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रामलीला का मंचन आज भी प्रासंगिक : बैद्यनाथ राम

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Latehar :   रामलीला मंडली के कलाकार समाज को आइना दिखाने का काम करते हैं. मंडली भगवान श्रीराम व माता सीता का रूप धारण कर समाज को न सिर्फ रामायण के प्रसंगों से अवगत कराते हैं, वरन समाज को उसका अनुशरण करने का संदेश भी देते हैं. रामलीला का मंचन आज भी प्रासंगिक है. उक्त बातें श्रीराम विवाह उत्सव प्रसंग के दौरान श्रीरामचरित मानस नवाह्य परायण पाठ महायज्ञ समिति के मुख्य संरक्षक सह विधायक बैद्यनाथ राम ने कही.

रामलीला का दौर पहले भी था और आने वाले समय में भी रहेगा

शारदीय नवरात्र की तीसरी संध्या में मानस यज्ञ परिसर में बैद्यनाथ राम ने कहा कि आज के इस आधुनिक व डिजिटल दौर में रामलीलाओं का मंचन नहीं होता है. लोग इसे आउट डेटेड समझते हैं. लेकिन रामलीला का दौर पहले भी था और आने वाले समय में भी रहेगा. लोग इसकी महत्ता को समझेगें. टीवी के सीरियत और फिल्म में तो रि-टेक होता है, लेकिन रामलीला में कोई रि-टेक नहीं होता है, रामलीला में इसे लाइव किया जाता है.

कलाकरों ने राजा जनक के दरबार में माता सीता के स्वयंवर का दृष्य का मंचन किया

बैद्यनाथ राम के संबोधन से पहले रामलीला मंडली के कलाकरों ने राजा जनक के दरबार में माता सीता के स्वयंवर का दृष्य का मंचन किया. भगवान श्रीराम ने भगवान शिव के धनुष को तोड़ने के प्रसंग का जीवंत मंचन किया. लोगों ने तालियां बजा कर कलाकारों की हौसला अफजाई की. मौके पर महायज्ञ समिति के अध्यक्ष प्रमोद प्रसाद सिंह, महामंत्री सुदामा प्रसाद, कोषाध्यक्ष विनोद कुमार महलका, मदन प्रसाद, अनिल प्रसाद, विधायक प्रतिनिधि प्रभात कुमार, जय कुमार सिंह, संतोष अग्रवाल, कन्हाई प्रसाद अग्रवाल व प्रकाश मोहन अग्रवाल आदि मौजूद रहे. [wpse_comments_template]

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