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मजदूर दिवस पर खास : स्टेट माइग्रेंट्स कंट्रोल रूम के कार्य की बदौलत प्रवासी मजदूरों में झारखंड सरकार ने बनायी अपनी अलग पहचान

Pravin Kumar Ranchi :  एक मई का दिन दुनिया के कई देशों में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस (International Labour Day or May Day ) के तौर पर मनाया जाता है. ये दिन दुनिया के मजदूरों और श्रमिक वर्ग को समर्पित है. इस दिन को लेबर डे, मई दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है. आज मजदूरों की उपलब्धियों और देश के विकास में उनके योगदान को सलाम करने का दिन है. ये दिन मजदूरों के सम्मान, उनकी एकता और उनके हक के समर्थन में मनाया जाता है. इस दिन दुनिया के कई देशों में छुट्टी होती है. इस मौके पर मजदूर संगठनों से जुड़े लोग रैली व सभाओं का आयोजन करते हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करते हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/04/pb1.jpg"

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लॉकडाउन के दौरान मजदूर सदी के सबसे बड़ी त्रासदी से गुजरे थे

झारखंड जैसे गरीब राज्य की श्रम शक्ति की बदौलत देश के कई राज्य विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं. वहीं लॉकडाउन के दौरान उन मजदरों को सुध लेने वाला जब कोई नहीं था, तब झारखंड सरकार के श्रम विभाग ने स्टेट माइग्रेंट्स कंट्रोल रूम की स्थापना 27 मार्च 2020 को की थी. जो मजदूरों की समस्याओं का हल करने में लगा है. झारखंड सरकार के सहयोग से  फिया फाउंडेशन के द्वारा संचालित स्टेट माइग्रेंट्स कंट्रोल रूम ने 16 लाख 47 हजार 719 मजदूरों का निबंधन किया. साथ ही उनके हित में कार्य कर रहा है. स्टेट माइग्रेंट्स कंट्रोल ने ऐसे कई कार्य किये, जिसे मजदूर दिवस पर याद किया जाना जरूरी है. कोराना काल में कंट्रोल रूम के प्रयास से 9,01,424 मजदूरों को वापस अपने राज्य में लाने का प्रयास भी किया गया. इसे भी पढ़ें – बिजली">https://lagatar.in/irrigation-problem-due-to-power-cut-farmers-are-upset-the-crops-in-the-fields-have-started-drying-up/">बिजली

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राज्य सरकार ने 2 लाख 63 हजार 337 मजदरों को की थी आर्थिक सहायता

देश और राज्य के मजदूर सदी के सबसे बड़ी त्रसदी से गुजरे थे. उसी दौरान झारखंड सरकार ने राज्य के 2 लाख 63 हजार 337 मजदरों को एप के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की थी. वहीं मजदरों का स्किल मैपिंग जैसा जटिल काम भी माइग्रेंट्स कंट्रोल रूम ने किया था. जिसमें 2 लाख 74 हजार 780 प्रवासी मजदरों कि स्किल मैपिंग ​की गई. साथ ही 16 लाख मजदूरों का काउंसिलिंग कर उनमें विश्वास का महौल बनाया गया.

मजदूरों के बकाया भुगतान में भी भूमिका निभाई

कोरोना काल में जब मजदूर राज्य वापस लौट रहे थे, उस दौरान मजदूरों की मजदूरी नियोक्ता के द्वारा नहीं दी गयी थी. कंट्रोल रूम के प्रयास से 1 करोड़ 85 लाख 31 हजार 158 रुपये का बकाया मजदूरी का भुगतान कराया गया. वहीं विभिन्न राज्यों में राज्य के मजदूरों की हुई मौत पर उनके परिजनों को 55 लाख 70 हजार 683 रुपये मुआवजा दिलाया गया. लेह- लद्दाख में काम कर रहे झारखंड के मजदूरों को दलालों के माध्यम से किये जा रहे मजदूरी के भुगतान पर भी सरकार के प्रयास से शिकंजा कसा गया. श्रम विभाग झारखंड सरकार के सहयोग से चल रहा स्टेट माइग्रेंट्स कंट्रोल रूम आज भी मजदूरों के हित में कार्य कर रहा है.

क्या कहते हैं स्टेट माइग्रेंट्स कंट्रोल के टीम लीडर जॉनसन टोपनो

कोरोना के कारण देश भर में लॉकडाउन लगाया गया था. यह प्रवासी मजदूरों के लिए सबसे कठिन समय था. उसी दौरान श्रम विभाग झारखंड सरकार के साथ मिलकर फिया फाउंडेशन ने स्टेट माइग्रेंट्स कंट्रोल रूम की स्थापना की थी. हम प्रवासियों के जीवन और आजीविका के मुद्दों के विभिन्न आयामों को समझने में सक्षम थे. उस दौरान राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने अपने कार्य के बल पर अपनी विश्वसनीयता स्थापित की थी. आज भी असंगठित क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों के बीच बड़े पैमाने पर उनके सामने आने वाले विभिन्न मुद्दों, समस्याओं को झारखंड सरकार के सहयोग से हल किया जा रहा है. इसे भी पढ़ें – सातवीं">https://lagatar.in/jharkhand-news-7th-to-10th-jpsc-main-exam-result-released-802-candidates-successful/">सातवीं

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