा एकाग्रता से छात्र-छात्राओं को कई दांवपेच स्टाइल तथा आघात पहुंचाने की कला सिखाई जाती है. मकसद सिर्फ यही है कि विद्यालय की छात्राएं विकट परिस्थिति में अपना बचाव कर सकें. [wpse_comments_template]

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