- सरकारी स्कूलों में शिक्षक और छात्र का उपस्थिति के अंतर को समझिए.
Ranchi : झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों के अटेंडेंस (उपस्थिति) में बहुत बड़ा अंतर देखने को मिला है. अटेंडेंस का यह आंकड़ा एक अलग तरह की तस्वीर दिखा रहा है. स्कूल मॉनिटरिंग (School Monitoring) के आंकड़ों के मुताबिक, कई जगह शिक्षक स्कूल में मौजूद होते हैं, लेकिन छात्रों की उपस्थिति काफी कम रहती है. यानी स्कूलों में अटेंडेंस का बड़ा अंतर शिक्षकों और छात्रों के बीच दिखाई दे रहा है.
राज्य में शिक्षकों की अटेंडेंस करीब 75.4% रही, जबकि छात्रों का अटेंडेंस करीब 49.8% दर्ज की गई. दोनों के बीच लगभग 25.6 प्रतिशत का अंतर है. आंकड़ा यह सवाल खड़े करता है कि जब शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं, तो बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल से दूर क्यों हैं?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना भी जरूरी है. e-Vidya Vahini के Monitoring Data में Attendance को Working Days और Teachers/Students की संख्या के आधार पर calculate किया जाता है. इसलिए इसे सीधे-सीधे यह नहीं माना जा सकता कि राज्य के 75.4% शिक्षक या 49.8% बच्चे रोजाना स्कूल में मौजूद थे. यह Dashboard का attendance-target आधारित aggregate data है.
जिलावार तस्वीर और भी रोमांचक
कुछ जिलों में Teacher और Student Attendance के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है. जामताड़ा में छात्रों की उपस्थिति करीब 37.10% रही, जबकि शिक्षकों की उपस्थिति 75.64% थी. यानी दोनों के बीच करीब 38.5 प्रतिशत का अंतर रहा.
देवघर में छात्रों की उपस्थिति 37.75% और शिक्षकों की 73.28% रही. यहां अंतर करीब 35.5 प्रतिशत रहा. इसी तरह दुमका में छात्रों की उपस्थिति करीब 41.44% रही, जबकि शिक्षकों की उपस्थिति 79.38% थी. दोनों के बीच करीब 37.9 प्रतिशत का अंतर रहा.
पाकुड़ में छात्रों की उपस्थिति 42.54% और शिक्षकों की उपस्थिति 83.68% रही. यहां अंतर करीब 41.1 प्रतिशत तक पहुंच गया. पलामू में छात्रों की उपस्थिति 44.80% रही, जबकि शिक्षकों की उपस्थिति 80.14% दर्ज की गई. यानी करीब 35.3 प्रतिशत का अंतर.
राजधानी रांची की बात करें तो यहां छात्रों की उपस्थिति करीब 57.41% और शिक्षकों की उपस्थिति 68.94% रही. यानी अंतर करीब 11.5 प्रतिशत का है. पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) में छात्रों की उपस्थिति 52.93% और शिक्षकों की उपस्थिति 69.14% रही, जिससे अंतर करीब 16.2 प्रतिशत रहा.
दूसरी तरफ कुछ जिलों में छात्रों की उपस्थिति शिक्षकों से बेहतर रही. यानी Students की Attendance comparatively ज्यादा रही. हज़ारीबाग में छात्रों की उपस्थिति करीब 63.24% रही. रामगढ़ में यह 64.62%, लोहरदगा में 61.07% और गुमला में करीब 59.35% रही.
पश्चिमी सिंहभूम में शिक्षकों की उपस्थिति करीब 73.87% रही, जबकि छात्रों की उपस्थिति 49.15% थी. यहां अंतर करीब 24.7 प्रतिशत रहा.
Teachers की Attendance कहां ज्यादा-कहां कम?
| जिला | उपस्थिति का प्रतिशत |
| खूंटी | करीब 83.51%. |
| धनबाद | करीब 82.81%. |
| रामगढ़ | 81.34%. |
| सरायकेला खरसावां | 81.12%. |
| गिरीडीह | करीब 66.62%. |
| गुमला | 66.42%. |
| लोहरदगा | 67.45%. |
| रांची | 68.94%. |
| पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) | 69.14%. |
संवाददाता की टिप्पणी
झारखंड के सरकारी स्कूल का Attendance Data एक साफ अंतर दिखाता है. शिक्षक की कुल उपस्थिति करीब 75% और छात्रों की करीब 50% है. कई जिलों में यह अंतर 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच रहा है.
आंकड़े से पता चलता है कि स्कूलों में शिक्षक और छात्रों की उपस्थिति एक जैसी नहीं है. कई जिलों में शिक्षक की स्कूल में उपस्थिति 70-80% के आसपास या उससे ऊपर है, जबकि छात्रों की उपस्थिति 40-50% के आसपास दिखाई दे रही है.
लेकिन इस आंकड़े से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि छात्रों की कम उपस्थिति के लिए शिक्षक जिम्मेदार हैं. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे स्कूल तक पहुंच, परिवार के हालात, परिवार की आर्थिक स्थिति, बच्चों का बीमार पड़ना, बच्चों का घरेलू काम आदि.
अब असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि शिक्षक स्कूल पहुंच रहे है या नहीं. सवाल यह भी है कि कक्षा में छात्र क्यों नहीं पहुंच रहे?
