New Delhi : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जाति जनगणना और परिसीमन को लेकर मोदी सरकार को घेरा है. सोमवार को द हिंदू में प्रकाशित एक लेख में उन्होंने आरोप लगाया कि इस सप्ताह संसद के विशेष सत्र में बिल लाने के मोदी सरकार के कदम के पीछे असली मुद्दा परिसीमन है, महिला आरक्षण नहीं.
Any delimitation involving an increase in the strength of the Lok Sabha must be politically - and not just arithmetically - equitable. pic.twitter.com/qqcTRcovjX
— Congress (@INCIndia) April 13, 2026
मोदी सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण कानून लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना है. भाजपा ने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर उपस्थिति अनिवार्य कर दी है, जबकि विपक्ष विशेष सत्र बुलाने के समय पर सवाल उठा रहा हैं.
सोनिया गांधी ने लिखा कि परिसीमन का प्रस्ताव बेहद खतरनाक होने के साथ-साथ संविधान पर एक हमला है.लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा कोई भी परिसीमन राजनीतिक रूप से निष्पक्ष होना चाहिए, गणितीय रूप से नहीं. सोनिया गांधी ने अपने लेख में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी जाति जनगणना और देरी कर उसे पटरी से उतारना चाहते है.
प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से उन बिलों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं, जिन्हें संसद के विशेष सत्र में जबरन पास कराना चाहते है. यह तब हो रहा है, जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी अभियान चरम पर होगा. सोनिया के अनुसार इस असाधारण जल्दबाजी का सिर्फ एक ही कारण हो सकता है कि राजनीतिक फायदा उठाया जाये और विपक्ष को बचाव की मुद्रा में डाला जाये.
सोनिया गांधी ने लिखा कि संसद ने सितंबर 2023 में विशेष सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 सर्वसम्मति से पारित किया गया था. इस कानून के तहत संविधान में अनुच्छेद 334-A जोड़ा गया, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य किया गया था.
यह आरक्षण नयी जनगणना पूरी होने और जनगणना-आधारित परिसीमन प्रक्रिया के बाद लागू किया जाना था. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांग की थी कि आरक्षण का प्रावधान 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाये, लेकिन मोदी सरकार इस पर सहमत नहीं हुई.
सोनिया गांधी ने लिखा कि अब हमें कहा जा रहा है कि अनुच्छेद 334-A में संशोधन किया जायेगा, जिससे महिला आरक्षण 2029 से ही लागू किया जा सके. पूछा कि प्रधानमंत्री को अपना रुख बदलने में 30 महीने क्यों लग गये? पीएम मोदी विशेष सत्र बुलाने के लिए कुछ सप्ताह इंतजार क्यों नहीं कर सकते?'
उन्होंने लिखा कि विपक्षी नेताओं ने तीन बार पत्र लिखकर सरकार से अनुरोध किया है कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल चुनाव का अंतिम चरण समाप्त होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि सरकार के नये प्रस्तावों पर चर्चा की जा सके; लेकिन इसे ठुकरा दिया गया है.
सोनिया गांधी ने तंज कसा, इसके बजाय प्रधानमंत्री मोदी संपादकीय लिखने, राजनीतिक दलों से अपील करने और सम्मेलन आयोजित करने का सहारा ले रहे हैं, यह उनकी एक छिपी हुई चाल है.
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