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Spider-Man Moment in JPSC-JSSC Protest: सत्ता, विपक्ष और छात्र... आखिर उंगली किस पर?

सोशल मीडिया पर एक Meme काफी वायरल है. उसमें तीन Spider-Man एक-दूसरे की तरफ उंगली उठाए खड़े हैं. कोई तय नहीं कर पा रहा कि गलती किसकी है. इन दिनों रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम का माहौल भी कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां यह किसी कॉमिक का सीन नहीं, बल्कि लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य का सवाल है.
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Ranchi: सोशल मीडिया पर एक Meme काफी वायरल है. उसमें तीन Spider-Man एक-दूसरे की तरफ उंगली उठाए खड़े हैं. कोई तय नहीं कर पा रहा कि गलती किसकी है. इन दिनों रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम का माहौल भी कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां यह किसी कॉमिक का सीन नहीं, बल्कि लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य का सवाल है.

 

जयपाल सिंह स्टेडियम में पिछले कई दिनों से JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है. शुरुआत में यह आंदोलन एक मंच से चल रहा था, लेकिन अब इसकी दो तस्वीरें दिख रही हैं. एक तरफ JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो आमरण अनशन पर बैठे हैं. वहीं दूसरी तरफ छात्रों ने अपना अलग मंच और अलग टेंट बना लिया है.

 

छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं है. उनका मकसद सिर्फ भर्ती व्यवस्था में सुधार (Reformation) है. उनका कहना है कि राजनीतिक दल समर्थन करें, लेकिन आंदोलन का नेतृत्व और एजेंडा छात्रों के हाथ में ही रहना चाहिए.

 

यही वजह है कि अब जयपाल सिंह स्टेडियम में दो मंच हैं, लेकिन एक साझा चिंता है - भर्ती व्यवस्था में भरोसा कैसे लौटे?

 

Spider-Man Meme जैसा क्यों दिख रहा है पूरा माहौल?

अगर इस पूरे घटनाक्रम को इंटरनेट की भाषा में समझें तो यह Spider-Man Pointing Meme जैसा नजर आता है.

हर तरफ उंगलियां उठ रही हैं.

कोई पुराने पेपर लीक का जिक्र कर रहा है.

कोई नई भर्तियों में हुई गड़बड़ियों की बात कर रहा है.


कोई पिछले आयोगों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है.

कोई मौजूदा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर रहा है.

लेकिन इन सबके बीच छात्र दोनों तरफ देखकर सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं

हमारा करियर कौन लौटाएगा?

हमारी उम्र कौन वापस करेगा?

गलती किसी की भी रही हो, उसकी कीमत आखिर हर बार छात्र ही क्यों चुकाएं?

यही सवाल अब इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बन गया है.

आंदोलन दो हिस्सों में, लेकिन मुद्दा एक

छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक परीक्षा या एक रिजल्ट तक सीमित नहीं है. उनकी लड़ाई पूरे भर्ती सिस्टम में बदलाव की है.

 

उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं

* तय Exam Calendar लागू हो.
* समय पर वैकेंसी निकले और नियुक्तियां पूरी हों.
* Paper Leak रोकने के लिए मजबूत कानून और प्रभावी व्यवस्था बने.
* परीक्षा प्रक्रिया में Digital Monitoring लागू हो.
* Evaluation पूरी तरह पारदर्शी हो.
* दोषियों पर बिना किसी दबाव के कार्रवाई हो.
* JPSC और JSSC में Structural Reforms किए जाएं.

छात्रों का कहना है कि उन्हें सिर्फ रिजल्ट नहीं, ऐसा सिस्टम चाहिए जिसमें भविष्य में किसी अभ्यर्थी को बार-बार सड़क पर उतरना न पड़े.


कई लोग पहुंचे समर्थन देने

आंदोलन के दौरान कई सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग छात्रों से मिलने पहुंचे.

 

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने पहले आंदोलन स्थल के छात्रों से वीडियो कॉल के माध्यम से भी प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ झारखंड के छात्रों की नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रतियोगी युवाओं के भरोसे की लड़ाई है. भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है.

 

झारखंड के पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार भी आंदोलन स्थल पहुंचे. उन्होंने छात्रों की बात सुनने के बाद कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. यदि भर्ती प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थायी सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे.

 

इसके अलावा कई शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व अधिकारी भी छात्रों के समर्थन में पहुंचे. हालांकि छात्रों ने एक बात सभी से साफ कही -

Support चाहिए... Steering नहीं.

 

यानी वे चाहते हैं कि हर कोई उनकी मांगों का समर्थन करे, लेकिन आंदोलन की दिशा और नेतृत्व छात्रों के हाथ में ही रहे.

 

सबसे बड़ा सवाल

जयपाल सिंह स्टेडियम में बैठे कई छात्रों से बात करने पर एक बात बार-बार सामने आती है.

उन्हें अब यह जानने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है कि गलती पहले किससे हुई थी या बाद में किससे हुई.

 

वे सिर्फ यह जानना चाहते हैं -

क्या अगला पेपर सुरक्षित होगा?

क्या अगली भर्ती समय पर निकलेगी?

क्या उनका Attempt बच जाएगा?

क्या Age Limit खत्म होने से पहले उन्हें नौकरी का मौका मिलेगा?

उनका कहना है कि बार-बार होने वाली गड़बड़ियों का सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं छात्रों को उठाना पड़ता है, जो वर्षों तक तैयारी करते हैं.

 

आंदोलन का संदेश

जयपाल सिंह स्टेडियम का यह आंदोलन अब सिर्फ JPSC या JSSC की एक परीक्षा का आंदोलन नहीं रह गया है. यह भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसा बहाल करने की मांग का आंदोलन बन चुका है.

Spider-Man Meme में तीनों किरदार एक-दूसरे पर उंगली उठाते रहते हैं और कोई तय नहीं कर पाता कि असली गलती किसकी है.

रांची के इस आंदोलन में भी आरोप और जवाबी आरोपों की आवाजें लगातार सुनाई दे रही हैं.

लेकिन छात्रों का कहना है कि उन्हें यह नहीं जानना कि गलती किसकी थी.

उन्हें सिर्फ इतना चाहिए कि भर्ती व्यवस्था ऐसी बने, जहां मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य बार-बार दांव पर न लगे.

 

क्योंकि, जैसा आंदोलन में शामिल कई छात्र कहते हैं-

सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन एक प्रतियोगी छात्र की उम्र हर साल कम होती जाती है. ओवरएज हो जाने के बाद किसी के पास दूसरा मौका नहीं होता.

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