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एसपीओ हत्याकांड : भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रमोद मिश्रा से NIA कर रही पूछताछ

 
Ranchi : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) एसपीओ हत्या मामले में भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रमोद मिश्रा से पूछताछ कर रही है. बीते दिनों एनआईए जांच में खुलासा हुआ था कि प्रमोद मिश्रा ने अन्य नक्सली कैडरों को पुलिस मुखबिर होने के संदेह में नरेश सिंह भोक्ता को मारने का निर्देश दिया था. प्रमोद मिश्रा ने अंजनवा के जंगल में प्रतिबंधित संगठन के जोनल कमांडरों, एसएसी और आरसीएम की बैठक बुलायी थी, जिसमें नरेश सिंह भोक्ता समेत विभिन्न एसपीओ को खत्म करने का निर्णय लिया गया था. इसके बाद दो नवंबर 2018 को माओवादी कैडरों ने नरेश सिंह भोक्ता का अपहरण किया और उसकी हत्या कर दी थी. प्रमोद मिश्रा भाकपा माओवादी संगठन को पुनर्जीवित करने के प्रयासों में माओवादी के कैडरों और समर्थकों, ओवर ग्राउंड वर्कर्स का नेतृत्व कर रहे थे.

रोहित विद्यार्थी से पूछताछ के बाद बिहार पुलिस ने प्रमोद मिश्रा को किया था गिरफ्तार

बता दें कि बिहार पुलिस ने रितेश विद्यार्थी के भाई रोहित विद्यार्थी को गिरफ्तार कर पूछताछ की थी. इस दौरान रोहित विद्यार्थी ने पुलिस को बताया कि प्रमोद मिश्रा गया जिले के लुटुआ गांव आने वाला है. सूचना के आधार पर बिहार पुलिस ने नौ अगस्त 2023 को पोलित ब्यूरो सदस्य और एनआरबी (उत्तरी क्षेत्रीय ब्यूरो) के प्रभारी प्रमोद मिश्रा और अनिल यादव को गिरफ्तार कर लिया था. प्रमोद मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद बिहार पुलिस ने हथियार, गोला-बारूद और एक बंदूक फैक्ट्री का भी उद्भेदन किया था. जिसे बिहार और यूपी में हथियारों की सप्लाई करने और देसी हथियारों को इकट्ठा करने के लिए स्थापित किया गया था.

झारखंड-बिहार बॉर्डर पर माओवादियों को कर रहा था मजबूत

प्रमोद मिश्रा मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले के रफीगंज थाना क्षेत्र के कासमा गांव का रहने वाला है. उसका लंबे समय तक सारंडा में कार्यक्षेत्र रहा है. गिरफ्तारी से पहले वह झारखंड-बिहार सीमा पर छकरबंधा में माओवादियों को मजबूत करने में जुटा था. प्रमोद मिश्रा को नक्सली संगठन में वर्ष 2004 में केंद्रीय समिति सदस्य के रूप में शामिल किया गया था. वर्ष 2007 में पोलित ब्यूरो सदस्य बनाया गया था. वह 11 मई 2008 को धनबाद जिले के विनोद नगर से गिरफ्तार हुआ था. उसे न्यायालय ने सबूत के अभाव में वर्ष 2017 में रिहा कर दिया था. इसके बाद से ही वह क्षेत्र में फिर सक्रिय हो गया था. उस पर पुलिस पर हमले व कई नरसंहार का मास्टरमाइंड माना जाता है. [wpse_comments_template]
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