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विशेष संसद सत्र 16 से, भाजपा ने व्हिप जारी किया, विपक्ष की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

NewDelhi : भाजपा ने आगामी विशेष संसद सत्र को लेकर लोकसभा और राज्यसभा सांसदों  के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है.सासंदों से 16 से 18 अप्रैल तक सदन में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है.

 

भाजपा सूत्रों के अनुसार इस अवधि के दौरान किसी भी सांसद या केंद्रीय मंत्री को छुट्टी नहीं मिलेगी. सभी सदस्यों को लगातार सदन में उपस्थित रहने और संसद की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाने का आदेश दिया गया है.

 

 

 

दरअसल यह विशेष संसद सत्र महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए बुलाया गया है. हालांकि विपक्षी दलों ने मोदी सरकार से सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने और परिसीमन जैसे मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है.

 


कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन के मुद्दे से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. उनका आरोप  कि विशेष संसदीय सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है. 

 


श्री खड़गे ने अपने पत्र मे लिखा कि 16 अप्रैल से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए संसद के विशेष सत्र पर मोदी जी को लिखे उनके पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया साझा कर रहा हूं. जैसा कि आप जानते हैं, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था.

 


उस समय कांग्रेस की ओर से मैंने मांग की थी कि यह महत्वपूर्ण कानून तुरंत प्रभावी होना चाहिए. आपने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इसके तत्काल कार्यान्वयन के लिए व्यापक सहमति थी, लेकिन आपने इसे लागू नहीं किया.

 


मल्लिकार्जुन खरगे  ने लिखा कि तब से 30 महीने हो गए हैं. अब यह विशेष बैठक हमें विश्वास में लिए बिना बुलाई गयी है. आपकी सरकार परिसीमन पर कोई विवरण दिये बिना फिर से हमारा सहयोग मांग रही है.

 


आप इस बात की सराहना करेंगे कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना, इस ऐतिहासिक कानून पर कोई उपयोगी चर्चा करना असंभव होगा.आपके पत्र में उल्लेख किया गया है कि आपकी सरकार इस संबंध में राजनीतिक दलों के साथ बातचीत में लगी हुई है.

 


 मुझे यह बताते हुए दुख हो रहा है कि यह सच्चाई के विपरीत है. क्योंकि सभी विपक्षी दल सरकार से 29 अप्रैल 2026 को मौजूदा दौर के चुनाव समाप्त होने के बाद संविधान संशोधनों पर विचार करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह कर रहे हैं.

 


मुझे यह लिखते हुए भी दुख हो रहा है कि सार्वजनिक महत्व के मामलों में सरकार का पिछला रिकॉर्ड, चाहे वह नोटबंदी, जीएसटी, जनगणना या यहां तक कि वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करने और कर हस्तांतरण जैसे संघीय ढांचे से संबंधित मामले हों, किसी भी विश्वास को प्रेरित नहीं करता है.

 


जिन संवैधानिक संशोधनों की योजना बनाई जा रही है, वे केंद्र और राज्यों दोनों को प्रभावित करेंगे और यह महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र में सभी दलों और राज्यों, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों, को सुना जाये.

 

  

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